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जब हैरी मेट सेजल तो फिल्म हुई बोझल‍

जैसे सुबह से दिन का पता चल जाता है, वैसे ही फिल्म जब हैरी मेट सेजल की पहली झलक रही. ऐसा लगता है कि शाहरुख खान को कास्ट करने के चक्कर में कहानी में जबरन भावुकता लाने की कोशिश की गई है. अनुष्का शर्मा भी पर्दे पर असहज ही लगती हैं.

जहां तक जब हैरी मेट सेजल के निर्देशक इम्तियाज अली की बात है तो वे साल-दर-साल एक जैसी फिल्में दे रहे हैं. उनका कॉम्प्लेक्स रोमांस कई बार आंखों में आंसू तो ले आता है लेकिन अपने साथ बांध नहीं पाता है. लिहाजा जब हैरी मेट सेजल बोर करने लगती है.

कहानी तो हमें पता ऐसे ही है

जब हैरी मेट सेजल भी दूसरी बॉलीवुड फिल्मों की तरह ही प्रिडिक्टेबल है. फिल्म में टूर गाइड हैरी यूरोप में छुटि्टयां मनाने आए एक भारतीय समूह के साथ नजर आता है. वह इस समूह की तस्वीरें खींचता है और उनके बीच रहकर कुछ अनोखा अनुभव पाने की उम्मीद करता है, जिसे वह अपनी जिंदगी में मिस कर रहा है. ये कमी क्या है? इम्तियाज अली इसका जवाब देते हैं. वे बताते हैं कि हम अपनी सीट पर गहरी नींद में हैं!

हैरी और सेजल की मुलाकात तब होती है, जब सेजल अपनी एंगेजमेंट रिंग खो देती है. सेजल का पूरा परिवार इंडिया वापस लौट जाता है, लेकिन सेजल कहती है कि वह इंडिया तभी वापस आएगी, जब वह अपनी सगाई की अंगूठी ढूंढ लेगी. इस तरह एक 'खोए हुए टूर गाइड' और 'गाइडेंस की जरूरतमंद गुजराती लड़की' की यात्रा शुरू होती है.

शाहरुख ने पहले भी भगाई दूसरों की दुल्हनिया

 लेकिन इसी के साथ जब हैरी मेट सेजल देखने गए दर्शकों की मुसीबत भी शुरू हो जाती है. शाहरुख ने इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं किया, जो उन्होंने पहले न किया हो. यहां तक कि वह कई फिल्मों में दूसरों की दुल्हनिया पहले भी भगा चुके हैं. दिलवाले वाले दुल्हनिया ले जाएंगे तो याद ही होगी आपको!

जहां तक जब हैरी मेट सेजल में अनुष्का के किरदार की बात है तो उन्होंने अपने गुजराती एक्सेंट के अलावा कुछ नया नहीं किया. इम्तियाज ने जरूर थोड़ा बहुत नया किया है. उनकी फिल्म करण जौहर की 2000 के दशक की फिल्म लगती है, जिसमें हजारों गाने हैं, रोमांटिक डायलॉग और बेहद ऊबाऊ कैरेक्टर भी हैं. यह जरूर है कि जितने समय ये फिल्म स्क्रीन पर रहती है, आप बुडापेस्ट, प्राग, बर्लिन, लिस्बन, विएना आदि शहर देख सकते हैं. इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है कि आप फिल्म को नजरें गढ़ाकर ध्यान से देखें.

कहां जाएगा अब शाहरुख खान का करियर

यह सही है कि शाहरुख के पिछले 25 साल के काम को पसंद किया गया है, लेकिन यह भी सही है कि वे इस फिल्म से दर्शकों के सामने बड़ी उलझन पैदा करने वाले हैं. भले ही फिल्म में आपको शाहरुख के तौर पर राहुल या दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे के राज नजर आ जाएं, लेकिन सेजल सिमरन बिल्कुल भी नहीं हैं. अनुष्का शर्मा काजोल नहीं लगतीं. 150 मिनट तक अनुष्का का गुजराती एक्सेंट कोई सुखद अहसास नहीं देता है. फिल्म में इतने गाने हैं कि एक हद के बाद आप उन्हें गिनना ही छोड़ देंगे.

यदि जब हैरी मेट सेजल नहीं बनती तो भी बॉलीवुड में कोई फर्क पैदा नहीं होने वाला था. इस फिल्म से शाहरुख, अनुष्का और इम्तियाज तीनों की फिल्मोग्राफी में एक खराब फिल्म जुड़ गई है. भले ही शाहरुख को अपनी फिल्म के गाने- सफर का ही था मैं सफर का रहा... सुकून दे, लेकिन बाकी सबके लिए हैरी और सेजल का मिलना अच्छा अनुभव नहीं रह सकता है.

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