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सुषमा का असरदार भाषण, जानिये 10 खास बातें

संयुक्‍त राष्‍ट्र। विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ महासभा में असरदार भाषण दिया। उन्‍होंने अपने संबोधन में आतंकवाद और प्रगति के मसलों पर खुलकर बोला। आइये जानते हैं उनके भाषण की दस खास बातें।

1- सुषमा स्वराज के उद्बोधन का शुरूआत भारत सरकार के द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों से की। उन्होंने कहा कि गरीबी को दूर करना हमारा प्रथम लक्ष्य होना चाहिए।

हमारी सभी योजनाए गरीबों को सशक्तिकरण करने के लिए ही बनी हैं। जनधन योजना का विशेष उल्लेख किया। हमारा लक्ष्य 100 प्रतिशत लोगों को बैंक से जोड़ना है। भारत के लोगों के पास पैसा नहीं लेकिन बैंक एकाउंट जरुर है।

2- दूसरी योजना मुद्रा योजना है। इसमें 70 प्रतिशत ऋण महिलाओं को दिया जा रहा है। उज्ज्वला योजना में गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर दिया जा रहा है।

बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ, जनधन योजना, विमुद्रीकरण, का विशेष उल्लेख कर भारत के विकास की रूपरेखा को प्रदर्शित किया। भारत में बनी आज तक की सभी सरकारों को विकास के क्षेत्र में लगातार कार्य करने का श्रेय दिया।

3- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कि भारत में लोकतंत्र की हत्या हो रही है, मानवाधिकार की हत्या हो रही है तो यूएन में मौजूद सभी देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि 'लुक हू इज टॉकिंग'

4- पाकिस्तान को याद दिलाया कि कंप्रिहेंसिव बाईलेट्रल डॉयलाग में दोनों देशों के बीच में कश्मीर सहित सभी विवादों पर बातचीत में किसी दूसरे देश की मध्यस्‍थता नहीं करने का वादा किया था लेकिन पाकिस्तान ने इसे तोड़ा। हम एक साथ आजाद हुए लेकिन आज हम कहां हैं और पाकिस्तान कहां पहुंचा है।

5- भारत और पाकिस्तान एक साथ स्वतंत्र हुए लेकिन पाकिस्तान आतंकवादी राष्ट्र बना और भारत आईटी का सिरमौर बना। पाकिस्तान ने जेहादी, दहशतगर्द पैदा किए। हमने आईआईटी, आइआइएम, एम्स, बनाया।

पाकिस्तान ने जैश ए मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन और हक्कानी नेटवर्क बनाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित पड़ोसी देशों में भी आतंकवाद फैलाने का आरोप है।

6- भारत जब भी आतंकवाद पर विश्व के सभी देशों को एकजुट होने के लिए कहा करते थे तो विश्व के बड़े-बड़े देश इसे कानून व्यवस्था का मुद्दा बताते थे। लेकिन आज जब अपने सर पर पड़ा तो सबको आतंकवाद को मानना पड़ा।

7- भारत के द्वारा समर्थित सीसीआईटी की सभी धाराओं पर लगभग सहमति बनी है लेकिन आतंकवाद पर एकराय नहीं बनी कि आतंकवाद की क्या परिभाषा होगी।

हमें यह स्वीकार करना होगा कि गुड और बैड आतंकवाद को भूलकर सबको एक होना चाहिए। विश्व के सभी देशों को सीसीआईटी पर एक राय बनाकर उसे पारित करने का प्रयास करना चाहिए।

8- जलवायु परिवर्तन पर एक राय बने। हमने किसी लाभ के लिए इसका समर्थन नहीं किया क्योंकि हमारा यह पुरातन संकल्प है कि विश्व में शांति सौहार्द बना रहे।

हम संसार में सभी के लिए शांति की कामना करते हैं। हाल ही में आ रहे हरिकेन एक चेतावनी है कि हम जलवायु परिवर्तन पर ध्यान दें। विकसित देश अविकसित देशों को टेक्‍नालॉजी ट्रांसफर में सहायता करें।

9- उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार करने की जरूरत है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र पीस कीपिंग में भी सुधार करने की जरुरत है। इसमें सभापति जी को कुछ करना चाहिए। हम वसुधैव कुटुंबकम की कामना करते हैं।

10- अपने संबोधन के अंत श्लोक के साथ किया। सर्वे भवंतु सुखिन, सर्वें संतु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मां कश्चिद दुख भागभवेत्। इसके बाद सुषमा स्वराज को स्टेंडिंग ओवेशन मिला। तालियों की जोरदार आवाज से उनका समर्थन किया गया।

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