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पति का वारंट जारी नहीं हुआ तो पत्नी ने की जज से बदसलूकी

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पति का वारंट जारी नहीं होने से नाराज महिला ने जज से बदसलूकी की। कोर्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसने जज को अपशब्द कहे। वकीलों ने उसे रोका तो वह उनसे भी भीड़ गई। महिला वकीलों ने उसे कोर्ट रूम से बाहर करने की कोशिश की तो वह हाथापाई पर उतर आई। उसने महिला वकीलों के बाल नोंचे और मारपीट की। पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है।

हंगामा बुधवार दोपहर छावनी क्षेत्र स्थित कुटुम्ब न्यायालय में हुआ। स्कीम-78 अरण्य नगर निवासी आशा उर्फ निशा पति विजय राठौर ने पति के खिलाफ भरण-पोषण वसूली का केस दायर किया है। कुटुम्ब न्यायालय ने विजय को आदेश दिया था कि वह पत्नी को नियमित रूप से भरण-पोषण दें, लेकिन वह नहीं दे रहा था। इस पर पत्नी ने वसूली का केस दायर किया। बुधवार को केस की सुनवाई के दौरान जज रेणुका कंचन के सामने विजय की पेशी थी, लेकिन वह नहीं आया। आशा के वकील सुबह कोर्ट में उपस्थित होकर 3 अगस्त की तारीख लेकर चले गए।

दोपहर में आशा आई और उसने जज से कहा कि आप मेरे पति का वारंट जारी कर दो। जज ने उसे समझाया कि तुम्हारे पति को नोटिस तामिल नहीं हुआ है। जब तक नोटिस तामिल नहीं होता तब तक वारंट जारी नहीं किया जा सकता। इतना सुनते ही आशा भड़क गई। उसने कोर्ट और जज पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए टिप्पणी शुरू कर दी। कोर्ट ने उसे समझाइश दी कि यह कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें बदलाव नहीं हो सकता। इसके बावजूद महिला नहीं मानी। वह जज के सामने रखी फाइल और अन्य सामान फेंकने लगी। हंगामा होता देख कोर्ट रूम में मौजूद महिला वकीलों ने आशा को कोर्ट रूम से बाहर निकालने की कोशिश की तो वह उनसे भी भिड़ गई।

सुबह भी हुआ था हंगामा

एक अन्य मामले में कुटुम्ब न्यायालय में बुधवार सुबह वकील और पक्षकार के बीच मारपीट भी हुई थी। जज सुरभि मिश्रा की कोर्ट में एक गवाह का प्रतिपरीक्षण चल रहा था। वकील द्वारा पूछे सवाल पर गवाह नाराज हो गया। उसने आपत्तिजनक टिप्पणी की और वकील की तरफ मुंह कर थूक दिया। वकील गवाह की इस हरकत पर नाराज हो गए। उन्होंने कोर्ट रूम में ही गवाह को पीट दिया।

सालों से हो रही है चौकी की मांग

हर रोज कुटुम्ब न्यायालय में विवाद की स्थिति बनती है, लेकिन यहां पर्याप्त संख्या में पुलिसबल तैनात नहीं रहता। एडवोकेट प्रमोद जोशी, अचला जोशी, अमरसिंह राठौर आदि ने बताया कि इससे पहले भी कई बार विवाद की स्थिति बनी है, जिसे देखते हुए न्यायालय परिसर में पुलिस चौकी की मांग उठती रही है, लेकिन अब तक इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

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