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एम्स में वाजपेयी: पांच घंटे बाद पहुंचे राहुल, फिर मोदी-शाह और आडवाणी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सोमवार दोपहर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 'नियमित परीक्षण' के लिए भर्ती कराया गया है. एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया की देखरेख में यहां उनका इलाज किया जा रहा है. एम्स में भर्ती होने के बाद पांच घंटे तक कोई नेता उनसे मिलने नहीं पहुंचा, लेकिन शाम 6 बजे राहुल गांधी के पहुंचने के बाद वाजपेयी को देखने के लिए एम्स में तमाम नेता आने लगे.

वाजपेयी को दोपहर एक बजे के करीब रूटीन जांच के लिए एम्स लाया गया. उसके बाद सबसे पहले शाम करीब 6 बजे वाजपेयी को देखने राहुल गांधी एम्स पहुंच गए. राहुल के बाद पीएम मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं का एम्स में जमावड़ा लगने लगा.

राहुल के कुछ ही देर के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पहुंच गए. उनके बाद पीएम मोदी एम्स पहुंचे. उन्होंने डॉक्टरों से वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी हासिल की. पौन घंटे से अधिक देर तक रुकने के बाद मोदी रात साढ़े आठ बजे के करीब एम्स से निकल गए.

मोदी के बाद भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी भी एम्स पहुंचे. अब खबर है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी एम्स पहुंचने वाले हैं.

इससे पहले आज दोपहर में भाजपा ने बयान में कहा कि चिकित्सकों की सलाह पर वाजपेयी को आज एम्स में नियमित परीक्षण के लिए भर्ती कराया गया है. अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि वरिष्ठ नेता की हालत स्थिर है और परीक्षण किया जा रहा है.

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इस बीच एम्स ने एक मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि उनकी हालत स्थिर है. एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया की देखरेख में चिकित्सकों का एक दल परीक्षण कर रहा है. गुलेरिया पलमोनोलॉजिस्ट हैं और कई सालों से वाजपेयी के निजी चिकित्सक रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने भी कहा कि वाजपेयी को नियमित परीक्षण के लिए भर्ती कराया गया है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता वाजपेयी 1996 में कुछ दिनों के लिए और उसके बाद 1998 से 2004 तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

इस बीच वाजपेयी के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक उनकी हालत दो दिन पहले जैसी ही है. वे सिर्फ रूटीन चेकअप के लिए एम्स पहुंचे हैं. बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत पिछले काफी समय से खराब है, जिसके कारण वह अपने घर में ही थे.

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एम्स की ओर से कहा गया है कि वाजपेयी इस समय कॉर्डियो न्यूरो सेंटर में हैं. किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं है. उनके पास फिलहाल कोई नहीं जा सकता. वीआईपी मूवमेंट पर भी रोक लगा दी गई है. एम्स की ओर से कहा गया है कि वाजपेयी को डिस्चार्ज करने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. हालांकि शाम 6 बजे के बाद से कई नेता उनसे मिलने पहुंचने लगे.

93 वर्षीय अटल बिहारी वाजपेयी डिमेंशिया नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. वे 2009 से ही व्हीलचेयर पर हैं. कुछ समय पहले भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

आपको बता दें कि वाजपेयी 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए थे. वह बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूर्ण करने वाले पहले और अभी तक एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता हैं. 25 दिसंबर, 1924 में जन्मे वाजपेयी ने भारत छोड़ो आंदोलन के जरिए 1942 में भारतीय राजनीति में कदम रखा था.

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