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अमित शाह ने 3 बैठकें कीं और फिर बता गए चौथी बार जीत का मंत्र

बलपुर। मप्र में विधानसभा चुनाव में जीत का मंत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिया। पहले उन्होंने चुनावी होमवर्क को देखा। फिर सरकार की कमियों को खूबियों में बदलने का फार्मूला बता दिया। भेड़ाघाट के होटल मार्बल रॉक्स में बैठक हुई। चुनाव प्रबंध समिति के 26 सदस्यों के बीच रणनीति सार्वजनिक हुई। इससे पहले अमित शाह ने बंद कमरे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और संगठन महामंत्री रामलाल के साथ करीब 45 मिनट तक अलग से चर्चा की। इसके बाद होटल गुलजार में आईटी सेल के सदस्यों की बैठक ली।

कमलनाथ का कितना असर-

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का महाकौशल क्षेत्र में कितना असर है। कितनी सीटें इससे प्रभावित होंगी, इस बात पर गौर किया जाए। अमित शाह ने पिछले विधानसभा चुनाव में हजार-दो हजार वोट के मार्जिन से हार-जीत वाली सीटों पर मौजूदा स्थिति समझने की बात कही। उन्होंने कहा कि गोंगपा और बसपा के साथ कांग्रेस का गठबंधन मप्र के चुनाव में होता है तो उससे कितनी सीटों पर असर पड़ सकता है। इसके लिए हमारी क्या तैयारी है, ऐसी सीटों पर मजबूती से काम किया जाए।

 

मोदी देंगे मालवा में राहुल को जवाब-

पिछले दिनों मंदसौर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा हुई। इसमें भारी संख्या में किसान जुटे। इस सभा का जवाब देने के लिए भाजपा प्रधानमंत्री को मप्र लाएगी। अभी 23 जून को प्रधानमंत्री का दौरा प्रस्तावित है। पार्टी तैयारियों के मद्देनजर इस दौरे को आगे बढ़ा सकती है, ताकि बड़ी सभा करने के लिए तैयारी हो सके। यह सभा भी मालवा क्षेत्र में संगठन करवाएगा।

 

जातिगत समीकरण पर करें गौर-

मप्र के चुनाव में जातिगत समीकरण को लेकर भी पार्टी ने गंभीरता बरतने को कहा है। अमित शाह ने कहा कि जाति वर्ग से जुड़े नेता उन समाज के लोगों से मिलें। उनकी सरकार को लेकर नाराजगी दूर करने का प्रयास करें। वर्ग संतुलन बैठाया जाए। पार्टी सूत्रों की मानें तो इसी दौरान राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार पर मालवा की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। यहां से एक भी मंत्री नहीं होने का हवाला दिया।

 

पार्टी के कार्यक्रमों का प्रभाव कम-

भाजपा के लगातार आयोजन के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका असर प्रभावी ढंग से नहीं दिखाई दे रहा है। इस बात को लेकर अमित शाह ने संगठन को कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से पेश करने की नसीहत दी। बताया कि लोगों को सरकार की उपलब्धि और काम की जानकारी अच्छे ढंग से पता चले इस पर जोर रहे।

 

सरकार किसानों को समझाने में नाकाम-

चुनाव प्रबंध समिति की बैठक में अमित शाह ने प्रदेश के किसानों की नाराजगी पर बात की। कहा कि किसान आंदोलन के मुद्दे को कांग्रेस भुना रही है जबकि मप्र की सरकार ने कि किसानों के लिए जो कुछ किया वो किसी ने नहीं किया। फिर भी हम जमीनी स्तर पर इस बात को समझाने में नाकाम रहे। जनप्रतिनिधि इस बात को किसानों तक सही तरीके से पहुंचाएं। इसके अलावा व्यापारियों के बीच भी पार्टी को पकड़ मजबूत बनाने को कहा।

 

शहर में बूथ, गांव तक बनाए पकड़-

अमित शाह ने शहर के एक-एक बूथ और ग्रामीण क्षेत्र में हर गांव में कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा करने को कहा। कहा कि मौजूदा स्थिति को बेहतर बनाकर ही चुनाव में जीत हासिल की जा सकती है। उन्होंने सरकार की योजना को भी लोगों के बीच बेहतर ढंग से बताने पर जोर दिया।

 

संगठन के दम पर चुनाव-

अमित शाह ने चुनाव प्रबंधन समिति को साफ कर दिया कि इस बार किसी व्यक्ति से ज्यादा संगठन के कंधे पर चुनाव लड़ा जाएगा। चुनाव के लिए टिकट भी प्रदेश के सर्वे के आधार पर नहीं तय होगा। केन्द्रीय स्तर पर टीम सर्वे करेगी। जिस उम्मीदवार की जमीनी स्थिति सहीं नजर आएगी उसी को टिकट मिलेगी।

बलपुर। मप्र में विधानसभा चुनाव में जीत का मंत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिया। पहले उन्होंने चुनावी होमवर्क को देखा। फिर सरकार की कमियों को खूबियों में बदलने का फार्मूला बता दिया। भेड़ाघाट के होटल मार्बल रॉक्स में बैठक हुई। चुनाव प्रबंध समिति के 26 सदस्यों के बीच रणनीति सार्वजनिक हुई। इससे पहले अमित शाह ने बंद कमरे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और संगठन महामंत्री रामलाल के साथ करीब 45 मिनट तक अलग से चर्चा की। इसके बाद होटल गुलजार में आईटी सेल के सदस्यों की बैठक ली।

कमलनाथ का कितना असर-

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का महाकौशल क्षेत्र में कितना असर है। कितनी सीटें इससे प्रभावित होंगी, इस बात पर गौर किया जाए। अमित शाह ने पिछले विधानसभा चुनाव में हजार-दो हजार वोट के मार्जिन से हार-जीत वाली सीटों पर मौजूदा स्थिति समझने की बात कही। उन्होंने कहा कि गोंगपा और बसपा के साथ कांग्रेस का गठबंधन मप्र के चुनाव में होता है तो उससे कितनी सीटों पर असर पड़ सकता है। इसके लिए हमारी क्या तैयारी है, ऐसी सीटों पर मजबूती से काम किया जाए।

 

मोदी देंगे मालवा में राहुल को जवाब-

पिछले दिनों मंदसौर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा हुई। इसमें भारी संख्या में किसान जुटे। इस सभा का जवाब देने के लिए भाजपा प्रधानमंत्री को मप्र लाएगी। अभी 23 जून को प्रधानमंत्री का दौरा प्रस्तावित है। पार्टी तैयारियों के मद्देनजर इस दौरे को आगे बढ़ा सकती है, ताकि बड़ी सभा करने के लिए तैयारी हो सके। यह सभा भी मालवा क्षेत्र में संगठन करवाएगा।

 

जातिगत समीकरण पर करें गौर-

मप्र के चुनाव में जातिगत समीकरण को लेकर भी पार्टी ने गंभीरता बरतने को कहा है। अमित शाह ने कहा कि जाति वर्ग से जुड़े नेता उन समाज के लोगों से मिलें। उनकी सरकार को लेकर नाराजगी दूर करने का प्रयास करें। वर्ग संतुलन बैठाया जाए। पार्टी सूत्रों की मानें तो इसी दौरान राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार पर मालवा की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। यहां से एक भी मंत्री नहीं होने का हवाला दिया।

 

पार्टी के कार्यक्रमों का प्रभाव कम-

भाजपा के लगातार आयोजन के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका असर प्रभावी ढंग से नहीं दिखाई दे रहा है। इस बात को लेकर अमित शाह ने संगठन को कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से पेश करने की नसीहत दी। बताया कि लोगों को सरकार की उपलब्धि और काम की जानकारी अच्छे ढंग से पता चले इस पर जोर रहे।

 

सरकार किसानों को समझाने में नाकाम-

चुनाव प्रबंध समिति की बैठक में अमित शाह ने प्रदेश के किसानों की नाराजगी पर बात की। कहा कि किसान आंदोलन के मुद्दे को कांग्रेस भुना रही है जबकि मप्र की सरकार ने कि किसानों के लिए जो कुछ किया वो किसी ने नहीं किया। फिर भी हम जमीनी स्तर पर इस बात को समझाने में नाकाम रहे। जनप्रतिनिधि इस बात को किसानों तक सही तरीके से पहुंचाएं। इसके अलावा व्यापारियों के बीच भी पार्टी को पकड़ मजबूत बनाने को कहा।

 

शहर में बूथ, गांव तक बनाए पकड़-

अमित शाह ने शहर के एक-एक बूथ और ग्रामीण क्षेत्र में हर गांव में कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा करने को कहा। कहा कि मौजूदा स्थिति को बेहतर बनाकर ही चुनाव में जीत हासिल की जा सकती है। उन्होंने सरकार की योजना को भी लोगों के बीच बेहतर ढंग से बताने पर जोर दिया।

 

संगठन के दम पर चुनाव-

अमित शाह ने चुनाव प्रबंधन समिति को साफ कर दिया कि इस बार किसी व्यक्ति से ज्यादा संगठन के कंधे पर चुनाव लड़ा जाएगा। चुनाव के लिए टिकट भी प्रदेश के सर्वे के आधार पर नहीं तय होगा। केन्द्रीय स्तर पर टीम सर्वे करेगी। जिस उम्मीदवार की जमीनी स्थिति सहीं नजर आएगी उसी को टिकट मिलेगी।

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