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जस्टिस गोगोई के सीजेआई बनने पर शक की कोई वजह नहीं, पहले सरकार को नाम तो भेजा जाए: कानून मंत्री

नई दिल्ली.कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को जस्टिस रंजन गोगोई को अगला चीफ जस्टिस बनाए जाने की अटकलों पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर किसी को केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। इसकी कोई वजह नहीं है। रिटायरमेंट से पहले सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज का नाम भेजते हैं, फिर केंद्र इस पर फैसला लेता है। जब तक कोई नाम नहीं भेजा जाता, यह पूछना काल्पनिक है। सीजेआई दीपक मिश्रा का कार्यकाल 2 अक्टूबर को खत्म होगा। जस्टिस गोगोई प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों में शामिल थे। सीजेआई के लिए उनका नाम सबसे आगे चल रहा है।


- रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया के मुताबिक कार्यकाल पूरा होने से पहले चीफ जस्टिस एक सीनियर जज के नाम की सिफारिश कानूम मंत्री से पास भेजते हैं। सरकार इस परंपरा को बरकरार रखेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 4 साल के कार्यकाल में रिकॉर्ड संख्या में जजों की नियुक्ति हुई हैं। अप्रैल 2015 से मई 2018 के बीच सुप्रीम कोर्ट में 18 और हाईकोर्ट में 331 जजों की नियुक्ति की। इसके अलावा 313 एडिशनल जजों को हाईकोर्ट में स्थाई किया गया।

पहली बार जजों ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस


- 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे। जजों ने चीफ जस्टिस के कोर्ट चलाए जाने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। जजों ने कहा था कि चीफ जस्टिस संवेदनशील मुद्दे सिर्फ अपनी पसंद की बेंच को ही सौंपते हैं। इसके अलावा जजों ने जस्टिस लोया के केस पर भी टिप्पणी की थी।

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