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क्रिकेट में कबूतरबाजी, फर्जी क्रिकेटर बनाकर विदेश भेजने का गोरखधंधा

फर्स्ट क्लास क्रिकेट से जुड़ा कबूतरबाजी का वो काला सच जो पहले कभी सामने नहीं आया. इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने अपनी पड़ताल में पाया कि क्रिकेट के इस इमिग्रेशन घोटाले में राज्य स्तर के कुछ खिलाड़ी ही ‘बड़ा खेल’ खेलने में लगे हैं.

जांच में सामने आया कि कुछ पूर्व रणजी क्रिकेटर ही विदेश जाने की चाहत रखने वाले युवकों से मोटी कीमत वसूल कर इस गोरखधंधे को अंजाम देने में लगे हैं.

इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने कबूतरबाजी के इस खेल के संदिग्ध सूत्रधार की तलाश में जयपुर का रुख किया. 19 साल तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में प्रतिनिधित्व करने वाले और राजस्थान के पूर्व रणजी कप्तान मोहम्मद असलम को सहयोगी हर्ष कौशिक के साथ कैमरे में कैद किया. इसमें साफ सुना जा सकता है कि किस तरह असलम और कौशिक खुद ही मानव तस्करी के नापाक खेल में अपने शामिल होने की बात कबूल कर रहे हैं.   

असलम की ओर से जयपुर में स्टार क्रिकेट एकेडमी का संचालन किया जाता है. असलम साथ ही जयपुर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर तैनात है. वहीं असलम का सहयोगी कौशिक भी पूर्व अंडर-19 क्रिकेटर रहा है.  

इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने असलम और कौशिक के साथ जयपुर के एक होटल में बात की. अंडर कवर रिपोर्टर्स ने जब असलम से कुछ छोटे कारोबारियों को क्रिकेटर के छद्म वेश में विदेश भेजे जाने की संभावना के बारे में पूछा तो जवाब मिला- “आपने चौक्के और छक्के मारे हैं.”

असलम ने मोटी कीमत के बदले इस काम के लिए तैयार होने की बात कही.  

असलम ने कहा, सब पैसे का चक्कर है भाई, बस ये जेहन में रखना कि हमारी आपसी समझदारी ऐसी होनी चाहिए कि हम महसूस करें कि अपना ही काम कर रहे हैं.   

असलम ने फिर कौशिक को आगे कर दिया. कौशिक ने बताया कि क्रिकेट की आड़ में वो कैसे लोगों को विदेश भेजता रहा है.   

असलम ने कहा, “हर्ष (कौशिक) ये सारे टूर देखता है.  वो खुद सारे ग्रुप साथ ले जाता है. काफी समय पहले मैं भी इंग्लैंड जाया करता था. चार-पांच साल पहले मैंने कुछ विवादों के चलते ऐसा करना बंद कर दिया. मैं क्रिकेट राजनीति (राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ी) में भी शामिल हूं.”   

अंडर कवर रिपोर्टर ने पूछा, ‘इसका मतलब कि हम आपसे बात करें या कौशिक के साथ, बात एक ही है.’  

पूर्व रणजी खिलाड़ी असलम ने कहा, एक ही बात है. आप भाई हर्ष से बात करें, कोई दिक्कत नहीं.

जब इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स कौशिक से अलग से मिले तो उसने दक्षिण अफ्रीका के आगामी टूर के लिए विदेश जाने की चाहत रखने वाले युवकों को क्रिकेटर बना कर ले जाने की पेशकश की.

कौशिक ने कहा, ‘दो रास्ते हैं. एक तो असली- जिसमें प्रोफेशनल क्रिकेटर्स को विदेश ले जाया जाता है और वो वहां खेल कर वापस आ जाते हैं. दूसरे रास्ते को ‘स्लिप’ कहा जाता है. इसे भी हम अपने टूरों के हिस्से के तौर पर करते हैं.’

रिपोर्टर ने पूछा- आप क्रिकेट के लिए लगातार दौरे करते हैं. आप हमारे आदमियों को क्रिकेट टीम के सदस्य के तौर दक्षिण अफ्रीका क्यों नहीं भेज देते?  

कौशिक ने वादा किया- ‘अगले महीने भी मेरा एक टूर है. उसके बाद भी कई टूर पाइपलाइन में हैं. मैं उन्हें भेज दूंगा.’ कौशिक ने ‘फर्जी क्रिकेटर्स’ को जुलाई के पहले हफ्ते में दक्षिण अफ्रीका ले जाने की हामी भरी.   

कौशिक ने कहा, ‘ये 15 लोगों की टीम होगी लेकिन मैं 25 के लिए आवेदन कर सकता हूं. क्रिकेट टीम के सदस्य के तौर पर 25 लोग आवेदन (वीजा के लिए) कर सकते हैं.’  

अंडर कवर रिपोर्टर ने कहा, ‘हमारे चार आदमियों को दक्षिण अफ्रीका भेज दीजिए, लेकिन उन्हें क्रिकेट खेलना नहीं आता.’  

कौशिक ने कहा, ‘सब हो जाएगा.’  कौशिक के दावे खाली हवा में तुक्का नहीं थे.   

कौशिक ने इंडिया टुडे की इंवेस्टीगेटिव टीम को ऐसे कुछ फर्जी क्रिकेटर्स की तस्वीरें भी दिखाई जिन्हें उसके दावे के मुताबिक मई में क्रिकेट टीम के सदस्य के तौर पर दक्षिण अफ्रीका भेजा गया था.

कौशिक ने सेल-फोन पर फोटो पर दिखाते कहा, ‘मैं आपको अभी यहीं वो टीम दिखा सकता हूं जिसे पिछले महीने दक्षिण अफ्रीका भेजा था. वो भी क्रिकेट खेलना नहीं जानते थे. ये देखिए.’

रिपोर्टर ने पूछा, ‘उनमें से कितने फर्जी क्रिकेटर थे?’

 

कौशिक-  ‘5 से 6’ (कौशिक ने साथ ही कबूल किया कि ये सभी दक्षिण अफ्रीका जाकर गायब हो जाना चाहते थे.)

किसी शातिर जालसाज की तरह कौशिक ने अवैध प्रवासन के लिए पूरी तरह गारंटी ली.  

कौशिक ने कहा, ‘हम आपसे वीजा के लिए चार्ज नहीं करेंगे. आप हमारे पास तब आना जब आपके लोग रवाना हो चुके होंगे क्योंकि हम आपको जानते हैं. आप वीजा और एयर टिकटों की प्रतियों के बदले नकद पैसा लेकर आना. आप उन्हें ऑनलाइन या कहीं भी वैरीफाई कर सकते हैं.’

कौशिक ने इस अवैध रूट से प्रति व्यक्ति विदेश भेजने के लिए अपनी कीमत 30 लाख रुपए बताई. कौशिक ने कहा, ‘करीब 28 से 30 लाख रुपये लगेंगे.’  

कौशिक ने दावा किया कि उसका फर्जीवाड़ा ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड समेत कई देशों में अब तक कहीं पकड़ा नहीं जा सका है.  

कौशिक ने कहा, ‘हकीकत ये है कि मेरे पास पहले से ही पंजाब से 15 लोग हैं (इंग्लैड टूर के लिए). वो सारे फर्जी हैं.’

इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने राजस्थान के ही एक और पूर्व फर्स्ट क्लास क्रिकेटर विनोद चंवरिया से हुई. 32 वर्षीय चंवरिया कैनेडियन लीग टीम, वैंकुवर आईलैंड शैल का सदस्य है. ये सुराग मिलने के बाद कि चंवरिया फर्जी क्रिकेटर्स बना कर लोगों को विदेश भेजने से जुड़ा है, अंडर कवर रिपोर्टर्स ने चंवरिया से दिल्ली में मुलाकात की.  

कनाडा बेशक मेनस्ट्रीम इंटरनेशनल क्रिकेट से बाहर है लेकिन वहां क्रिकेट के संचालन के लिए 1982 से ही एक राष्ट्रीय संगठन काम कर रहा है. कनाडा ने 2011 में भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में आयोजित हुए आईसीसी वर्ल्ड कप में हिस्सा भी लिया था.

चंवरिया ने बताया कि किस तरह उसने फर्जी क्रिकेटर्स को टीम के सदस्य के तौर पर वीजा के लिए आवेदन करने से पहले कैनिडियन लीग के एक पाकिस्तानी प्रमोटर से प्रमाणित कराया था.

चंवरिया ने कहा, ‘मैंने 5 से 6 लाख रुपए मांगे. अगर मैं 25 लाख भी कहता (वो खर्चने को तैयार थे) लेकिन पासपोर्ट पर पंजाब का उल्लेख होने से वीजा जारी नहीं किया जाता.’   

पंजाब के काल्पनिक कारोबारियों के ग्रुप को फर्जी क्रिकेटर के तौर पर विदेश ले जाने के लिए पैसे पर मोल-तोल करने का ये चंवरिया का तरीका था.    

चंवरिया ने कहा, ‘मैं वहां 4-5 साल से खेलने के लिए जा रहा हूं.’ चंवरिया ने कनाडा स्थित पाकिस्तानी प्रमोटर की पहचान ‘जावेद भाई’ के तौर पर बताई.  

चंवरिया ने कहा, मैं पासपोर्ट (की प्रतियां) उन्हें (जावेद भाई) को भेज दूंगा. उसके बाद ही निमंत्रण की चिट्ठियां जारी की जाएंगी. ये सुरक्षित फाइल होगी. किसी की भी उस तक पहुंच नहीं होगी.

रिपोर्टर ने पूछा, ‘आप उन्हें कैसे ले जाओगे? क्रिकेट लीग के हिस्से के तौर पर, सही है ना.’

चंवरिया ने कहा, ‘हां, हम उन्हें किसी तरह फिट कर लेंगे.’

चंवरिया ने पुष्टि के लहजे में कहा कि फर्जी खिलाड़ियों को क्रिकेट लीग के हिस्से के तौर पर कनाडा ले जाया जाएगा.

चंवरिया ने इसके बाद अपनी फीस के बारे में बताया- प्रति व्यक्ति 25-30 लाख रुपए. चंवरिया ने कहा कि लोग इतना ही पैसा खर्च कर रहे हैं.

रिपोर्टर ने कहा, ‘अगर लोग वहां छह महीने के लिए वैध रूप से काम करने जाए और फिर वीजा अवधि में ही वापस आ जाए  तो उसका क्या?’

चंवरिया ने जवाब दिया, ‘5 लाख रुपए. हम उसे टीम मैनेजर या कुछ और (कागज पर) दिखाएंगे, जाने का असली मकसद क्या है उसे भूल जाओ.’

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