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14 साल बाद शनिवार को हरियाली अमावस्या का विशेष संयोग

 इस बार हरियाली अमवास्या के अवसर पर शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। 14 साल बाद शनिवार के दिन हरियाली अमवास्या का संयोग बन रहा है। ऐसे में शनि की साढ़े साती, काल सर्प व अन्य कुंडली दोषों के निवारण के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। साथ ही शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रहेगी। शनिदेव को प्रसन्ना करने के लिए काला कपड़ा चढ़ाया जाएगा व तेलाभिषेक किया जाएगा।

 श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या शनिवार को अश्लेषा नक्षत्र में मनाई जाएगी। क्योंकि संवत्सर के मंत्री शनिदेव हैं, ऐसे में शनिवार के दिन ही हरियाली अमावस्या पड़ जाने के कारण शनिदेव की पूजा करना शुभकारी होगा। वृषभ व कन्या राशि में ढैय्या शनि। वृश्चिक, धनु, मकर राशि में साढ़े साती शनि चल रहा है। इन राशियों के जातकों को शनिदेव को कला कपड़ा, तिल, तेल, लोहा चढ़ाकर शनि मंत्र, ऊं शं शनिश्चराय नमः के साथ पूजा करने से लाभ मिलेगा। शनिश्चरी अमावस्या के विषय में मान्यता है कि इस दिन हर व्यक्ति को एक पौधा लगाना चाहिए। धार्मिक मान्यता अनुसार पेड़ों में देवताओं का वास माना गया है। शास्त्रानुसार पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु महेश) का वास होता है। वहीं आंवले के पेड़ में लक्ष्मीनारायण के विराजमान होने की मान्यता है।

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