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गर्मी में फल-सब्जियां ज्यादा खाएं, लेकिन इन बातों की जरूर रखें सावधानी

रायपुर। बढ़ते तापमान से शहर की आबोहवा गर्म-सी हो गई, वहीं खेत से लेकर बाग-बगीचों में प्राकृतिक पैदावार भी घटने लगी है। इससे बाजार में बिकने वाली सब्जी, फल केवल ताजे और हरे दिखने के कारण खरीद रहे हैं तो संभल जाइए। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सब्जी, फल, दूध, कोलड्रिक्स में मिलावट से लोगों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए जांच-परख कर यदि खरीदी नहीं की तो सेहतमंद बनने के बजाय कई रोगों के शिकार हो जाएंगे, इसलिए बाजार से खरीद रहे फल और सब्जी खाने से अच्छी तरह से दो से तीन बार धो ले।पत्तेदार हरी सब्जियों को पहले गर्म पानी में उबाल लें, उसके बाद ही सब्जी बनाएं। इस दौरान फल और सब्जियों पर उपयोग हुए केमिकल्स की सच्चाई का पता चल जाएगा।आइजीकेवी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम साहू की मानें तो अप्रैल से जुलाई तक गर्मी सीजन के चलते जल स्तर घटने लगता है। इससे अधिकांश खेतों में फसल लगने के बजाय खाली रहते हैं। ऐसे में राजधानी से सटे खेत- बाड़ी की सिंचाई बोरवेल ही एक मात्र साधन होता है, जो हैं, वे भी सूखने लगे हैं, इसलिए रासायनिक उर्वरकों के बजाय किसानों को जैविक रूप से फसल लेने के लिए विवि में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्याज की खेती हो या हरी सब्जियों की पैदावार करना हो, इसलिए स्वस्थ्य रहना है तो मौसम अनुकूल फल, हरी सब्जियों का सेवन करें।

आर्थिक रूप से जुड़े व्यापारी अधिक लाभ कमाने के चक्कर में समय से पहले ही दूसरे राज्यों से विदेशी फल, सब्जियों की दस्तक शुरू हो जाती है, जिन्हें गोदाम में रखकर तरोताजा रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करते हैं।

हालांकि इसमें कीट, सड़ने से रोकने के लिए कुछ वैध रासायनिकों का उपयोग होता है, लेकिन इनका भी एक निर्धारित अनुपात होना चाहिए। लोगों को समय अनुरूप फल, सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

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