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सिंधिया खेमा ही गुटबाजी का शिकार

ग्वालियर .कांग्रेस में जितने नेता उतने गुट हैं .मगर खास बात यह हे की पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने गुट के नेताओं को भी एकजुट करने में नाकाम रहे हैं .मंत्री और बिधायकों में छत्तीश का आंकड़ा रहता है .सबसे ज्यादा गुटबाजी ग्वालियर बिधानसभा में है .मंत्री प्रदुम्मन सिंह तोमर ने उन सबसे दुरी बना ली है ,जिहोने चुनाव में पूरी मेहनत से काम किया .इस छेत्र में सारे श्री सिंधिया समर्थक मंत्री की कार्यशैली से नाराज हैं .यहां तक की कल तक मंत्री की गाड़ी में साथ घूमने बाले नगरनिगम में नेता प्रतिपक्ष कृष्ण राव दीक्षित ने भी  मंत्री से दूरी बना ली है .प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा और मंत्री  में पहले से ही वर्चस्व की जंग छिड़ी रहती है .साफ शब्दों में अगर कहा जाए तो श्री सिंधिया समर्थक प्याज के छिलकों की तरह बिखरे हुए हैं .जहाँ तक कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा  का सबाल है तो उन्होंने भी गुटबाजी को हवा दी है .श्री शर्मा से अधिक लोकप्रय नेता तो आज भी रमेश अग्रवाल हैं .इन्होने कांग्रेस को बेहतर तरीके से चलाया था ,भले ही बे घोसित रूप  से अध्यक्ष न रहे हों .आज कांग्रेस के बड़े नेताओं अशोक शर्मा समेत कई नेताओं की जिला कांग्रेस में उपेक्षा हो रही है .सूत्र बताते हैं की अशोक शर्मा ने जिला अध्यक्ष को एक दिन खूब खरी खोटी सुनाई थीं .दो नावों पर सबार  रहने बाले जिला अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा गुटबाजी फैलाकर ही अपनी कुर्सी सुरक्षित रखना चाहते हैं .महाराज साहब को भी ऐसे लोगों पर नजर रखना होगी .

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