रकà¥à¤·à¤¾à¤¬à¤‚धन: राखी बांधते समय बहनें रखें इन बातें का खà¥à¤¯à¤¾à¤²
बहनों को इस परà¥à¤µ का बड़ी ही बेसबà¥à¤°à¥€ से इंतजार रहता है। जब बहनें अपने à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ की कलाई पर रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° बांधती है तो वे यह कामना करती हैं कि उसके à¤à¤¾à¤ˆ के जीवन में कà¤à¥€ कोई कषà¥à¤Ÿ न हो, वह उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ करें और उसका जीवन सà¥à¤–मय हो। इसी तरह à¤à¤¾à¤ˆ à¤à¥€ इस रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° को बंधवाकर गौरवांवित अनà¥à¤à¤µ करते हैं और जीवन à¤à¤° अपनी बहन की रकà¥à¤·à¤¾ करने की कसम खाते है। à¤à¤¾à¤ˆ-बहन में परसà¥à¤ªà¤° सà¥à¤¨à¥‡à¤¹ व पà¥à¤¯à¤¾à¤° इस परà¥à¤µ की गरिमा को और बà¥à¤¾ देता है।
इस दिन सà¤à¥€ बहनें अपने à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ की कलाई पर राखी बांधने से पहले à¤à¤• विशेष थाली सजाती हैं। इस थाली में सात खास चीजें होनी चाहिà¤à¥¤
. कà¥à¤®à¤•à¥à¤®
2. चावल
3. नारियल
4. रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° (राखी)
5. मिठाई
6. दीपक
7. गंगाजल से à¤à¤°à¤¾ कलश
पूजा की थाली में कà¥à¤¯à¥‹ रखनी चाहिà¤à¤‚ ये खास सामगà¥à¤°à¥€
1. कà¥à¤®à¤•à¥à¤®
तिलक मान-समà¥à¤®à¤¾à¤¨ का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। बहन कà¥à¤®à¤•à¥à¤® का तिलक लगाकर à¤à¤¾à¤ˆ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤•ट करती है तथा à¤à¤¾à¤ˆ की लंबी उमà¥à¤° की कामना à¤à¥€ करती है। इसलिठथाली में कà¥à¤®à¤•à¥à¤® विशेष रूप से रखना चाहिà¤à¥¤
2. चावल
चावल शà¥à¤•à¥à¤° गà¥à¤°à¤¹ से à¤à¥€ संबंधित है। शà¥à¤•à¥à¤° गà¥à¤°à¤¹ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से ही जीवन में à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• सà¥à¤–-सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤“ं की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है। तिलक लगाने बाद तिलक के ऊपर चावल à¤à¥€ लगाठजाते हैं। तिलक के ऊपर चावल लगाने का à¤à¤¾à¤µ यह है कि à¤à¤¾à¤ˆ के जीवन पर तिलक का शà¥à¤ असर हमेशा बना रहे तथा à¤à¤¾à¤ˆ को समसà¥à¤¤ à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• सà¥à¤–-सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हों।
3. नारियल
बहन अपने à¤à¤¾à¤ˆ को तिलक लगाने के बाद हाथ में नारियल देती है। नारियल को शà¥à¤°à¥€à¤«à¤² à¤à¥€ कहा जाता है। शà¥à¤°à¥€ यानी देवी लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ का फल, यह सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। बहन à¤à¤¾à¤ˆ को नारियल देकर यह कामना करती है कि à¤à¤¾à¤ˆ के जीवन में सà¥à¤– और समृदà¥à¤§à¤¿ हमेशा बनी रहे और वह लगातार उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ करता रहे। यह नारियल à¤à¤¾à¤ˆ को वरà¥à¤·à¤ªà¤°à¥à¤¯à¤‚त अपने घर मे रखना चाहिà¤à¥¤
4. रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° (राखी)
बहन राखी बांधकर अपने à¤à¤¾à¤ˆ से उमà¥à¤° à¤à¤° रकà¥à¤·à¤¾ करने का वचन लेती हैं। à¤à¤¾à¤ˆ को à¤à¥€ ये रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° इस बात का अहसास करवाता रहता है कि उसे हमेशा बहन की रकà¥à¤·à¤¾ करनी है। रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° का अरà¥à¤¥ है, वह सूतà¥à¤° (धागा) जो हमारे शरीर की रकà¥à¤·à¤¾ करता है। रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° बांधने से तà¥à¤°à¤¿à¤¦à¥‹à¤· शांत होते हैं। तà¥à¤°à¤¿à¤¦à¥‹à¤· यानी वात, पितà¥à¤¤ और कफ। हमारे शरीर में कोई à¤à¥€ बीमारी इन दोषों से ही संबंधित होती है। रकà¥à¤·à¤¾ सूतà¥à¤° कलाई पर बांधने से शरीर में इन तीनों का संतà¥à¤²à¤¨ बना रहता है। ये धागा बांधने से कलाई की नसों पर दबाव बनता है, जिससे ये तीनों दोष निंयतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रहते हैं।
5. मिठाई
राखी बांधने के बाद बहन अपने à¤à¤¾à¤ˆ को मिठाई खिलाकर उसका मà¥à¤‚ह मीठा करती है। मिठाई खिलाना इस बात का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है कि बहन और à¤à¤¾à¤ˆ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में कà¤à¥€ कड़वाहट न आà¤, मिठाई की तरह यह मिठास हमेशा बनी रहे।
6. दीपक
राखी बांधने के बाद बहन दीपक जलाकर à¤à¤¾à¤ˆ की आरती à¤à¥€ उतारती है। इस संबंध में मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि आरती उतारने से सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की बà¥à¤°à¥€ नजरों से à¤à¤¾à¤ˆ की रकà¥à¤·à¤¾ हो जाती है। आरती उतारकर बहन कामना करती है कि à¤à¤¾à¤ˆ हमेशा सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और सà¥à¤–ी रहे।
7. गंगाजल से à¤à¤°à¤¾ कलश
राखी की थाली में गंगा जल से à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† à¤à¤• कलश à¤à¥€ रखा जाता है। इसी जल को कà¥à¤®à¤•à¥à¤® में मिलाकर तिलक लगाया जाता है। हर शà¥à¤ काम की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में जल से à¤à¤°à¤¾ कलश रखा जाता है। à¤à¤¸à¥€ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि इसी कलश में सà¤à¥€ पवितà¥à¤° तीरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ और देवी-देवताओं का वास होता है। इस कलश की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से à¤à¤¾à¤ˆ और बहन के जीवन में सà¥à¤– और सà¥à¤¨à¥‡à¤¹ सदैव बना रहता है।