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शिव ने यहां काटा था गणेशजी का सिर, मौजूद हैं निशान
पिथौरागढ़.हिमालय की वादियों के बीच à¤à¤• दà¥à¤°à¥à¤—म सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¤¸à¥€ गà¥à¤«à¤¾ मौजूद है, जिसके बारे में मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि à¤à¤—वान शिव ने गणेशजी का सिर यहीं काटा था। लेकिन बाद में माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के निवेदन पर इसी जगह गणेशजी के धड़ पर हाथी का सिर लगाया गया। इसी मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ को जानने के लिठDainikBhaskar.Com की टीम पहà¥à¤‚ची इस पाताल à¤à¥à¤µà¤¨à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° गà¥à¤«à¤¾ में। ये गà¥à¤«à¤¾ उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤–ंड के पिथौरागढ़ जिले में है। टीम को यहां पहà¥à¤‚चने में लगà¤à¤— 3 दिन का समय लगा। कई खतरनाक पहाड़ों की चढ़ाई करनी पड़ी। घने जंगलों और à¤à¤¾à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से होते हà¥à¤ टीम आखिरकार यहां तक पहà¥à¤‚च पाई। à¤à¤¸à¥‡ पहà¥à¤‚चते हैं इस 90 मीटर गहरी गà¥à¤«à¤¾ में...
- समà¥à¤¦à¥à¤° तल से 1670 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद इस गà¥à¤«à¤¾ तक पहà¥à¤‚चना आसान नहीं था। कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद हम पहà¥à¤‚चे अलà¥à¤®à¥‹à¤¡à¤¼à¤¾ से 220 किमी दूर खूबसूरत लेकिन खतरनाक पहाड़ों के बीच मौजूद इस गà¥à¤«à¤¾ में।
- गà¥à¤«à¤¾ के बाहर हमें मंदिर के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ परिवार के नीलम à¤à¤‚डारी मिले। इनका परिवार कई पीढ़ियों से इस मंदिर में पूजा कर रहा है।
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- नीलम à¤à¤‚डारी ने हमें पहले ही चेता दिया था कि गà¥à¤«à¤¾ के अंदर ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ काफी कम है। इसलिठयदि हारà¥à¤Ÿ या सांस की कोई बीमारी है तो अंदर न ही जाà¤à¤‚।
- 90 मीटर गहरी इस गà¥à¤«à¤¾ में उतरने के लिठ88 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सीढ़ियां बनी हà¥à¤ˆ हैं, जो कि गà¥à¤«à¤¾ की दीवारों से टपकते पानी की वजह से फिसलनà¤à¤°à¥€ थीं।
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इतना छोटा है गà¥à¤«à¤¾ के अंदर जाने का रासà¥à¤¤à¤¾
- गà¥à¤«à¤¾ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने के लिठ3 फीट चौड़ा और 4 फीट लंबा मà¥à¤‚ह बना हà¥à¤† है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि जो यहां शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• आता है, वही इसमें पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर पाता है।
- आखिरकार अंधेरी सीढ़ियों से उतरते हà¥à¤ हम पहà¥à¤‚च ही गà¥à¤«à¤¾ के अंदर मौजूद रहसà¥à¤¯ को जानने। जैसे- जैसे हम अंदर उतरते जा रहे थे, हमें सांस लेने में दिकà¥à¤•त आनी लगी। लेकिन नीचे पहà¥à¤‚चकर à¤à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤‚ट में हमें वो दिखा, जो सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ में लिखा है।
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- आखिरकार अंधेरी सीढ़ियों से उतरते हà¥à¤ हम पहà¥à¤‚च ही गà¥à¤«à¤¾ के अंदर मौजूद रहसà¥à¤¯ को जानने। जैसे- जैसे हम अंदर उतरते जा रहे थे, हमें सांस लेने में दिकà¥à¤•त आनी लगी। लेकिन नीचे पहà¥à¤‚चकर à¤à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤‚ट में हमें वो दिखा, जो सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ में लिखा है।
शिवजी ने कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ गणेशजी का सिर अलग किया था, कहां मिलता है इस गà¥à¤«à¤¾ का जिकà¥à¤°?
- सà¥à¤•ंद पà¥à¤°à¤¾à¤£ के 'मानस खंड' के 103 अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में à¤à¥€ इस गà¥à¤«à¤¾ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– है। पà¥à¤°à¤¾à¤£ में लिखा गया है कि à¤à¤—वान शिव ने गणेशजी का सिर इस गà¥à¤«à¤¾ में उस समय धड़ से अलग कर दिया था, जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने शिव को मां पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को मिलने से रोका था।
- बाद में माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के कहने पर à¤à¤—वान गणेश को हाथी का सिर इसी गà¥à¤«à¤¾ में लगाया गया था।
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- बाद में माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के कहने पर à¤à¤—वान गणेश को हाथी का सिर इसी गà¥à¤«à¤¾ में लगाया गया था।
6736 साल पहले हà¥à¤ˆ थी इस गà¥à¤«à¤¾ की खोज
- गà¥à¤«à¤¾ के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ नीलम à¤à¤‚डारी ने बताया कि अयोधà¥à¤¯à¤¾ के राजा ऋतà¥à¤ªà¤°à¥à¤£à¤¾ à¤à¤—वान शिव के बहà¥à¤¤ बड़े à¤à¤•à¥à¤¤ थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही इस गà¥à¤«à¤¾ की खोज की थी।
- अगर पौराणिक इतिहास से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अलग-अलग किताबों पर नजर डालें तो पता चलता है कि राजा ऋतà¥à¤ªà¤°à¥à¤£à¤¾ का सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ ईसा पूरà¥à¤µ 4720 के आसपास यानी आज से 6736 साल पहले था।
- गà¥à¤«à¤¾ के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ नीलम à¤à¤‚डारी ने बताया कि अयोधà¥à¤¯à¤¾ के राजा ऋतà¥à¤ªà¤°à¥à¤£à¤¾ à¤à¤—वान शिव के बहà¥à¤¤ बड़े à¤à¤•à¥à¤¤ थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही इस गà¥à¤«à¤¾ की खोज की थी।
- अगर पौराणिक इतिहास से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अलग-अलग किताबों पर नजर डालें तो पता चलता है कि राजा ऋतà¥à¤ªà¤°à¥à¤£à¤¾ का सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ ईसा पूरà¥à¤µ 4720 के आसपास यानी आज से 6736 साल पहले था।