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कांग्रेस ने मुँह की खाई , धरना ख़त्म

ग्वालियर। शहर जिला कांग्रेस के तत्वाधान में आयोजित कांग्रेस का डेरा डालो-घेरा डालो आंउोलन जहां जोर शोर से निगम मुख्यालय तक तो पहुंचा , लेकिन आंदोलन की निगम मुख्यालय पहुंचते ही पूरी हवा निकल गई। आंदोलन को लेकर पूर्व विधायक प्रद्युम्र सिंह तोमर पहले तो टेंट लगाकर धरने पर बैठ गये, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनके पास धरना देने की अनुमति है नहीं और जिला प्रशासन कभी भी उन्हें निगम मुख्यालय जाने वाली सड़क से रास्ता अवरूद्ध करने के नाम पर खदेड देगा और जेल भी भेज सकता है। उसके बाद वह बाल भवन में कांग्रेस नेताओं के इंतजार में बैठे  à¤®à¤¹à¤¾à¤ªà¥Œà¤° विवेक शेजवलकर और निगमायुक्त विनोद शर्मा से महानगर की समस्याओं पर बात करने एक प्रतिनिधि मंडल के साथ पहुंचे और महापौर सहित निगमायुक्त से चर्चा कर समस्याओं के समाधान की पहल की और  à¤•ांग्रेस का ड्रामा पांच घंटे में सिमट गया। 
कांगे्रस के पूर्व विधायक प्रद्युम्र सिंह तोमर पिछले ३२ दिनों से उपनगर की गंदे पानी , सीवर, साफ सफाई पेयजल आदि समस्याओं को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं संभाग के कददावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने के बाद पूरी सिंधिया कांग्रेस प्रद्युम्र के आंदोलन को कांग्रेस का बताते हुए पीछे खडी हो गई। कांग्रेस ने वाकायदा एक प्रेस कांन्फ्रेंस कर कहा कि छह सिंतंबर को निगम के मुख्यालय पर डेरा डालो -घेरा डालो आंदोलन पूरी कांग्रेस करेगी। इसकी तैयारियां भी की गई। उधर जिला एवं पुलिस प्रशासन ने प्रद्युम्र और कांग्रेस के आंदोलन को देखते हुए निगम मुख्यालय तक कांग्रेस जनों को ना पहुंचने देने की योजना तैयार कर बेरीकेटिंग कर दी। 
उधर चार शहर के नाके से जनता और कार्यकर्ताओं का जुलूस लेकर पूर्व विधायक प्रद्युम्र सिंह प्रमुख रास्तों पर अपना स्वागत कराते हुए निगम मुख्यालय पहुंचे। वहां पर भारी पुलिस बल और सितंबर में भीषण गर्मी को देखते हुए उन्होंने पुलिस की बेरीकेटिंग ना लांघने का फैसला किया साथ ही उससे कुछ पहले निगम के तरणताल के पास टेंट गाड कर धरना देना शुरू कर दिया। इस आंदोलन के चलते कांग्रेस नेताओं और निगमायुक्त विनोद शर्मा से बात हुई थी कि वह निगम मुख्यालय से नीचे आ जाएं और उनके कुछ नेता निगम मुख्यालय में समस्याओं को लेकर चर्चा कर लेंगे। इस बात से पूर्व विधायक प्रद्युम्र सिंह और कांगे्रस के आंदोलन समिति के संयोजक पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल पलट गये। वहीं महापौर और निगमायुक्त निगम के एक कार्यालय बाल भवन में बैठकर कांग्रेस का इंतजार करने लगे। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक यह चला कि कौन कहां जाकर बात करेगा। चूंकि कांग्रेस नेता पहले ही एक प्रतिनिधि मंडल के साथ बाल भवन में बात करने की हामी भर चुके थे। इसके बाद महापौर और निगमायुक्त ने संयुक्त रूप से कहा कि कांग्रेस पदाधिकारी अब बाल भवन में ही आकर बात करें। 
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पूर्व विधायक से अधिकारियों के धरना स्थल पर आने के बाद ही बात करने के लिए ईशारा किया था। इसके बाद आंदोलन समिति के संयोजक पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास करते रहे, लेकिन वह आउट ऑफ कवरेज एरिया में होने से बात नहीं हो सकी। काफी देर बाद बात होने पर सिंधिया ने भी बाल भवन जाकर ही बात करने के लिए अपनी सहमति दी। इसके बाद कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल बाल भवन पहुंचा। 
उधर कांग्रेस के अपनी तय बात से पलटने के बाद भी महापौर और निगमायुक्त कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल के इंतजार में बाल भवन में अपने अधिकारियों से बैठे इंतजार करते रहे। अधिकारियों का कहना था कि कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल बाल भवन में बैठकर चर्चा करे। जबकि कांग्रेस नेता प्रद्युम्र सिंह धरना स्थल पर ही बात करना चाह रहे थे। काफी देर इंतजार करने के बाद महापौर विवेक शेजवलकर बाल भवन से चले गये। उधर कांग्रेस के डेरा डालो-घेरा डालो में शामिल होने आए लगभग ७५ प्रतिशत महिलाएं और पुरूष वापस अपने घरों को लौट गये। अंत में कांग्रेस को अधिकारियों के समक्ष झुकना पडा और लगभग पांच घंटे ड्रामा करने के बाद कांग्रेस के पदाधिकारी एवं नेताओं का प्रतिनिधि मंडल बाल भवन में समस्याओं को लेकर बात करने पर राजी हुआ। बाल भवन कार्यालय में बैठकर पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, प्रद्युम्र सिंह तोमर, मुन्ना लाल गोयल, पूर्व विधायक रामवरन सिंह, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कृष्णकांत दीक्षित कल्लू, रश्मि पवार शर्मा, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमलेश कौरव, देवेन्द्र सिंह तोमर आदि के समक्ष समस्याओं पर चर्चा हुई और निगमायुक्त के आश्वासन के बाद डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन समाप्त हो गया।

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