गोवरà¥à¤§à¤¨ पूजा : जानिठशà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤, पूजा विधि और कà¥à¤¯à¤¾ हैं महतà¥à¤µ
दीपावली के अगले दिन गोवरà¥à¤§à¤¨ परà¥à¤µ मनाया जाता है। इस परà¥à¤µ के दिन शाम के समय खास पूजा रखी जाती है। इस वरà¥à¤· गोवरà¥à¤§à¤¨ पूजा या अनà¥à¤¨à¤•ूट दिवस 20 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 2017 यानि शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को है। इस दिन सà¤à¥€ लोग अपनी दà¥à¤•ानों की पूजा करते हैं।
à¤à¤¸à¥‡ करें गोवरà¥à¤§à¤¨ पूजा
अनà¥à¤¨ की पूजा के साथ इस दिन कई जगह लंगर और à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤°à¥‡ लगाठजाते हैं। इस दिन गोबर से लीप कर गोवरà¥à¤§à¤¨ बनाया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। इस दिन मंदिरों में अनà¥à¤¨à¤•ूट किया जाता है। इस दिन गोबर का गोवरà¥à¤§à¤¨ बनाया जाता है इसका खास महतà¥à¤µ होता है।
इस दिन सà¥à¤¬à¤¹-सà¥à¤¬à¤¹ गाय के गोबर से गोवरà¥à¤§à¤¨ बनाया जाता है। इसके बाद उसे फूलों और पेड़ों का डालियों से सजाया जाता है और शाम को इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेदà¥à¤¯, जल, फल, खील, बताशे आदि का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है।
गोवरà¥à¤§à¤¨ पूजा का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
सà¥à¤¬à¤¹ का मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤- सà¥à¤¬à¤¹ 06:28 बजे से 08:43 बजे तक
शाम का मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ - 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¦à¤¾ - रात 00:41 बजे से शà¥à¤°à¥‚ (20 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 2017)
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¦à¤¾ तिथि समापà¥à¤¤ - रातà¥à¤°à¤¿ 1:37 बजे तक (21 अकà¥à¤¤à¥‚बर 2017)
इंदà¥à¤° का घमंड किया था चूर
इंदà¥à¤° को अपनी शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर घमंड हो गया था। तब à¤à¤—वान कृषà¥à¤£ ने उनके घमंड को चूर करने के लिठà¤à¤• लीला रची। इसमें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¤à¥€ बà¥à¤°à¤œà¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और अपनी माता को पूजा की तैयारी करते हà¥à¤ देखाकर पूछा कि आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं?
तब माता ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बताया कि वह इंदà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤µ की पूजा की तैयारी कर रही हैं। कृषà¥à¤£ ने कहा कि हम इंदà¥à¤° की पूजा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ करते है? तब यशोदा मां ने कहा कि इंदà¥à¤° वरà¥à¤·à¤¾ करते हैं और उसी से हमें अनà¥à¤¨ और हमारी गाय के घास मिलता है। यह सà¥à¤¨à¤•र कृषà¥à¤£ जी ने कहा कि हमारी गाय तो गोवरà¥à¤§à¤¨ परà¥à¤µà¤¤ पर चरती है, तो हमारे लिठवही पूजनीय होना चाहिà¤à¥¤ इंदà¥à¤° देव तो घमंडी हैं वह कà¤à¥€ दरà¥à¤¶à¤¨ नहीं देते हैं।