नठतरीके से हà¥à¤ˆ महाकाल की आरती, RO के पानी से हà¥à¤† जलाà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤•
मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के उजà¥à¤œà¥ˆà¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ महाकालेशà¥à¤µà¤° मंदिर में आज नठनियम के तहत पूजा की गई। आज जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग पर कपड़ा लपेटकर à¤à¤¸à¥à¤® आरती की गई। इसके अलावा जलाà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• के लिठà¤à¥€ आरओ वाटर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया गया। इतना ही नहीं आज बिना शकà¥à¤•र के ही à¤à¤¸à¥à¤®à¤¾à¤°à¤¤à¥€ हà¥à¤ˆ है, जबकि पहले शकà¥à¤•र, दूध, दही, शहद और जल से अलग-अलग सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कराया जाता था। कल सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ ने मंदिर में जल और पंचामृत चढ़ाने की सीमा तय कर दी है।शिवलिंग का आकार छोटा (कà¥à¤·à¤°à¤£) होने से बचाने के लिठमंदिर समिति के 8 सà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ ने मंजूरी दी थी। कोरà¥à¤Ÿ ने जियोलॉजिकल सरà¥à¤µà¥‡ ऑफ इंडिया और याचिकाकरà¥à¤¤à¤¾ 15 दिन के अंदर इस पर अपने सà¥à¤à¤¾à¤µ या आपतà¥à¤¤à¤¿ दरà¥à¤œ करवाने का आदेश दिया हैं। अगली सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ 30 नवंबर को होनी है। आपको बता दें कि महाकाल की पूजा के लिठसà¥à¤¬à¤¹ पंचामृत से अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• होता है। फिर जलाà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• और à¤à¤¸à¥à¤® आरती। रात तक 4 बार अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• होता है। शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ दिनà¤à¤° में कई बार पंचामृत चढ़ाते हैं। à¤à¤¾à¤‚ग से शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार होता है।