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पंडित उल्लास कशालकर को तानसेन सम्मान

ग्वालियर. à¤¤à¤¾à¤¨à¤¸à¥‡à¤¨ संगीत समारोह की शुरुआत शुक्रवार की सुबह उनकी समाधि पर हरिकथा, मीलाद व शहनाई वादन के साथ हुई। ढोली बुआ महाराज की हरिकथा के बाद तानसेन और मोहम्मद गौस की समाधि पर चादरपेशी की। शाम को संगीत समारोह में पुणे के गायक पं. उल्हास कशालकर को तानसेन अलंकरण से सम्मानित किया गया।पंडित कशालकर को यह सम्मान प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया और नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने दिया।इस सम्मान में दो लाख रुपए की धनराशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।मध्यप्रदेश शासन द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में संगीत सम्राट तानसेन के नाम से स्थापित यह सर्वोच्च राष्ट्रीय संगीत सम्मान है। à¤‡à¤¸à¥€ आयोजन में संगीत सम्राट को भी शिक्षा देने वाले संगीतकार योद्धा राजा मान सिंह तोमर के नाम से शुरू हुए राष्ट्रीय सम्मान भी दिया गया। à¤ªà¤¹à¤²à¤¾ सम्मान 2011-12 के लिए ओडिसी के गुरू केलुचरण महापात्र को, 2012-13 के लिए त्रिवेणी कला संगम, 2013-14 के लिए रंग श्री लिटिल बैले ट्रुप, 2014-15 के लिए बॉम्बे आर्ट सोसाइटी, 2015-16 के लिए श्री इदगुंजी महागणपति यक्षगान मंडली कर्नाटक और 2016-17 के लिए नांदीकर कोलकाता को दिया गया। à¤ªà¤¾à¤‚च दिनी समारोह में कुल 9 संगीत सभाएं होंगी। इनमें से पहली 7 सभाएं तानसेन समाधि पर मुख्य मंच पर ,8वीं सभा तानसेन की जन्मस्थली बेहट में तथा अंतिम सभा गुजरी महल परिसर में सजेगी।

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