पंडित उलà¥à¤²à¤¾à¤¸ कशालकर को तानसेन समà¥à¤®à¤¾à¤¨
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤°. तानसेन संगीत समारोह की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° की सà¥à¤¬à¤¹ उनकी समाधि पर हरिकथा, मीलाद व शहनाई वादन के साथ हà¥à¤ˆà¥¤ ढोली बà¥à¤† महाराज की हरिकथा के बाद तानसेन और मोहमà¥à¤®à¤¦ गौस की समाधि पर चादरपेशी की। शाम को संगीत समारोह में पà¥à¤£à¥‡ के गायक पं. उलà¥à¤¹à¤¾à¤¸ कशालकर को तानसेन अलंकरण से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया।पंडित कशालकर को यह समà¥à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ जयà¤à¤¾à¤¨ सिंह पवैया और नगरीय विकास मंतà¥à¤°à¥€ माया सिंह ने दिया।इस समà¥à¤®à¤¾à¤¨ में दो लाख रà¥à¤ªà¤ की धनराशि और पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤à¤¿ पतà¥à¤° दिया जाता है।मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ शासन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में संगीत समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ तानसेन के नाम से सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ यह सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत समà¥à¤®à¤¾à¤¨ है। इसी आयोजन में संगीत समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ को à¤à¥€ शिकà¥à¤·à¤¾ देने वाले संगीतकार योदà¥à¤§à¤¾ राजा मान सिंह तोमर के नाम से शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ à¤à¥€ दिया गया। पहला समà¥à¤®à¤¾à¤¨ 2011-12 के लिठओडिसी के गà¥à¤°à¥‚ केलà¥à¤šà¤°à¤£ महापातà¥à¤° को, 2012-13 के लिठतà¥à¤°à¤¿à¤µà¥‡à¤£à¥€ कला संगम, 2013-14 के लिठरंग शà¥à¤°à¥€ लिटिल बैले टà¥à¤°à¥à¤ª, 2014-15 के लिठबॉमà¥à¤¬à¥‡ आरà¥à¤Ÿ सोसाइटी, 2015-16 के लिठशà¥à¤°à¥€ इदगà¥à¤‚जी महागणपति यकà¥à¤·à¤—ान मंडली करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• और 2016-17 के लिठनांदीकर कोलकाता को दिया गया। पांच दिनी समारोह में कà¥à¤² 9 संगीत सà¤à¤¾à¤à¤‚ होंगी। इनमें से पहली 7 सà¤à¤¾à¤à¤‚ तानसेन समाधि पर मà¥à¤–à¥à¤¯ मंच पर ,8वीं सà¤à¤¾ तानसेन की जनà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤²à¥€ बेहट में तथा अंतिम सà¤à¤¾ गà¥à¤œà¤°à¥€ महल परिसर में सजेगी।