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10 अप्रैल को रहेगा बंद, पुलिस करे सहयोग

ग्वालियर। 2 अप्रैल को एसटीएससी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव के खिलाफ किए
गए बंद के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के विरोध में 10 अप्रैल को बंद को लेकर सोशल
मीडिया पर लगातार संदेेश आ रहे थे, लेकिन लोगों में निरन्तर यह भ्रम बना हुआ था कि
क्या वाकई में 10 अप्रेल को बंद होगा अथवा ये भ्रामक संदेश है, लेकिन रविवार को सर्वसमाज
ने मीडिया के सामने आकर बंद का ऐलान कर दिया, साथ ही पुलिस से अपील की है कि वह
शांतिपूर्ण बंद को सफल कराने मेें सहयोग करे और जो हिंसा फैलाने की कोशिश
करे, उसके विरोध सख्त कार्रवाई करें। सर्वसमाज के महेश मुदगल, केडी सोनकिया, किशन
मुदगल, रामबाबू कटारे, हरिदास अग्रवाल, सुरेंद्र तोमर ने पत्रकारों को बताया कि
रविवार को सुबह एसपी ऑफिस कार्यालय में प्रशासन ने धर्मगुरूओं की बैठक बुलाई।
एडीएम शिवराज वर्मा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर सर्वसमाज की बैठक हुई,
जिसमें सर्वसमाज के प्रबुद्धजनों ने से शंाति बहाली के लिए राय ली गई तो उन्होंने कहा कि 31
मार्च को विभिन्न समाजों की ओर से ज्ञापन देकर प्रशासन को अवगत कराया गया था कि
शहर की शांति व्यवस्था भंग नहीं हो, लेकिन पुलिस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया और
घटना के बाद यह स्वीकार भी कर लिया कि प्रशासन से चूक हुई। 2 अप्रेल को बंद के
दौरान हिंसा आगजनी, तोडफ़ोड़ का तांडव फैलाया गया, जिससे शहर की शांति भंग हुई।
सर्वसमाज के लोगों ने एक सुर मेंं कहा कि संविधान में अन्याय के खिलाफ आवाज उठने के लिए
विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, जिसमें बंद भी किया जा सकता है। पत्रकारवार्ता में
अचलेश्वर न्यास के न्यासी नरेंद्र सिंघल, सचिव सोनू वाजपेयी, रामकुमार सिकरवार,
गोकुल वंसल, श्याम सिंह तोमर, संजय अग्रवाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
यह लगाए आरोप
 2 अप्रैल को बंद के दौरान महिलाओं से सरेआम छेड़छाड़ एवं स्कूली बच्चों की बसों पर हमला
किया गया।
 à¤¹à¤¨à¥à¤®à¤¾à¤¨ जी की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ एवं पुजारी से मारपीट कर हिंदुओं की भावनाओं
को आहत करने वालों की गिरफ्तारी की मांग की गई।
 à¤œà¤¿à¤¨ लोगों ने बंद के दौरान पुलिस की सहायता की, उन्हीं के विरुद्ध कायमी दर्ज की गई, उनकी
शीघ्र रिहाई की मांग की गई।

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