परशà¥à¤°à¤¾à¤® जनà¥à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ 2018: à¤à¤¸à¥€ हैं शौरà¥à¤¯ से à¤à¤°à¥€ कहानियां
à¤à¤—वान परशà¥à¤°à¤¾à¤® का जनà¥à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ देशà¤à¤° में धूमधाम से मनाया जाता है। à¤à¤—वान परशà¥à¤°à¤¾à¤® ऋषि ऋचीक के पौतà¥à¤° और जमदगà¥à¤¨à¤¿ के पà¥à¤¤à¥à¤° हैं। इनकी माता का नाम रेणà¥à¤•ा था। वह à¤à¤—वान शंकर के परम à¤à¤•à¥à¤¤ हैं और à¤à¤—वान शंकर ने ही उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अमोघ असà¥à¤¤à¥à¤°− परशॠपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया था। हाथ में परशॠधारण करने के कारण वह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में परशà¥à¤°à¤¾à¤® के नाम से जाने गà¤à¥¤
à¤à¤—वान परशà¥à¤°à¤¾à¤® का जनà¥à¤® वैशाख मास की शà¥à¤•à¥à¤² तृतीया को हà¥à¤† था। इस दिन अकà¥à¤·à¤¯ तृतीया मनाई जाती है। अकà¥à¤·à¤¯ तृतीया के दिन जनà¥à¤® लेने के कारण परशà¥à¤°à¤¾à¤® की शकà¥à¤¤à¤¿ की कà¥à¤·à¤¯ नहीं होती हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ राम के काल में à¤à¥€ देखा गया और कृषà¥à¤£ के काल में à¤à¥€à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ को सà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ चकà¥à¤° उपलबà¥à¤§ कराया था। कहते हैं कि वे कलिकाल के अंत में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होंगे। à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि वे कलà¥à¤ª के अंत तक धरती पर ही तपसà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¤ रहेंगे।
आठचिरंजीवियों में परशà¥à¤°à¤¾à¤® à¤à¥€
परशà¥à¤°à¤¾à¤® à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ के छठे अवतार हैं। महरà¥à¤·à¤¿ वेदवà¥à¤¯à¤¾à¤¸, अशà¥à¤µà¤¤à¥à¤¥à¤¾à¤®à¤¾, राजा बलि, शà¥à¤°à¥€ हनà¥à¤®à¤¾à¤¨, विà¤à¥€à¤·à¤£, कृपाचारà¥à¤¯, ऋषि मारà¥à¤•ंडेय सहित उन महापà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में शामिल हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कलयà¥à¤— तक अमर माना जाता है।
à¤à¤—वान परशà¥à¤°à¤¾à¤® किसी समाज विशेष के आदरà¥à¤¶ नहीं है। वे संपूरà¥à¤£ हिनà¥à¤¦à¥‚ समाज के हैं और वे चिरंजीवी हैं। पौराणिक कथा में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ है कि महेंदà¥à¤°à¤—िरि परà¥à¤µà¤¤ à¤à¤—वान परशà¥à¤°à¤¾à¤® की तप की जगह थी। वह उसी परà¥à¤µà¤¤ पर कलà¥à¤ªà¤¾à¤‚त तक के लिठतपसà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¤ होने के लिठचले गठथे।
21 बार कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ विहीन की धरती
ये अपने पिता के अननà¥à¤¯ à¤à¤•à¥à¤¤ थे, पिता की आजà¥à¤žà¤¾ से इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी माता का सिर काट डाला था, लेकिन पà¥à¤¨à¤ƒ पिता के आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ से माता की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ यथावत हो गई। परशà¥à¤°à¤¾à¤® ने अपने पिता की मौत और माता के अपमान का बदला लेने के लिठइस धरती से हैहय वंश के कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का 21 बार सरà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¶ किया था। परशà¥à¤°à¤¾à¤® बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ के कà¥à¤² में पैदा हà¥à¤ लेकिन करà¥à¤® कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯ था। उनके कà¥à¤°à¥‹à¤¥ से मनà¥à¤·à¥à¤¯, देवता और राकà¥à¤·à¤¸ सà¤à¥€ घबराते थे।
गणेशजी को किया à¤à¤•दंत
सतयà¥à¤— में जब à¤à¤• बार गणेशजी ने परशà¥à¤°à¤¾à¤® को शिव दरà¥à¤¶à¤¨ से रोक लिया तो, रà¥à¤·à¥à¤Ÿ परशà¥à¤°à¤¾à¤® ने उन पर परशॠपà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° कर दिया, जिससे गणेश का à¤à¤• दांत नषà¥à¤Ÿ हो गया और वे à¤à¤•दंत कहलाà¤à¥¤ तà¥à¤°à¥‡à¤¤à¤¾à¤¯à¥à¤— में जनक, दशरथ आदि राजाओं का उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने समà¥à¤šà¤¿à¤¤ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ किया। सीता सà¥à¤µà¤¯à¤‚वर में शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® का अà¤à¤¿à¤¨à¤‚दन किया।
करà¥à¤£ को शà¥à¤°à¤¾à¤ª
दà¥à¤µà¤¾à¤ªà¤° में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कौरव-सà¤à¤¾ में कृषà¥à¤£ का समरà¥à¤¥à¤¨ किया और इससे पहले उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ को सà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ चकà¥à¤° उपलबà¥à¤§ करवाया था। दà¥à¤µà¤¾à¤ªà¤° में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ही असतà¥à¤¯ वाचन करने के दंड सà¥à¤µà¤°à¥‚प करà¥à¤£ को सारी विदà¥à¤¯à¤¾ विसà¥à¤®à¥ƒà¤¤ हो जाने का शà¥à¤°à¤¾à¤ª दिया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥€à¤·à¥à¤®, दà¥à¤°à¥‹à¤£ व करà¥à¤£ को शसà¥à¤¤à¥à¤° विदà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की थी। इस तरह परशà¥à¤°à¤¾à¤® के अनेक किसà¥à¤¸à¥‡ हैं।