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ग्वालियर का किला समेत कई इमारतें जाएँगी ठेके पर

भोपाल। à¤¦à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ के लाल किले को पांच साल के लिए डालमिया ग्रुप को ठेके पर देने के बाद केंद्र सरकार अब मप्र सहित देशभर की कई ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को भी निजी हाथों में दे रही है। इसमें मप्र में स्थित विश्व धरोहर भीमबैठका, ग्वालियर का किला समेत 7 ऐतिहासिक महत्व की इमारतें शामिल हैं।ग्वालियर का किला - इस किले का निर्माण सन् 727 ईस्वी में सूर्यसेन नामक एक स्थानीय सरदार ने किया। लाल बलुए के पत्थर से निर्मित यह किला देश के सबसे बड़े किले में से एक माना जाता है।

ये दिए जाएंगे ठेके पर

 

भीमबैठका - आदि मानव द्वारा बनाए गए शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। यूनेस्को ने वर्ल्ड हैरिटेज साइट घोषित किया है। कई कलाकृतियां 30 हजार साल पुरानी हैं।

मांडू के शाही किले - छठवीं शताब्दी में स्थापित। रानी रूपमती और बाज बहादुर के प्रेम के साक्षी मांंडू शहर के कई किले निजी हाथों में जाएंगे। जहाज महल, हिंडोला महल, नीलकंठ महल इसमें शामिल है।

दतिया महल - इसका निर्माण राजा बीर सिंह देव ने मुगल शासक जहांगीर के स्वागत के लिए करवाया था। इसमें 440 कमरे हैं। इसे बनवाने में करीब 9 साल लगे। भारत-इस्लामिक वास्तुकला का उदाहरण।

रानी रूपमती पवैलियन - à¤®à¤¾à¤‚डू में स्थित रानी रूपमति पवैलियन सेना के अवलोकन के लिए बनाया गया था। कहा जाता है कि यहां से रानी रूपमती नर्मदा नदी के दर्शन करती थीं।

होशंगशाह का मकबरा - à¤®à¤¾à¤‚डू में स्थित होशंगशाह का मकबरा संगमरमर से बना भारत का पहला मकबरा माना जाता है। होशंगशाह का मालवा क्षेत्र का पहला मुस्लिम शासक था।

शाही किला - बुरहानपुर स्थित शाहजहां और मुमताज के प्रेम कहानी का गवाह है शाही किला। शाहजहां यहां पांच साल रहे। मुमताज की मौत यहीं हुई थी। फारूखी काल का किला है।

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