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100 के नोट की ब्लैक मार्केटिंग, 13500 में मिल रही दस हजार की गड्डी!

बेशक कोशिश काले धन को बाहर लाने और जाली करेंसी रोकने की है, लेकिन फिलहाल तो इसका असर उल्टा ही नजर आ रहा है। बाजार में पुराने 500 रुपये की कीमत गिर गई है। अगर आपको सौ-सौ के नोट में 10 हजार रुपये लेने हैं तो 13500 रुपये देने पड़ रहे हैं। करीब 35 फीसदी कमीशन लग रहा है।

जब से सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए हैं, बाजार में 100, 50 और 10 रुपये के नोट की मांग बढ़ गई है। खासकर जिनके घर में शादी है उनके लिए मुसीबत बढ़ी है।  à¤µà¥‡ मजबूरी में भारी कमीशन पर बड़े नोट को छोटे में बदल रहे हैं।

बैंक और एटीएम में तो यह नोट नहीं बचे हैं। इसलिए कटे-फटे नोट बदलने और नए नोट की गड्डी बेचने का काम करने वालों की चांदी हो रही है। अभी तक शादी-ब्याह के मौके पर ही नए नोट की गड्डी बिकती थी। अब छोटे पुराने नोटों की मांग में भी अचानक तेजी आ गई है। कानपुर के चकेरी, आगरा के रावतपाड़ा, अलीगढ़ के फूल चौराह और लखनऊ के मुंशी पुलिया पर इस काम को करने वाले कारोबारी बहुत हैं।

सूत्रों की मानें तो बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से यह लोग नए नोट की गड्डी निकलवा लेते हैं। अब जब बाजार में 100, 50 और 10 रुपये के नोट को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है तो यह लोग जमकर उसका फायदा उठा रहे हैं। नोट बदलने के कारोबार से जुड़े एक व्यापारी की मानें तो अभी तक दस हजार वाली 100 रुपये के नए नोट वाली गड्डी ज्यादा से ज्यादा सौ-दो सौ रुपये अतिरिक्त देकर मिल जाती थी। लेकिन अब तीन से साढ़े तीन हजार रुपये मुनाफा तक कमाकर नए नोट की गड्डी बेची जा रही है। जिन्हें शादी-ब्याह के अलावा बाजार में खर्च करने को चाहिए वो तो पुराने नोटों वाली गड्डी ही ले जा रहे हैं। दस रुपये और 100 रुपये के नोट वाली गड्डी की कोई कमी नहीं है।

गिरवर जौहरी ने बताया कि रविवार को घर मे कुंआ पूजन है। 100 रुपये के नए नोट वाली गड्डी चाहिए थी। लेकिन जब बाजार गए तो मालूम पड़ा कि दस हजार रुपये पर तीन से साढ़े तीन हजार रुपये अतिरिक्‍त देने पड़ रहे हैं। पूजन है तो करना तो पड़ेगा ही। इसलिए मजबूरी में लेकर आनी पड़ी।

शकील ने बताया कि बुधवार की शाम को जेब में 500 का नोट था, लेकिन खाना खाने के लिए खुले पैसे नहीं थे तो मजबूरी में परचून की दुकान करने वाले एक सूदखोर से 500 रुपये के साढ़े तीन सौ रुपये लेने पड़े और तब जाकर खाना खाया।

प्रो निगहत अहमद, एएमयू अलीगढ़ से बताती हैं कि पहली बात तो यह कि इससे आम लोग परेशान हो रहे हैं। और रहा दूसरा सवाल कि जिस कालाबाजारी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया उसी योजना ने एक और कालाबाजारी को जन्‍म दे दिया है।

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