मोदी को है देश की इन बड़ी खासियतों की फिकà¥à¤°, अब लगे हैं बचाने में..!
कई जातियां, बोलियां, à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤‚, अनेक धरà¥à¤®-संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯, खान-पान, लाखों वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, सैकड़ों जीव जंतॠऔर कई तरह की पेड़-पौधों की पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की à¤à¥Œà¤—ालिक संपदा की खासियत है और यही इसे विशà¥à¤µ का अनूठा देश बनाती है। इस अनेकता और विविधता में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनसंखà¥à¤¯à¤¾ में बहà¥à¤²à¤¤à¤¾ की à¤à¤•ता इसे और à¤à¥€ खूबसूरत बनाती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ की यह अनूठी विरासत जहां सांसà¥à¤•ृतिक रूप से दिखाई देती है, वहीं à¤à¥Œà¤—ोलिक रूप से इसकी यह विविधता पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ में डालती है।
जैव विविधता को लेकर à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ पूरे विशà¥à¤µ का सबसे आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯à¤œà¤¨à¤• देश है। समूचे विशà¥à¤µ में 2 लाख 40 हजार किसà¥à¤® के पौधे और 10 लाख 50 हजार पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ हैं, जिसमें से सà¤à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¤ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सात से आठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ हिसà¥à¤¸à¤¾ हमारे ही देश में मौजूद है, इसमें à¤à¥€ पौधों की 45,000 पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और जीवों की 91,000 पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ मौजूद हैं।
कà¥à¤² मिलाकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ विशà¥à¤µ में सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• जैव विविधता वाले देशों में से à¤à¤• है और दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के à¤à¥‚-रकबे का यहां मातà¥à¤° 2.4 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¾à¤— है। चिंता की बात यह है कि पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आज जीव-जंतà¥à¤“ं और पौधों की लगà¤à¤— 50 पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ रोजाना विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो रही हैं, इसलिठजैव विविधता का संरकà¥à¤·à¤£ के सवाल उठरहे हैं।
जानकर आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ होगा कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में विशिषà¥à¤Ÿ पौधों और जीवों की विविधता होने के कारण यह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। विशà¥à¤µ के 34 वैशà¥à¤µà¤¿à¤• जैव विविधता हॉटसà¥à¤ªà¥‰à¤Ÿ में से चार à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है- हिमालय, पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ घाट, उतà¥à¤¤à¤°-पूरà¥à¤µà¥€ और निकोबार दà¥à¤µà¥€à¤ª समूह। इसके अलावा à¤à¤¾à¤°à¤¤, फसलीय पौधों की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ का विशà¥à¤µ के आठकेंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– केंदà¥à¤° है। पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी ने देश की इसी अनूठी जैव विविधता को बचाने के लिठचिंता जताई है।
हाल ही में नई दिलà¥à¤²à¥€ में आयोजित पहले अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कृषि जैवविविधता समà¥à¤®à¤²à¥‡à¤¨ में पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी à¤à¥€ शामिल हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जैव विविधता पर आ रहे संकट को लेकर चिंता जाहिर की। इस समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ को इंडियन सोसायटी ऑफ पà¥à¤²à¤¾à¤‚ट जेनेटिक रिसोरà¥à¤¸à¥‡à¤œ à¤à¤‚ड बायोडायवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ इंटरनेशनल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आयोजित किया गया।
बता दें कि सीजीआईà¤à¤†à¤° (कंसलà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग गà¥à¤°à¥à¤ª फ़ॉर इंटरनेशनल à¤à¤—à¥à¤°à¥€à¤•लà¥à¤šà¤° रीसरà¥à¤š) का शोध केंदà¥à¤° है, जिसका मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ इटली के रोम में है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के लिठयह à¤à¤• गौरवशाली और à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• उपलबà¥à¤§à¤¿ रही कि पहले अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कृषि जैव विविधता समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ का चयन किया गया।
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में मोदी ने कहा कि कृषि जैव विविधता के मामले में à¤à¤¾à¤°à¤¤ बहà¥à¤¤ ही समृदà¥à¤§ देश है और समय आ गया है कि इसका संरकà¥à¤·à¤£ किया जाà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि à¤à¤—à¥à¤°à¥€à¤•लà¥à¤šà¤° में कलà¥à¤šà¤° का अहम योगदान होता है। कृषि के सततॠविकास के लिठसंसà¥à¤•ृति और परंपरा का योगदान जरूरी है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को मिलकर विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो रही पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बचाना होगा।
पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने कहा कि हर à¤à¤• देश दूसरे देश से कà¥à¤› न कà¥à¤› सीखता रहता है, और ये सिलसिला लगातार गति से जारी रहना चाहिà¤à¥¤ आज हमें उन तरीकों को खोजने की जरूरत है, जिससे लोगों की आवशà¥à¤¯à¤•ता परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाठबिना हो सके। पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों से जैव विविधता को बचाने और तकनीक की मदद से गरीबी हटाने की अपील की। इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में शोध को बढ़ावा दिठजाने की जरूरत है।
इस समà¥à¤®à¤²à¥‡à¤¨ में 60 देशों से लगà¤à¤— 900 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने à¤à¤¾à¤— लिया। समà¥à¤®à¤²à¥‡à¤¨ का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ कृषि जैव विविधता पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन और आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक संसाधनों के संरकà¥à¤·à¤£ में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की à¤à¥‚मिका के बारे में बेहतर समठविकसित करना था।
आपको बता दें कि जीव-जंतà¥à¤“ं और पौधों की लगà¤à¤— 50 पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ रोजाना विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो रही हैं, इसलिठआज जैव विविधता का संरकà¥à¤·à¤£ किया जाना जरूरी है। आज तकनीक हम पर किस पà¥à¤°à¤•ार असर डाल रही है, इस पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना जरूरी है। कृषि में तकनीक के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से कà¥à¤¯à¤¾ बदलाव आ रहा है इसका ऑडिट होना चाहिà¤à¥¤
दरअसल, मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने पà¥à¤°à¤•ृति में दखल देकर ही जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा की है। उसकी इसी गलती से तापमान बॠरहा है, जो जैव विविधिता को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा रहा है। जैव विविधता की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ का अरà¥à¤¥ है कि उसके लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ वातावरण तैयार करना। हमारे पूरà¥à¤µà¤œ सामाजिक और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन में माहिर थे। उनके संसà¥à¤•ार जनित पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से ही हम जैव विविधता बचा पाठहैं और पà¥à¤°à¤•ृति के साथ संतà¥à¤²à¤¨ बनाते हà¥à¤ सबकी जरूरत पूरा करते रहे।
à¤à¤• सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ यह है कि जल, जंगल, जमीन के संरकà¥à¤·à¤£ के जितने à¤à¥€ अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ और कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® होते हैं, उनमें विकासशील और विकसित देशों के बीच आरà¥à¤¥à¤¿à¤• मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर विवाद होता है। विकसित देश अधिक जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ उठाना नहीं चाहते और वो चाहते हैं कि विकासशील देश ही जैव विविधिता दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में गरà¥à¤® होती जलवायà¥, कम होते जंगल, विलà¥à¤ªà¥à¤¤ होते पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€, पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित होती नदियों, सà¤à¥€ को बचाने का काम करें। यहां तक कि इन कामों के लिठवे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• मदद देने के लिठà¤à¥€ तैयार नहीं है। जैव विविधता के लिठआधà¥à¤¨à¤¿à¤• विकास और पà¥à¤°à¤•ृति संरकà¥à¤·à¤£ दोनों के बीच संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ तालमेल बैठाना बहà¥à¤¤ जरूरी है, नहीं तो इसका खामियाजा पà¥à¤°à¤•ृति को à¤à¥à¤—तना पड़ेगा। जैवविविधता पर संकट इसका ही नतीजा है।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजनरà¥à¤µà¥‡à¤¶à¤¨ ऑफ नेचर (आईयूसीà¤à¤¨) à¤à¤• की रिपोरà¥à¤Ÿ में कहा गया है कि विशà¥à¤µ में जीव-जंतà¥à¤“ं की 47677 विशेष पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• तिहाई से अधिक पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ यानी 15890 पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर विलà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का खतरा मंडरा रहा है। आईयूसीà¤à¤¨ की रेड लिसà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤¤à¤¨à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की 21 फीसदी, उà¤à¤¯à¤šà¤°à¥‹à¤‚ की 30 फीसदी और पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की 12 फीसदी पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾ विलà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की कगार पर हैं। वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की 70 फीसदी पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ ताजा पानी में रहने वाले सरिसृपों की 37 फीसदी पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और 1147 पà¥à¤°à¤•ार की मछलियों पर à¤à¥€ विलà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का खतरा मंडरा रहा है। ये सब इंसान के लालच और जगलों के कटाव के कारण हà¥à¤† है। पिछली कà¥à¤› शताबà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में जैव विविधता का सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नà¥à¤•सान हà¥à¤† है।
देखा जाठतो पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी की जैव विविधता के सरंकà¥à¤·à¤£ को लेकर चिंता बहà¥à¤¤ ही जायज है। दरअसल, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जैव विविधता है। à¤à¤¸à¥‡ में इनके संरकà¥à¤·à¤£ की दिशा में काम करना जरूरी है। देश की आधी आबादी को कृषि से रोजगार मिल रहा है। यह हमारी सोच में होना चाहिठकि जीव जंतà¥à¤“ं का महतà¥à¤µ हमसे कम नहीं है।
संयà¥à¤•à¥à¤¤ राषà¥à¤Ÿà¥à¤° ने à¤à¥€ कहा है कि सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ और संसà¥à¤•ृति का बड़ा महतà¥à¤µ है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को मिलकर यह पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिठकि कौन सा पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ बेहतर है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ और जगह à¤à¥€ अपनाया जा सकता है। विशà¥à¤µ की बढ़ती आबादी की खादà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ पोषण सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ में कृषि जैव विविधता के संरकà¥à¤·à¤£ से टिकाऊपन बनाठरखने के लिठअब ठोस पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ जरूरी है।
इसके अलावा जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ के खतरे से निपटने के साथ ही साल 2050 तक वैशà¥à¤µà¤¿à¤• आबादी 9.7 अरब होने का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ है, जिसके लिठखादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की अतिरिकà¥à¤¤ मांग को पूरा करने के लिठटिकाऊ कृषि उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के बारे में अà¤à¥€ से सोचना होगा। कृषि में जीन बैंकों के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ और कà¥à¤¶à¤², आनà¥à¤µà¤‚शिक संसाधनों के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à