कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं बदल पा रही अपने पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ 'नोट'?
राहà¥à¤² गांधी अपने चार हज़ार के नोट बदलवाने à¤à¤Ÿà¥€à¤à¤® पहà¥à¤‚च गà¤à¥¤ करीब घंटेà¤à¤° तक लाइन में खड़े रहे। सेलà¥à¤«à¥€ राजनीति की और नोट बदलवाकर लौट आà¤à¥¤ इसके बाद समाचार चैनलों की पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤® टाइम में चिपकने का उनका मकसद à¤à¤• और दिन के लिठपूरा हो गया। पीके खà¥à¤¶ हà¥à¤† और बाबा पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¥¤ पांच सौ और हज़ार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के नोटों को बंद करने के फैसले पर सवाल खड़े करने में राहà¥à¤² गांधी सफ़ल हà¥à¤, मगर अफसोस कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ पड़ चà¥à¤•े और चलन से बाहर होते नोटों को वो बदलवा नहीं पाà¤à¥¤
इस पूरे मामले पर अपनी बात आगे बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ से पहले इस लेख के शीरà¥à¤·à¤• की असली à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को साफ कर देना ज़रूरी है। दरअसल, यहां कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ नोट से सीधा मतलब उसकी छवि से है। देश में उसकी इमेज à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° को पालने वाली पारà¥à¤Ÿà¥€ की बनी हà¥à¤ˆ है। यकीं नहीं आठतो à¤à¤• सरà¥à¤µà¥‡ करा लीजिà¤, अब à¤à¤²à¥‡ ही कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€ ये पढ़कर बिदक जाà¤à¤‚, मगर वो à¤à¥€ जानते हैं कि इस देश में नेताओं की जो à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥€ छवि बनी है, उसके पीछे कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के बीते 49 साल के शासन का अपना ही हाथ है।
राजनीतिक पंडित कितना ही गणित लगा लें, लेकिन जानने वाले जानते हैं कि राजनीति चमकाने के लिठकी गई राहà¥à¤² गांधी की इस à¤à¤Ÿà¥€à¤à¤® यातà¥à¤°à¤¾ ने कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ की à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥€ छवि को और चमका दिया है। नोट बदल लिà¤, लेकिन इमेज बदलने की अकà¥à¤² इस पारà¥à¤Ÿà¥€ को आज तक नहीं आई।
आइठजरा अतीत में चलते हैं। नेहरू और इंदिरा के बाद राजीव गांधी के दौर से ही कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¥€ की छवि à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° करने वाली पारà¥à¤Ÿà¥€ की बनने लगी थी। कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के बाग़ी वीपी सिंह का इसमें बड़ा योगदान रहा। बोफोरà¥à¤¸ तोपों की डील में राजीव गांधी और सोनिया के मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ ने कोई दलाली खाई इस बात के पकà¥à¤•े पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ कà¤à¥€ नहीं मिले, बावजूद इसके कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¥€ की छवि à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° करने वाली पारà¥à¤Ÿà¥€ की कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ बनीं रही? शायद पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤‚त किशोर ने à¤à¥€ कà¤à¥€ इस बारे नहीं सोचा, सोचते तो इस छवि को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ या यूं कहें कि कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ पड़ चà¥à¤•े नोट को बदलवाने की कोशिश करते, ना कि राहà¥à¤² गांधी को à¤à¤Ÿà¥€à¤à¤® à¤à¥‡à¤œà¤•र चार हज़ार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ बदलवाते।
कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ की à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° वाली छवि बदल सकती थी। बोफोरà¥à¤¸ पर लोग यकीन नहीं करते, अगर कॉमनवेलà¥à¤¥, टूजी, थà¥à¤°à¥€ जी और दामाद जी जैसे पà¥à¤°à¤•रणों में कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ नहीं फंसती। अब à¤à¥€ à¤à¤• मौका था कि पांच सौ और हज़ार के नोटों को बंद करने के मोदी सरकार के फैसले के साथ कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ मज़बूती से खड़ी होती,लेकिन कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पहले दिन से ही कंफà¥à¤¯à¥‚जन में है।
दरअसल, दूरदरà¥à¤¶à¤¿à¤¤à¤¾ इसी को कहते हैं। यूपी चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में 25-50 सीटें जीतने से कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ की करंसी नहीं चलने वाली (अगर जीते à¤à¥€ तो)। पीके à¤à¤‚ड पारà¥à¤Ÿà¥€ को समà¤à¤¨à¤¾ होगा कि अब बाज़ार में नई करंसी चल रही है। राहà¥à¤² अपने चार हज़ार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ बदलवाने की जगह कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¥€ की इस पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ और सड़ी गली करंसी को बदलवाà¤à¤‚, तो उनका और पारà¥à¤Ÿà¥€ दोनों का à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ बदलेगा। कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के खाटीं, दिगà¥à¤—ज और बेहद अनà¥à¤à¤µà¥€ नेताओं को समà¤à¤¨à¤¾ चाहिठकि पीके का कà¥à¤¯à¤¾ है, कंसलà¥à¤Ÿà¤‚ट कà¤à¥€ ज़िमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ नहीं लेते, उनका काम तो बस जà¥à¤žà¤¾à¤¨ देना होता है।