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नहीं रहे अमेरिका से टकराने वाले क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो

क्रांति के प्रतीक माने जाने वाले फिदेल कास्त्रो का हवाना में निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। कास्त्रो के भाई और क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर इसकी घोषणा की। क्यूबा के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर घोषणा करते हुए कहा कि क्यूबा की क्रांति के दूत का इस शुक्रवार रात 10 बजकर 29 मिनट पर निधन हो गया।

फिडेल कास्त्रो काफी लंबे समय से बीमार थे और इसी के चलते राष्ट्रपति पद भी छोड़ा था। उन्हें à¤…मेरिका के खुले विरोध के लिए जाना जाता था। तमाम प्रतिबंधों के बावजूद उन्होंने अमेरिका का खुलकर विरोध किया था और ताउम्र उनके अमेरिका से तनावपूर्ण रिश्ते रहे। वह अमेरिका कंपनियों के विरोध में थे और क्यूबा में अभियान  à¤šà¤²à¤¾à¤ हुए थे।

कास्त्रो 1959 से 2008 तक सत्ता में रहे थे। वह  1959 से 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री और 1976 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे थे। वह कम्युनिस्ट पार्टी से थे और लेनिनवादी सोच के साथ अमेरिका के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए थे। खराब सेहत के चलते 2008 में उन्होंने अपने भाई को कमान दे दी थी।

कास्त्रो के निधन पर भारतीय नेताओं ने भी दुख जताया है। प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति ने उनके निधन पर दुख जताया। पीएम मोदी ने उन्हें भारत का दोस्त बताया। à¤ªà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚त्री ने ट्वीट किया, ‘फिदेल कास्त्रो के निधन पर मैं क्यूबा की सरकार और जनता के प्रति गहरी संवेदनाएं जाहिर करता हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले। फिदेल कास्त्रो 20वीं सदी की इतिहास रचने वाली हस्तियों में से एक थे। भारत अपने एक महान दोस्त के निधन पर शोकग्रस्त है।’ मोदी ने कहा कि भारत दुख की इस घड़ी में क्यूबा की सरकार और वहां की जनता के साथ है।

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