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राफेल डील रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कल आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला

राफेल डील (Rafale Deal) रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला कल आएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चार याचिकाएं दाखिल की गई थी जिसमें फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के साथ राफेल लड़ाकू जेट विमान सौदे की जांच की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने कहा था कि कीमत पर चर्चा तभी होगी जब हम फैसला करेंगे। इस मामले में अटॉनी जनरल केके वेणुगोपाल को तब तक जवाब नहीं देने को कहा जब तक अदालत इसकी जांच करने का फैसला नहीं करती है। अटॉनी जनरल ने राफेल सौदे की न्यायिक समीक्षा का भी विरोध किया था। उन्होंने कहा कि अगर हथियार और विमान की कीमतें सार्वजनिक की जाएंगी तो दुश्मनों को राफेल विमान में लगे हथियारों का पता चल जाएगा।

गोपनीयता पर भूषण का किया था विरोध
अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण का विरोध किया था, जो राफेल सौदे की गोपनीयता के बारे में सूचना पेश करना चाहते थे। भूषण ने जब गोपनीयता के प्रावधान का मुद्दा उठाया तो वेणुगोपाल ने कहा था, ''गोपनीय समझौता गोपनीय ही रखना होगा और अब वह न्यायालय में इसे पेश कर रहे हैं। भाजपा के दो नेताओं पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी की ओर से पेश हुये भूषण ने आरोप लगाया कि सरकार गोपनीयता के प्रावधान की आड़ लेकर राफेल विमानों की कीमतों का खुलासा नहीं कर रही है।

सरकार ने कोर्ट में रखा था ये पक्ष
सरकार ने कहा था कि राफेल 60 किलोमीटर की दूरी से सटीक मार करने में सक्षम है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था फ्रांस सरकार की ओर से हमारे पास लेटर ऑफ कंफर्ट है, सार्वभौम गारंटी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में एयरफोर्स की दलील
एयरफोर्स के अधिकारी ने कहा, हमें पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट चाहिए। अधिकारी ने सु्प्रीम कोर्ट को बताया, 1985 में मिराज के बाद से वायु सेना ने कोई एयरक्राफ़्ट बेड़े में नहीं जोड़ा गया।

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