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ऐसा भी होता है! जब नोटबंदी में रातों-रात मालामाल हो गए ये तीन लोग...

नई दिल्ली। कुछ हजार रुपयों के लिए कुछ लोग दिन-रात बैंकों और एटीएम की लाइन में लग रहे हैं। कई-कई दिन लाइन में लगने के बाद भी रुपये हाथ में नहीं आ रहे हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नोटबंदी के इस दौर में भी रातों-रात करोड़पति बन गए। रात को सोए तो थे खाते में कुछ हजार रुपये लेकर ही, लेकिन सुबह जब आंख खुली तो देखा कि करोड़पति बन गए हैं। लेकिन उनकी ये खुशी ज्यादा देर तक नहीं रही। क्योंकि बैंक की एक गलती की वजह से उनके खाते में करोड़ों रुपये की रकम पहुंच गई थी। आइए सुनते हैं उन्‍हीं की जुबानी जो रातों-रात करोड़पति बन गए।

पेशे से à¤‡à¤‚जीनियर आगरा के à¤¸à¤‚दीप तिवारी बताते हैं- à¤®à¥ˆà¤‚ तो एक फैक्‍ट्री में इंजीनियर हूं। आम दिनों की तरह ही उस दिन भी एटीएम गया था। एसबीआई के एटीएम से बैलेंस चेक करने लगा। लेकिन जैसे ही एटीएम से पर्ची निकली तो मेरे होश उड़ गए। एक बार तो मैं बैलेंस की रकम को पढ़ भी नहीं पाया। उसके बाद मैंने एक-एक नम्बर को इकाई, दहाई, सैकड़ा में गिनना शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे संख्या बढ़ रही थी उसी के साथ मेरी धड़कनें भी बढ़ने लगीं।

जैसे ही संख्या खत्म हुई तो 99 करोड़, 99 लाख, 91 हजार 723 रुपये का बैलेंस मेरे सामने था। खुशी जैसी तो कोई बात महसूस नहीं हुई लेकिन अचानक से बुरे-बुरे ख्याल मन में आने लगे। सबसे पहले ख्याल आया कि कहीं ये रकम हवाला की तो नहीं है। फिर सोचा कि अगर किसी आतंकवादी ग्रुप की हुई तो घर बैठे मुसीबत गले पड़ जाएगी। ऐसे ही कई बुरे ख्याल आते रहे।

मैंने सबसे पहले अपने पापा ओमकार प्रसाद तिवारी को ये सूचना दी। उनका कहना था कि तुरंत मीडिया में जाकर स्थिति साफ कर दो। जिससे कि कल को कोई परेशानी न खड़ी हो जाए। मैंने किया भी ऐसा ही। फिर दूसरे दिन बैंक से फोन आ गया। उन्होंने कहा कि आपने केवाईसी की जरूरी कार्रवाई पूरी नहीं की है, इसलिए आपके खाते में गलती से ये रकम आ गई है। उसके बाद एक दिन मेरा खाता बंद रहा और आई हुई करोड़ों रुपये की रकम वापस चली गई। गम तो किसी बात का था ही नहीं, लेकिन मीडिया में दिन-रात जो जगह मिली तो वो जिंदगीभर याद रहेगा।

टेंट मजदूर के खाते में आए पौने चार करोड़

एटा के  à¤…रविंद जो पेशे से  à¤®à¤œà¤¦à¥‚र हैं, वह बताते हैं- à¤®à¥ˆà¤‚ दिल्ली à¤®à¥‡à¤‚ एक टेंट हाउस में नौकरी करता हूं। नोटबंदी के चलते न काम था और न ही पैसे, इसलिए अपने गांव वापस आ गया। जैसे ही गांव आया तो दो दिन बाद डाक से बैंक का एक कार्ड आ गया। हमारा जनधन खाता  2015 में खुला था। हमने तो कभी एक रुपया भी जमा नहीं किया था, लेकिन फिर भी सोचा कि चलो कार्ड लगाकर देख लेते हैं कि कहीं सरकारी मदद के 100-50 रुपये आ गए हों। पड़ोस का ही एक लड़का था साथ में।

जैसे ही मशीन में कार्ड लगाया तो लड़का बोला कि चाचा तुम्हारे खाते में तो बहुत सारा à¤°à¥à¤ªà¤¯à¤¾ है। लेकिन कितना है ये गिनती वो भी नहीं कर सका। सच पूछो तो मेरा सिर ही चकराने लगा कि इतना सारा पैसा कि जिसे गिना भी नहीं जा सके, कहां से आ गया। दो-चार दूसरे पढ़े-लिखे लोगों के पास गया तो मालूम हुआ कि तीन करोड़ 72 लाख रुपये मेरे खाते में आ गए हैं। पहले सोचा कि सरकार ने दिए होंगे, लेकिन फिर दूसरे लोगों ने बताया कि नोटबंदी की गहमा-गहमी में गलती से आ गए हैं जाकर बैंक को बता दो। इसी बीच अखबारों और चैनल ने भी हमारी खबर दिखा दी। जो कार्ड आया था तो उसके बारे में पता चला कि हम एक दिन में कार्ड से 50 हजार रुपये निकाल सकते हैं और एक लाख रुपये का सामान बाजार से खरीद सकते हैं।

ड्राइवर के जनधन खाते में आए 9800 करोड़ रुपये

पंजाब में किसान बैंक ऑफ पटियाला की एक गलती से टैक्सी  ड्राइवर के जनधन खाते में 9800 करोड़ रुपये पहुंच गए। 24 घंटे तक बैंक को अपनी इस गलती की जानकारी नहीं हुई। खाते में इतनी बड़ी रकम आ जाने के बाद से ड्राइवर परेशान हो गया। उसने यहां-वहां चक्कर काटने शुरू कर दिए। लेकिन कोई भी उसे कुछ बताने को तैयार नहीं था। जैसे-तैसे ड्राइवर ने दिन और रात काटा। सुबह होते ही ड्राइवर को बैंक से फोन आ गया। उन्होंने ड्राइवर को बैंक बुलवा लिया। कुछ जरूरी बातें पूछने के बाद उसके खाते से यह रकम वापस ले ली गई। लेकिन तब तक मीडिया और इनकम टैक्स विभाग को इसकी जानकारी हो चुकी थी। इनकम टैक्स विभाग की टीम भी बैंक पहुंच गई। ड्राइवर के खाते की जांच की गई। बैंक के भी जरूरी दस्तावेज खंगाले गए।

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