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नवोदित कलाकारों को रागायन मंच पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कराती है: महंत रामसेवक दास
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤°à¥¤ गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° के महारानी लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€à¤¬à¤¾à¤ˆ समाधि के पीछे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ बडी गंगादास की शाला का अपना ही विशेष महतà¥à¤µ है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ की आजादी से जà¥à¤¡à¥€ इस गंगादास की शाला में à¤à¤¾à¤‚सी की रानी का अंतिम संसà¥à¤•ार किया गया था वहीं सैकडों की संखà¥à¤¯à¤¾ में साधू à¤à¥€ इस लडाई में शहीद हà¥à¤¯à¥‡ थे। अब बडी गंगादास की शाला शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत को बढावा देने के लिये रागायन संसà¥à¤¥à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से नवोदित कलाकारों यà¥à¤µà¤¾à¤“ं को बढावा देने मंच पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर रही है।
उकà¥à¤¤ जानकारी आज पतà¥à¤°à¤•ारों को देते हà¥à¤¯à¥‡ शà¥à¤°à¥€ गंगादास की बडी शाला लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€à¤¬à¤¾à¤ˆ कालोनी पडाव के महंत रामसेवक दास पूरन वैराठी पीठाधीशà¥à¤µà¤° ने बताया कि सिदà¥à¤§ पीठशà¥à¤°à¥€ गंगादास जी की बडी शाला à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• धारà¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤² है। इसका इतिहास ६०० साल से à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ है। बताया जाता है कि मà¥à¤—ल बादशाह अकबर à¤à¥€ गंगादास की शाला में आया था और ततà¥à¤•ालीन महंत सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ परमानंद जी महाराज के शà¥à¤°à¥€ चरणों में नतमसà¥à¤¤à¤• होकर आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ लेकर गया था। कालांतर में १८५ॠके सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® में यहां के ततà¥à¤•ालीन महंत गंगादास जी महाराज ने à¤à¤¾à¤‚सी की रानी लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€à¤¬à¤¾à¤ˆ की पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ देह की अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ से रकà¥à¤·à¤¾ करते हà¥à¤¯à¥‡ उनका यहां अंतिम संसà¥à¤•ार किया था। और à¥à¥ªà¥« साधू संतों ने अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ से लोहा लेते हà¥à¤¯à¥‡ देश की आजादी में अपने पà¥à¤°à¤¾à¤£ नà¥à¤¯à¥Œà¤›à¤¾à¤µà¤° किये थे।
वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में पूरन वैराठी पीठाधीशà¥à¤µà¤° सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ रामसेवक दास जी इस सिदà¥à¤§ पीठके महंत हैं। उनके नेतृतà¥à¤µ à¤à¤µà¤‚ मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ में शाला का सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से कारà¥à¤¯ चल रहा है। शाला दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤µà¤°à¥à¤· जून माह में १० से १८ जून तक शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦ à¤à¤¾à¤—वत कथा का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर विशाल à¤à¤‚डारा à¤à¥€ आयोजित किया जाता है। इसके अलावा शà¥à¤°à¥€ रामनवमी, पर à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€ राम के जनà¥à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ का आयोजन , कृषà¥à¤£ जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€, महाशिवरातà¥à¤°à¤¿ सहित अनà¥à¤¯ तीज तà¥à¤¯à¤œà¥à¤žà¥ˆà¤¹à¤¾à¤° परंपरा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मनाये जाते हैं। शà¥à¤°à¥€à¤µà¤£ मास में à¤à¤—वत पारायण के साथ ॠदिन का à¤à¥‚ला महोतà¥à¤¸à¤µ à¤à¥€ आयोजित होता है।
शाला दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गौशाला संचालित कर गौ सेवा à¤à¥€ की जा रही है। शाला परिसर में हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी का सà¥à¤µà¤¯à¤‚à¤à¥‚ विगà¥à¤°à¤¹ है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी के दरà¥à¤¶à¤¨ मातà¥à¤° से शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की मनोकामना पूरà¥à¤£ होती है। यहां à¤à¤µà¥à¤¯ रामदरबार à¤à¥€ है। शाला के तहत शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत को बढावा देने के लिये रागायन संसà¥à¤¥à¤¾ बनाई गई है। जो पिछले ३० वरà¥à¤·à¥‹ से सांगीतिक आयोजन करती आ रही है। यह संसà¥à¤¥à¤¾ शाला में ही रहे संगीताचारà¥à¤¯ पंडित सीतारामशरण महाराज ने बनाई थी। १९९० से निरंतर यह संसà¥à¤¥à¤¾ हर माह संगीत सà¤à¤¾ का आयोजन करती है। जिसमें नवोदित से लेकर वरिषà¥à¤ कलाकार पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ देते हैं। संसà¥à¤¥à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हर साल वारà¥à¤·à¤¿à¤• संगीत समारोह à¤à¥€ आयोजित किया जाता है। जिसमें देश के वरिषà¥à¤ संगीत साधक अपनी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ देने आते रहे हैं। शाला à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में à¤à¤• संसà¥à¤•ृत विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ à¤à¤µà¤‚ संगीत विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ à¤à¥€ शà¥à¤°à¥‚ करने पर विचार कर रही है। शाला की जमीनों पर अतिकà¥à¤°à¤®à¤£ करने के बारे में पूछे à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¥à¤° के उतà¥à¤¤à¤° में महंत रामसेवक दास महाराज ने बताया कि हां बडी गंगादास की शाला की जमीनों पर कà¥à¤› लोगों ने अतिकà¥à¤°à¤®à¤£ कर अपना कबà¥à¤œà¤¾ जमाया है हम जिला पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ को पूरी जानकारी देते हैं à¤à¤• दो बार पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ ने अतिकà¥à¤°à¤®à¤£ हटवाये à¤à¥€ हैं लेकिन अà¤à¥€ à¤à¥€ काफी जमीन पर अतिकà¥à¤°à¤®à¤£ हैं। तानसेन जैसे संगीत समारोह मेें कà¥à¤¯à¤¾ गंगादास की शाला का योगदान है के बारे में महंत रामसेवक दास महाराज ने बताया कि पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ तानसेन संगीत समारोह में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कोई जानकारी नहीं दी जाती है।