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निगम का बजट:1290 करोड़ का पेश किया बजट, फायदे का बजट दिखाकर इन्फ्रा स्ट्रक्चर और चंबल के पानी पर फोकस

आखिरकार निगम प्रशासक ने ग्वालियर नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 1290 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है। लगभग 98 लाख रुपए फायदे के बजट में दो मदों राजस्व मद और पूंजीगत मद का अलग-अलग उल्लेख किया गया है। बजट में सबसे ज्यादा फोकस पंचवर्षीय रोडमैप, सड़कों, चंबल का पानी व नाइट बाजारों सहित इन्फ्रा स्ट्रक्चर पर रखा गया है। पर यहां कांग्रेस ने बजट पर चुटकी ली है। कांग्रेस की ओर से पूर्व नेता प्रतिपक्ष कुष्णराव दीक्षित ने इसे भ्रमित करने और सपने दिखाने वाला बजट बताया है। कांग्रेस का सीधा सवाल है यदि फायदे का ही बजट है तो कोरोना काल में परेशान शहरवासियों को नए टैक्स क्यों थोपे जा रहे हैं।

बुधवार सुबह से लोगों को नगर निगम के साल 2021-22 के बजट का इंतजार था, लेकिन निगम प्रशासन आशीष सक्सैना ने बजट को रात को पेश किया और उसे अंतिम रूप दिया गया। मीडिया के पास भी देरी से बजट की काफी पहुंचाई गई जिससे ज्यादा बबाल न हो सके। पर साल 2021-22 के लिए पेश किए गए बजट को फायदे के बजट के रूप में पेश किया गया है। मतलब नगर निगम ग्वालियर ने व्यय से ज्यादा आय दिखाई है। इसके बाद भी जलकल दोगुना कर दिया गया है और नए कर के रूप में मलकर लिया जा रहा है। आइए आसान भाषा में इस बजट को समझते हैं।

1290 करोड़ का बजट

साल 2021-22 का कुल बजट पूंजीगत और राजस्व मद में 12 अरब 90 करोड़ 11 लाख 6 हजार रुपए का है। इसमें राजस्व मद की आय 611 करोड़ 72 लाख 86 हजार है और पूंजीगत मद की आय 678 करोड़ 38 लाख 20 हजार रुपए है। जबिक इसमें राजस्व मद में कुल व्यय 533 करोड़ 90 लाख 24 हजार रुपए है। साथ ही पूंजीगत व्यय 737 करोड़ 35 लाख 04 हजार रुपए शामिल है। इसमें स्वंय के सोर्स से आय का 5 प्रतिशत 17 करोड़ 87 लाख 64 हजार 200 रुपए संचित निधि में रखे जाएंगे। जिसके बाद साल के आखिर मे बजट पर शुद्ध ब्याज 98 लाख 13 हजार 800 रुपए निगम का फायदा होगा।

कांग्रेस ने बताया फेक बजट

कांग्रेस नेता व पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कृष्णराव दीक्षित ने कहा है कि यह बजट पूरी तरह भ्रमित करने और सपने दिखाने वाला है। पूंजीगत आय गलत बताई गई है। मध्य प्रदेश शासन ने कई मदों में कटौती की है। उसके बाद भी आय 678 करोड़ दिखाई गई है, जो कभी 300 करोड़ से अधिक गई ही नहीं। मान लिया जाए बहुत फायदे का बजट है तो भैया ऐसे में जब कोरोना ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है तो नए कर क्यों लगाए जा रहे हैं। कुछ पुराने करों को डबल कर दिया गया है। जैसे जलकर को 150 से 300 रुपए कर दिया गया है। नए कर के रूप में मलकर 180 रुपए लगाया गया है।

शहर के आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट बताया

निगम प्रशासन ने इस बजट को शहर आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट बताया है। इसमें इन कामों पर फोकस बनाया गया है। इन कामों में बजट का पैसा खर्च किया जाएगा। जैसे-

पर्यावरण एवं स्वास्थ्य
स्लॉटर हाउस का आधुनिकीकरण
मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग
वाटर फॉगर मशीन के माध्यम से वायु गुणवत्ता सुधार
वृक्षारोपण में वृद्धि के लिये धनराशि की व्यवस्था के लिए वृक्ष काटने के शुल्क को बढ़ाना
ठोस अपशिष्ट कलेक्शन के लिए नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदना
ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण
मुख्य मार्गो को डस्ट फ्री किया जाना
रोड साइड ग्रीनपेच निर्माण
नई सुविधाऐं

नाइट चौपाटी बाजार का निर्माण करना
पार्को का उन्नयन, कैन्टीन व खेल उपकरणों की व्यवस्था
हॉकर्स जोन की व्यवस्थाओं में सुधार किया जायेगा
जलकर व सीवर की ID को संपत्तिकर की ID से एकीकृत किया जाकर उपभोक्ता को समस्त प्रकार के कर/शुल्क पोर्टल पर जमा करने की सुविधा
निकाय द्वारा संचालित समस्त विवाह वाटिका/सामुदायिक भवन आदि की ई-नगर पालिका द्वारा बुकिंग की व्यवस्था
बजट का सामाजिक पहलू

मुक्तिधाम/शवदाह गृहों का उन्नयन
पंजीकृत हॉकर्स को स्मार्ट कार्ड से भुगतान की सुविधा
आय में वृद्धि से बनेंगे आत्मनिर्भर

विज्ञापनो सें आय में वृद्धि
बेहतरी प्रभार लागू किया जाकर उसी क्षेत्र में नवीन सड़क निर्माण एवं अन्य सुविधाऐं
अधोसंरचना विकास

- सड़क निर्माण हेतु राशि में बढ़ोतरी

- सुविधायुक्त बस स्टैण्ड का निर्माण

रोजगार सृजन

पैकेज्ड वाटर के प्लांट की स्थापना तथा NULM समूहों के माध्यम से विक्रय कर रोजगार सृजन
विद्युत

सोडियम स्ट्रीट लाईट का LED में परिवर्तन
विद्युत जनरेशन हेतु सोलर मॉडल का विकास
जलप्रदाय एवं सीवर

नवीन DMA (डिस्ट्रिक्ट मीटरिंग एरिया) को लागू करना
जलप्रदाय एवं सीवर प्रणाली का विस्तार
चंबल नदी से जल परिवहन
सामाजिक न्याय

दीनदयाल रसोई के नये केन्द्र खोले जायेंगे। दीनदयाल एक्सपे्रस अंतर्गत एक नवीन एक्सप्रेस प्रारंभ
रैन बसेरा केन्द्रों पर सुविधाऐं बेहतर की जायेंगी
खेल

विशेषज्ञ संस्थाओं के माध्यम से खेल प्रतिस्पर्धाओं का मानक स्तर पर आयोजन
खेल प्रतिस्पर्धाओं में कैन्टीन व विज्ञापन के माध्यम से आय का सृजन

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