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यौम-ए-शहादत:शहर में सैकड़ों छोटे-बड़े जुलूस निकाले गए, कर्बला में ताजिए दफनाए और विसर्जित किए

ग्वालियर | शुक्रवार को यौम-ए-शहादत मनाया गया है। जिस पर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से कर्बला में ताजिए शहर में गश्त करते हुए सागरताल पहुंचे। यहां ताजिए दफनाए गए और विसर्जित किए गए। इस दौरान सागरताल आने वाले सभी रास्तों पर सुबह से लेकर रात तक काफी भीड़ रही। जिस कारण 9 थानों के फोर्स के साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात करना पड़ा। सागरताल आने वाले रास्तों पर ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा है। सुबह से रात तक वहां ट्रैफिक जाम रहा है।

मोहर्रम में शब-ए-शहादत गुरुवार को मनाई गई थी। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ताजियों का सांकेतिक रूप से गश्त कराया गया। इसके बाद शुक्रवार को यौम-ए-शहादत मनाई गई। सागर ताल स्थित कर्बला में ताजिए ससम्मान दफनाए और विसर्जित किए गए। सभी कार्यक्रमों में कोरोना गाइड लाइन का पालन किया जाएगा ऐसा इंतजामिया कमेटी ने दावा किया था, लेकिन पालन होता नजर नहीं आया है। न तो मास्क नजर आए हैं न ही सोशल डिस्टेंस दिखा है।

ग्रेटर ग्वालियर मोहर्रम एवं कर्बला इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष अख्तर हुसैन कुरैशी के अनुसार ताजिए क्षेत्र के समीप स्थित कर्बला में ले जाए गए हैं। सागर ताल स्थित कर्बला पर भी यौम-ए-शहादत के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं।

शहर काजी अब्दुल अजीज कादरी के अनुसार मोहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है, इस माह की कई विशेषताएं और महत्व हैं। इस्लामी यानि हिजरी वर्ष का पहला माह मुहर्रम है। हिजरी वर्ष की शुरुआत इसी माह से होती है।

इस माह में रोजा रखने की खास अहमियत है। रमजान के अलावा सबसे उत्तम रोजे वे हैं, जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं। मुहर्रम की 9 तारीख को की जाने वाली इबादतों का भी बड़ा सवाब बताया गया है। हजरत मुहम्मद के साथी इब्ने अब्बास के मुताबिक हजरत मुहम्मद ने कहा कि जिसने मुहर्रम की 9 और 10 तारीख का रोजा रखा। उसके साल भर के गुनाह माफ हो जाते हैं।

सागरताल के हर रास्ते पर ट्रैफिक जाम

  • यौम-ए-शहादत पर सागरताल स्थित कर्बला में ताजिए दफनाए गए तथा विसर्जित किए गए। शहर के विभिन्न इलाकों से जुलूस के रूप में ताजिए पहुंचे, इसकी वजह से जीवाजीगंज से सागरताल रोड, बहोड़ापुर से सागरताल रोड और घासमंडी से सागरताल रोड जाने वाले मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। इन तीनों रास्तों पर आने वाले ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गो से निकाला गया। सिर्फ ताजिए से जुड़े वाहनों और काफिले को इन रास्तों पर जाने दिया गया।

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