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बेटी की पेटी, पुलिस खोलना ही भूल गई

ग्वालियर | बेटियों की सुरक्षा और ऐसी शिकायतें जिसमें वह सामने आकर शिकायत नहीं कर सकती हैं , ऐसी शिकायतों को जानने और उन पर तत्काल एक्शन लेने के उद्देश्य से पुलिस अफसरों ने बेटी की पेटी योजना का शुभारंभ किया था। योजना के 7 दिन बाद पेटी खोली भीं गई तो बड़ी रोचक शिकायतें मिलीं थीं। किसी छात्रा ने कॉलेज के पास पान की गुमटी पर खड़े होने वाले लड़कों के घूरने की शिकायत की तो किसी ने स्कूल के बाद मनचलों की। पुलिस ने एक्शन भी लिया। पर अफसर बदले तो योजना भी धरी की धरी रह गए। महीनों से शहर के स्कूल, कॉलेज व कोचिंग सेंटर के आसपास लगी 41 बेटी की पेटी को खोला तक नहीं गया है। इन पर लापरवाही का धूल भी चढ़ गई है। रविवार को समाजसेवी किरन खेनवार ने फिर से इस बेटी की पेटी योजना को गंभीरता से लेने का मुद्दा उठाया है। अब मांग उठी है तो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने भी कहा है कि वह जल्द इस पूरे मामले को दिखवाएंगी कि आखिर पेटी को क्यों नहीं खोला जा रहा है।यहां पर लगाई गई थीं बेटी की पेटी
प्रेस्टीज कॉलेज-1, गर्ल्स कॉलेज मुरार-1, गर्ल्स स्कूल मुरार-1, एमिटी यूनिवर्सिटी-1, आईएचएम, महाराजपुरा-1, रायसिंह का बाग कोचिंग एरिया में-3 पड़ाव-8, कंपू-8, थाटीपुर-8, माधौगंज-8 में बेटी की पेटी लगाई गई थीं। जब यहां पेटी लगाने के बाद पहली बार उन्हें खोला गया था तो इसमें रोचक शिकातये भी मिली थीं।अधिकारी ने बेटी की पेटी को दिखवाने की कही बात
महिला सुरक्षा के लिए लगाई गई बेटी की बेटी के बारे में जब एडिशनल एसपी हितिका वासल से बातचीत की तो उनका कहना था कि बेटी की पेटी पर हम पूरा ध्यान देंगे और देखेंगे कि उसमें क्या-क्या कंप्लेंट आ रही है और इस बेटी की पेटी को और बढ़ावा दिया जाएगा।

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