टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² मरà¥à¤¡à¤° का खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° | आखिरकार पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने 72 घंटे में टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² मरà¥à¤¡à¤° का खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ कर दिया है। हतà¥à¤¯à¤¾ करने वाला कोई और नहीं मृतक का साढू का बेटा ही निकला है। अपने à¤à¤• दोसà¥à¤¤ के साथ मिलकर पूरी वारदात को अंजाम दिया है। दोनों चोरी करने घर में घà¥à¤¸à¥‡ थे। जिसकी नींद खà¥à¤²à¤¤à¥€ गई, उसे मारते गà¤à¥¤ à¤à¤•-à¤à¤• करके मौसा, मौसी और मौसेरी बहन को मौत के घाट उतार दिया। मासà¥à¤Ÿà¤° माइंड à¤à¤¤à¥€à¤œà¤¾ सचिन पाल समेत दोनों आरोपियों को गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° कर लिया गया है। दूसरा आरोपी तरà¥à¤£ à¤à¤¾ उरà¥à¤« घोड़ा का चोरी का à¤à¥€ रिकॉरà¥à¤¡ होना पता चला है।
दोनों ने पà¥à¤²à¤¿à¤¸ को पूरी घटना बयां की है। पूरी पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग मृतक के à¤à¤¤à¥€à¤œà¥‡ सचिन पाल ने बनाई थी। इसमें मोनू नाम के यà¥à¤µà¤• का नाम à¤à¥€ आया था, लेकिन बाद में उसकी कोई à¤à¥‚मिका सामने नहीं आई है। पूरा खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ को आठà¤à¤• कॉल पर हà¥à¤† है। जिसमें कहा गया कि जिसे बाहर ढूंढ रहे हो वह हवालात में बैठा है। घोड़ा को उसी थाना पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡ से à¤à¤• दिन पहले ही à¤à¤• वारंट में पकड़ा था। तब पता à¤à¥€ नहीं था कि यह टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² मरà¥à¤¡à¤° का खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ करेगा।
à¤à¤¸à¥‡ खà¥à¤²à¤¾ मामला
मà¥à¤°à¤¾à¤° के अलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ टॉकीज के पास रहने वाले जगदीश पाल (60), उसकी पतà¥à¤¨à¥€ सरोज और बेटी 11 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ कीरà¥à¤¤à¤¿ पाल की हतà¥à¤¯à¤¾ कर दी गई थी। मासà¥à¤Ÿà¤° माइंड जगदीश के साढू का बेटा सचिन पाल निकला है। हतà¥à¤¯à¤¾ के बाद पà¥à¤²à¤¿à¤¸ काफी हाथ पैर मार रही थी। तà¤à¥€ घटना सà¥à¤¥à¤² के पास रहने वाले à¤à¤• पड़ोसी ने पà¥à¤²à¤¿à¤¸ को आसान का कà¥à¤²à¥‚ दिया। उसने बताया कि मृतक के घर के सामने ही उसका साढू रहता है। साढू तो दिख रहा है, लेकिन उसका बेटा सचिन इतने बà¥à¥‡ हतà¥à¤¯à¤¾à¤•ांड के बाद à¤à¥€ नजर नहीं आ रहा। पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने सचिन और उसके दोसà¥à¤¤ घोड़ा को गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° किया। घोड़ा ने बताया कि शनिवार-रविवार दरमियानी रात लूट और चोरी के इरादे से ही घर में पीछे के रासà¥à¤¤à¥‡ से दाखिल हà¥à¤ थे। जब चोरी कर रहे थे तो सबसे पहले मौसी सरोज की नींद खà¥à¤²à¥€à¥¤
उस पर चाकू से हमला कर दिया। फिर उसका तकिया से मà¥à¤‚ह दबाकर हतà¥à¤¯à¤¾ की। इसके बाद मौसा और बहन की नींद खà¥à¤² गई। मौसा की गला घोंटकर हतà¥à¤¯à¤¾ की। रात 2 बजे से सà¥à¤¬à¤¹ 4.30 बजे तक कीरà¥à¤¤à¤¿ पर कटà¥à¤Ÿà¤¾ अड़ाकर घर में रखे गहनों के बारे में पूछते रहे। उसे मारने का पà¥à¤²à¤¾à¤¨ नहीं था। पर जाते समय अचानक सचिन के चेहरे से साफी हट गई। जिससे उसकी पहचान हो सकती थी। इसलिठकीरà¥à¤¤à¤¿ को à¤à¥€ तकिया से मà¥à¤‚ह दबाकर मार डाला।साहब, जिसे ढूंढ रहे हो वह तो हवालात में बैठा है
- जब पà¥à¤²à¤¿à¤¸ टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² मरà¥à¤¡à¤° के आरोपियों की तलाश कर रही थी। तà¤à¥€ ASP राजेश डंडौतिया को à¤à¤• कॉल आया। मà¥à¤–बिर ने बताया कि साहब, जिस ताले को खोलना चाह रहे हो उसकी चाबी पहले से ही थाने में रखी है। उसका इशारा घोड़ा पर था। जिसे पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने à¤à¤• दिन पहले पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ वारंट में पकड़ा था। उस समय पà¥à¤²à¤¿à¤¸ को पता à¤à¥€ नहीं था कि यही टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² मरà¥à¤¡à¤° का सूतà¥à¤°à¤§à¤¾à¤° निकलेगा। इसके बाद पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने घोड़ा से कड़ी पूछताछ की तो वह टूट गया। इस पर आईजी गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° अविनाश शरà¥à¤®à¤¾ ने पूरी टीम को 30 हजार रà¥à¤ªà¤ नकद पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार दिया है।
पहचान हो जाती, इसलिठहतà¥à¤¯à¤¾ करनी पड़ी
रात करीब 2 बजे घर में पीछे के रासà¥à¤¤à¥‡ से दोनों दाखिल हà¥à¤à¥¤ जब वारदात को अंजाम दे रहे थे तà¤à¥€ सचिन की मौसी सरोज की नींद खà¥à¤² गई। उसने à¤à¤• आरोपी के बाल पकड़ लिà¤à¥¤ इसके बाद सचिन ने ही मौसी की चाकू मारकर हतà¥à¤¯à¤¾ की। घटना के बाद मृतका के हाथ में कà¥à¤› बाल à¤à¥€ फोरेंसिक टीम को मिले हैं। जब सरोज को चाकू मारे तो उसी कमरे में सो रहे जगदीश पाल और कीरà¥à¤¤à¤¿ की à¤à¥€ नींद खà¥à¤² गई। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सचिन को पहचान लिया। इसके बाद उन दोनों के गले घोंटकर हतà¥à¤¯à¤¾ कर दी गई।
चेहरे से साफी नहीं हटती तो बच सकती थी जान
- कीरà¥à¤¤à¤¿ की जान बच सकती थी, लेकिन उसकी किसà¥à¤®à¤¤ ठीक नहीं थी। जब दोनों आरोपी जा रहे थे तà¤à¥€ कमरे से निकलते समय सचिन के चेहरे से साफी हट गई। इसके बाद 11 साल की कीरà¥à¤¤à¤¿ ने उसे पहचान लिया। दोनों बदमाश वापस लौटे और फिर उसको à¤à¥€ मार दिया।
बहन के घर छà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¤¾ था माल
- पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने आरोपी से पूछताछ की तो पता लगा कि उसने लूट का माल अपनी à¤à¤• बहन के घर मà¥à¤°à¤¾à¤° में ही छà¥à¤ªà¤¾ दिया था। जब पà¥à¤²à¤¿à¤¸ उससे पूछताछ कर रही थी तो उसे अपने पकड़े जाने का मलाला था, लेकिन हतà¥à¤¯à¤¾ पर पछतावा नहीं था।