लोहा गर्म हे क्या करना हे आप बेहतर जानते हैं
जिद -जज्वा और जूनून को दिल में समाकर गरीवों के आंसू पोछने बाले व्यक्ति का दिल इतना कठोर कैसे हो गया हे .जनता को भगबान मानने बाले व्यक्ति अपनी जनता को बारिश और ठंड में धरने पर बैठने और रोते हुए देख कर भी मन नहीं पसीज रहा हे .
जी हाँ हम बात कर रहे हैं ऊर्जा मंत्री प्रदुम्मन सिंह तोमर की .आखिर सब्जी मंडी मामले में वो कौन स्वार्थी सलाहकार हैं ,जिन्होंने जनता के दिलों पर राज करने बाले प्रदुम्मन को दिग्भर्मित कर दिया .प्रदुम्मन को तो बापू (पिता जी ) ने सकारात्मक राजनिती करने की शिक्षा दी थी .पर आज उनके बताये मार्ग से क्यों भटक रहे हैं .ठीक हे आप कोई सुधार करना चाहते हैं .लेकिन आपका पहला दायित्व अपनी जनता के प्रति जबाब देह होना भी हे .पहले जनता से पूंछते की में सब्जीमण्डी में आप लोगों के लिए काम्प्लेक्स बनाना चाह रहा हूँ .जब तक आपको इंटक मैदान पर कारोबार करना होगा .शायद जनता आपको सहमति देती .मगर पता नहीं अचानक सब्जीमंडी में बुलडोजर चल गया . गरीवों के आँख से आंसूं निकले तो कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों हाथ लपक लिया .लेकिन कुश्ती वही जीतता हे , जिसे धोबी पछाड़ दाव खेलना आता हे.जिसमे प्रदुम्मन सिंह तोमर माहिर मने जाते हैं. जिस तरह जेसीमिल स्रम्मिकों की लड़ाई लड़कर रातों ,रात हीरो बने ,वैसे ही बक्त आपके हाथ में हे .लोहा गर्म हे .क्या करना हे आप बेहतर जानते हैं.सेवक तो सेवक होता हे .