एक नहीं पांच झटके लगे ,समर्थक बैचेन
ग्वालियर अंचल में भारतीय जनता पार्टी में वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई हे .केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच सहमात का खेल चल रहा हे .सियासत इतनी गरमा चुकी हे कि अब श्री सिंधिया के साथ जाने बाले श्री तोमर समर्थक फिर से श्री तोमर खेमे में लौटना शुरू हो गए हैं या फिर मोके कि तलाश में हैं .वे समझ चुके हैं कि श्री सिंधिया भाजपा में लंबी रेस दौड़ने बाले नहीं हैं . मूल भाजपाई में और आयतित भाजपाई में शीर्ष नेतृत्व अंतर् करके चल रहा हे .
भाजपा को सत्ता में काबिज कराने का इनाम श्री सिंधिया को मिल चूका हे और अब भाजपा उनके जय्दा दबाव में निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं हे . एहि कारण हे कि उनके समर्थक मंत्री को सड़क बनबाने के लिए कलेक्टर के हाथ जोड़ना पड़ रहे हैं.सबको मालूम हे कि मुख्यमंत्री की गुडबुक के टॉप टेन में कलेक्टर शुमार हैं .चर्चा तो यह भी हो रही हे कि कई नेता जमीनों कि फ़ाइल करबाने लिए एड़ी ,चोटी का जोर लगा चुके हैं ,मगर साहब कि मुस्कान नेताओं को घायल कर देती हे ,पर फ़ाइल नहीं बढ़ती हे .
हाँ हम बता रहे थे पांच बड़े झटके लगे उनमें नगर निगम के सभापति चुनाव में महाराज ने हरीपाल को उम्मीदवार बनवाया ,मगर दो घंटे बाद केंन्द्रीय मंत्री तोमर के खास मनोज तोमर को उम्मीदवार बनाने का भोपाल से फरमान आ गया और इस तरह पहला झटका दिया . दूसरा यह हे कि महाराज साहब के साथ श्योपुर के कार्यक्रम में अनजानों कि तरह व्यबहार हुआ ,यहाँ तक कि भासण तक नहीं दे पाए .तीसरा यह कि संभागीय आयुक्त कि नियुक्ति में भी नहीं चली , चौथा यह कि निगम कमिश्नर को हटवा तो नहीं पाए ,और पावरफुल होकर साडा का प्रभार ले आये और पांचवां यह की अभय चौधरी जिला भाजपा अध्यक्ष बन गए .अब पाठक ही तय करें कि कोन किस पर भारी हे ,हमने जो पार्टी में चर्चाएं हो रहीं हैं उसे आपके सामने रख दिया हे .