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मध्यप्रदेश में बिगड़ गया IPS कैडर प्रबंधन, SP लेवल के 95 पदों के खिलाफ 120 पदस्थ

 प्रदेश में आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना का प्रबंधन गड़बड़ होता जा रहा है। अलग-अलग स्तर पर निर्धारित पदों के विरुद्ध कहीं अधिक आईपीएस अधिकारी हैं तो कहीं कम। आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना का प्रबंधन बिगड़ने की मुख्य वजह किसी वर्ष अधिक तो कभी मात्र एक-दो पद मिलना है। वहीं प्रति 5 वर्ष में कैडर रिव्यू नहीं हो रहा है।

पुलिस अधीक्षक स्तर के पदों को ही लें तो सीनियर ड्यूटी पोस्ट (एसडीपी) के कुल 173 पदों में निर्धारित 50 प्रतिशत के हिसाब से इनकी संख्या 87 होनी चाहिए। प्रदेश सरकार ने इन्हें अपने विवेकाधिकार से बढ़ाकर 95 कर लिया है, पर इसके विरुद्ध 120 अधिकारी(एसपी) तैनात हैं।

डीआईजी के 26 पद

इसी तरह से डीआईजी स्तर के 34 की जगह 26 पद ही प्रदेश सरकार ने रखे हैं, जबकि इनके विरुद्ध पदस्थ 41 हैं। निर्धारित पद की तुलना में कम या अधिक अधिकारियों की पदस्थापना से जिस पद पर जो अधिकारी होना चाहिए। कई बार उससे नीचे या ऊपर पद वाला पदस्थ कर दिया जाता है।उदाहरण के तौर पर 2 से 3 वर्ष पहले ऐसी स्थिति बनी थी कि प्रदेश में 56 एडीजी हो गए थे। ऐसे में आईजी की जगह जोन में एडीजी पदस्थ करना पड़ा था। अभी आई स्तर के 35 कैडर पोस्ट के विरुद्ध 24 अधिकारी ही इस पद पर हैं, इस कारण पुलिस मुख्यालय की कुछ शाखाओं में आईजी नहीं हैं। उनका काम डीआईजी कर रहे हैं।

प्रदेश में आईपीएस के कुल 319 पदों में से 37 पद रिक्त

 प्रदेश में आईपीएस अधिकारियों के कुल 319 पद हैं। इनमें 37 अभी रिक्त हैं। कारण, सेंट्रल डेपनुटेश रिजर्व (सीडीआर) के लिए आरक्षित 68 पदों से 27 अधिकारी ही पदस्थ हैं। बाकी पद रिक्त हैं। इस तरह में अभी प्रदेश में 282 आईपीएस अधिकारी ही पदस्थ हैं। प्रदेश को 6 नए अधिकारी भी इस वर्ष के अंत तक मिलने की उम्मीद है।

 
 

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