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सौरभ का नार्को टेस्ट करा सकती है पुलिस, अभी तक नहीं खोला काली कमाई का राज

मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा से सात दिन की पूछताछ में लोकायुक्त पुलिस को जानकारी निकालने में खास सफलता नहीं मिली है। पुलिस अब दूसरे तरीकों से सौरभ से राज उगलवाने की तैयारी में है।

नार्को टेस्ट कराने पर भी पुलिस विचार कर रही है। इसके लिए विधि विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। कोर्ट की अनुमति से नार्को टेस्ट कराया जा सकेगा। दरअसल, इस मामले में कई बड़े नेताओं और अधिकारियों का नाम भी आ रहा है, इस कारण सौरभ और उसका सहयोगी चेतन सिंह गौर मुंह नहीं खोल रहे हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है कि पुलिस यह नहीं पता कर पाई है कि कार में मिला 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद किसके हैं? सोना कहां से आया? खरीदी के लिए भुगतान किसने और किस माध्यम से किया?

17 फरवरी तक हिरासत

उधर, तीनों आरोपितों की पुलिस रिमांड अवधि पूरी होने पर लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राम प्रताप मिश्र की विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया। यहां से तीनों को 17 फरवरी तक की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

सौरभ के साथ दो और साथी गिरफ्तार

लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ और चेतन सिंह गौर के आवास पर 18 दिसंबर को छापा मारा था। इसके 40 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर के लिए आते समय सौरभ को पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। उसी दिन सौरभ के करीबी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

जीनकारी नहीं उगलवा सकी पुलिस

पुलिस हिरासत में लेकर तीनों से एक सप्ताह तक पूछताछ की पर सौरभ की संपत्तियों के बारे में पुलिस खास जानकारी नहीं उगलवा सकी। मंगलवार को सौरभ सहित तीनों आरोपितों को जेल भेजने के न्यायालय के आदेश के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आरोपितों से पूछताछ के लिए कोर्ट में आवेदन लगाया।

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