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बाबू सज्जन सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ईओडब्ल्यू ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया

मध्यप्रदेश सरकार के सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के नए-नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला हरदा जिले का है, जहां आरटीओ कार्यालय के बाबू ने कबाड़ हो चुकी बस के रजिस्ट्रेशन को खत्म करने के लिए बस मालिक से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। बस मालिक ने कई बार आवेदन देकर निवेदन किया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो मामला 20 हजार रुपये में तय हुआ। इसके बाद बस मालिक ने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) की भोपाल शाखा में इसकी शिकायत दर्ज कर दी। शुक्रवार को भोपाल से आई टीम ने बाबू को 20 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी के दौरान बाबू के पास से एक लाख रुपये नकद भी बरामद हुए। इस पूरे मामले पर आरटीओ अधिकारी ने अनभिज्ञता जताते हुए खुद को इससे अनजान बताया।दरअसल, हरदा जिले के आरटीओ ऑफिस में पदस्थ बाबू सज्जन सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ईओडब्ल्यू की 15 सदस्यीय टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। फरियादी सुरेंद्र तनवानी ने ईओडब्ल्यू को शिकायत की थी कि उनकी एक यात्री बस पूरी तरह कंडम हो चुकी है, जिसका रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने के लिए उन्होंने कई बार आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान आरटीओ के बाबू सज्जन सिंह ने रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने जाल बिछाया और शुक्रवार को सज्जन सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 1 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए। अब माना जा रहा है कि जांच के बाद अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। फिलहाल जांच जारी है।शिकायतकर्ता सुरेंद्र तनवानी ने बताया कि उनकी और उनके रिश्तेदारों की कई गाड़ियां हरदा आरटीओ के क्षेत्राधिकार में संचालित हो रही हैं। उनमें से एक गाड़ी का जीवनकाल समाप्त हो गया था, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने के बदले में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। यह राशि अधिक होने के कारण उन्होंने ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई। ईओडब्ल्यू ने 20 हजार रुपये में मामला तय कर आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।इस मामले में हरदा जिले के आरटीओ अधिकारी राकेश कुमार आहाके ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, सज्जन सिंह के खिलाफ मौखिक शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते उसे वाहन चेकिंग की ड्यूटी से हटा दिया गया था। साथ ही उसे वापस वहीं भेजने की कार्रवाई की जा रही थी, जहां से वे संलग्न हुए थे।





 
 

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