पंखे तले तपस्या और कैमरे के लिए त्याग – ऊर्जा मंत्री का ग्रीष्मकालीन ड्रामा ?
मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने हाल ही में एक ‘अनोखा’ संकल्प लिया है — जून की तपती गर्मी में वे एयर कंडीशनर का उपयोग नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, मंत्री जी ने यह भी ऐलान किया है कि वे जून महीने भर अपने निज निवास के पास स्थित एक पार्क में पंखे के नीचे रात बिताएंगे।
सुनने में यह संकल्प सराहनीय लग सकता है, पर ज़रा ठहरिए — क्या यह वास्तव में एक प्रेरणादायक पहल है, या सिर्फ एक दिखावटी राजनीतिक नौटंकी?
जब पूरा प्रदेश बिजली कटौती, ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब ऊर्जा मंत्री का यह कृत्य कुछ असहज सवाल खड़े करता है। क्या जनता को बिजली देना उनकी ज़िम्मेदारी नहीं है? क्या वे बिजली व्यवस्था को सुधारने की बजाय मीडिया की सुर्खियाँ बटोरने में व्यस्त हैं?
यदि मंत्री वास्तव में ऊर्जा संकट के प्रति संवेदनशील हैं, तो क्या वे ऊर्जा उत्पादन और वितरण की कमियों को दूर करने के लिए कोई ठोस नीति लाएंगे, या केवल अपने पसीने से पवित्रता का अभिनय करते रहेंगे?
जनता मंत्री जी से प्रदर्शन नहीं, समाधान चाहती है। पार्क में पंखे के नीचे सोने से ना तो ट्रांसफार्मर सुधरेंगे, ना ही गाँवों की बुझी बत्तियाँ जलेंगी।
यह समय है जब नेताओं को तामझाम छोड़कर, ज़मीनी सच्चाईयों से जूझना चाहिए — और जनता को भी यह समझना चाहिए कि सच्ची सेवा चुपचाप होती है, कैमरों के सामने नहीं।