ग्वालियर सहित अन्य शहरों में अघोषित बिजली कटौती से मचा हाहाकार, भीषण गर्मी में जनता बेहाल, ऊर्जा विभाग मौन
ग्वालियर : मध्यप्रदेश के कई शहरों, विशेषकर ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया व अन्य क्षेत्रों में इन दिनों अघोषित बिजली कटौती का संकट गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी में जहाँ तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है, वहाँ दिनभर में 6 से 8 घंटे तक बिजली गुल रहना आम हो चला है। गर्मी से झुलसती आम जनता—खासतौर पर छोटे बच्चे, बुजुर्ग व महिलाएं—बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
विडंबना यह है कि ऊर्जा विभाग इस भीषण संकट के समय भी लगभग मौन साधे हुए है। उपभोक्ता घंटों हेल्पलाइन नंबरों पर फोन करते हैं लेकिन न कोई स्पष्ट जवाब मिलता है और न ही समाधान। जमीनी स्तर पर बिजली वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, मगर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री केवल अख़बारों की सुर्खियाँ बटोरने तक सीमित हैं। वे कभी देर रात निरीक्षण तो कभी योजनाओं की घोषणाओं में व्यस्त दिखते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि शहरों की गलियों में, मोहल्लों में, गाँवों में लोग बिना बिजली के बेहाल हैं यहां तक कि हेल्पलाइन नंबर पर भी कोई रेस्पॉन्स नहीं मिल रहा है।
ऐसा प्रतीत होता है जैसे सरकार की प्राथमिकताओं में जनता की पीड़ा कहीं पीछे छूट गई है। जिन वादों के साथ सत्ता में आने का दावा किया गया था, वे अब इस अघोषित बिजली संकट के आगे फीके पड़ते जा रहे हैं। जनता अब सवाल कर रही है—क्या हम सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित रहेंगे? क्या गर्मी में आम आदमी को राहत देने की जिम्मेदारी किसी की नहीं? ऊर्जा विभाग की यह उदासीनता और राज्य सरकार की चुप्पी अब जनता के सब्र की परीक्षा ले रही है।
जरूरत इस बात की है कि सरकार तत्काल प्रभाव से इस समस्या की गंभीरता को समझे और न केवल स्थिति का आकलन करे, बल्कि स्पष्ट समयसीमा के साथ समाधान भी प्रस्तुत करे। नहीं तो जनता का आक्रोश बढ़ने में देर नहीं है।