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विधायक को रोके जाने पर मचा सियासी तूफान: ‘मैं जनप्रतिनिधि हूं, अपराधी नहीं’ – अशोक नगर में पुलिस कार्रवाई पर फूटा साहब सिंह गुर्जर का गुस्सा

ग्वालियर (विनय शर्मा): ग्वालियर ग्रामीण से कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर ने अशोक नगर में आयोजित न्याय सत्याग्रह के दौरान पुलिस द्वारा उन्हें रोके जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर खुलकर लिखा —

"मैं एक जनप्रतिनिधि हूँ, कोई अपराधी या आतंकवादी नहीं!"

विधायक ने इस घटना को लोकतंत्र के मूल्यों पर सीधा हमला बताया है और प्रशासन पर जानबूझकर उन्हें रोकने का आरोप लगाया है।

पुलिस पर जानबूझकर रोकने का आरोप

साहब सिंह गुर्जर का कहना है कि उन्हें द्वेषपूर्ण भावना से रोका गया, ताकि जनता के सवाल और न्याय की मांग को दबाया जा सके।

उन्होंने लिखा: "यह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे जनसमुदाय की आवाज़ को दबाने की कोशिश है। जब सत्ता और प्रशासन मिलकर सत्य की राह में रुकावटें खड़ी करने लगें, तो समझ लीजिए सत्ता अहंकार में डूब चुकी है।"

“हम न रुकेंगे, न झुकेंगे”

विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का युद्ध है। "हम न रुकेंगे, न झुकेंगे। यह न्याय की लड़ाई है और इसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेंगे। जनता के विश्वास, संविधान के सम्मान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष हमारा कर्तव्य है — और हम यह करते रहेंगे।"

विपक्ष में उबाल, समर्थकों में जोश

गुर्जर की इस पोस्ट के बाद कांग्रेस समर्थकों और विपक्षी नेताओं में नाराज़गी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे सकती है।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब तक प्रशासन की तरफ़ से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। सवाल यह है कि — क्या यह कार्रवाई पूर्व नियोजित थी? क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को ऐसे दबाया जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल — क्या अब जनता के साथ खड़े होने की कीमत यह होगी? अशोक नगर में विधायक को रोके जाने की यह घटना अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रही। यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुकी है। साहब सिंह गुर्जर का यह स्पष्ट और आक्रामक रुख बताता है कि अब यह मामला सिर्फ विरोध की नहीं, बल्कि संवैधानिक संघर्ष की दिशा में बढ़ चुका है।

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