सावन में भोले कर देंगे मालामाल, बस इस तरह करें जलाभिषेक
भगवान शिव को सावन का महीना अति प्रिय है। उसका कारण माता पार्वती हैं। दरअसल, इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की शादी हुई थी। इस महीने भगवान शिव की विधि विधान के साथ पूजा करने से भक्तों के लिए लाभदायक होता है। प्रभु भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
सावन के महीने में भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में समुद्र मंथन हुआ था, जिसमें से विष निकला था। विष को पीन के बाद प्रभु को शांति मिले, इसलिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया था।
कैसे करें जलाभिषेक ?
जलाभिषेक के दौरान सही दिशा का ध्यान रखना चाहिए। आपको पूर्व या ईशान कोण की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
जलाभिषेक करने के दौरान खड़ा नहीं होना चाहिए। हमेशा बैठकर ही शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
जलाभिषेक के लिए तांबे के लौटे का उपयोग करें। इस दौरान पतली धारा के साथ धीरे-धीरे कर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। उसके बाद बाद प्रभु को बेलपत्र अर्पित करें।
भगवान शिव की आरती करने के बाद भोग लगा दें। प्रसाद का सभी को वितरण करें।
सावन के महीने की शुरुआत 11 जुलाई 2025 दिन शुक्रवार से हो गई है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। सोमवार का दिन भगवान शिव का माना जाता है।
शिव जी की पूजा के लिए प्रदोष काल बहुत शुभ होता है। भक्तों को जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से लेकर 11 बजे तक कर देना चाहिए। उसके बाद करने पर लाभ नहीं मिलता है।