घर पर कैसे करें जन्माष्टमी पूजा, जानें लड्डू गोपाल के जन्म, स्नान व अभिषेक की सम्पूर्ण विधि
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में श्री कृष्ण का जन्म पूजन किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, कान्हा जी का जन्म डंठल वाले खीरे से किया जाता है। अष्टमी तिथि लगने के बाद डंठल वाले खीरे को काटकर भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की मूर्ति को खीरे के अंदर बैठाया जाता है, फिर उन्हें खीरे के कटे हुए भाग या साफ सूती कपड़े से ढक दिया जाता है। वहीं, मध्यरात्रि के शुभ मुहूर्त में भगवान श्री कृष्ण का जन्म किया जाता है। सिक्के की मदद से खीरे को डंठल से अलग किया जाता है। इसे नाल छेदन के नाम से जानते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद लड्डू गोपाल को खीरे से बाहर निकाला जाता है।
स्नान व अभिषेक विधि: भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद स्नान व अभिषेक किया जाता है। खीरे से बाहर निकालने के बाद लड्डू गोपाल का कच्चे दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद किसी साफ कपड़े से भगवान प्रभु की मूर्ति को पहुंचे और उन्हें वस्त्र पहनाएं। अब प्रभु का आभूषणों से श्रृंगार करें। इन्हें मुकुट पहनाएं, हाथों में बांसुरी पकड़ाएं, कानों में कुंडल, पैरों में पायल और गले में माला पहनाएं। इसके बाद प्रभु पर पीले रंग के पुष्प चढ़ाएं और पीला चंदन लगाएं। अब प्रभु को अक्षत इत्र और फल चढ़ाएं। इसके बाद धूप और घी के दीपक से प्रभु की आरती पूरी श्रद्धा के साथ करें। कान्हा जी को माखन बेहद पसंद है। इसलिए लड्डू गोपाल को माखन मिश्री या मेवे की खीर का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
सामग्री: जन्माष्टमी पूजा के लिए चौकी,पीला कपड़ा, कान्हा की मूर्ति अथवा उनका चित्र या फिर लड्डू गोपाल की मूर्ति, तुलसी दल, भगवान श्री कृष्ण का श्रृंगार करने के लिए वस्त्र, मोरमुकुट, मोर पंख, बांसुरी, आभूषण, शंख, अक्षत, रोली, चंदन, केसर, पुष्प, माला, शुद्ध जल, जल रखने के लिए पात्र, कलश, गंगाजल, गाय दूध, शुद्ध घी, मक्खन, पंचामृत, धनिया पंजीरी केसर, नारियल, कपूर, पान, सुपारी, मौली, शक्कर, साफ कपड़ा, कान्हा के लिए झूला, दही, धूप, दीप, आदि
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह लें।