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बिहार चुनाव से पहले पीएम मोदी ने चल दिया तुरुप का इक्का? बीजेपी की प्रायोरिटी लिस्ट से समझ लीजिए

नई दिल्ली: बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और सभी सियासी दलों ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बड़ा ऐलान कर दिया। उन्होंने 19वीं सदी के समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती धूमधाम से मनाने की घोषणा की। माना जा रहा है कि यह कदम ओबीसी समाज को साधने की दिशा में अहम रणनीति है, क्योंकि फुले ओबीसी समाज में गहरी पैठ रखते हैं। वे जातिवाद के खिलाफ संघर्ष और महिलाओं की शिक्षा के लिए हमेशा याद किए जाते हैं।

ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती का जश्न

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम आने वाले समय में महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती बड़े स्तर पर मनाएंगे। इस अवसर को हम एक उत्सव की तरह शुरू करने जा रहे हैं। फुले के सिद्धांत और उनका ‘पिछड़ों को प्राथमिकता’ का मंत्र हमारे लिए प्रेरणा हैं।”

ज्योतिबा फुले माली जाति से आते थे और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने के लिए इस समारोह को खास महत्व दिया जा रहा है। बीजेपी पहले ही फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले को अपने विचारधारा का हिस्सा मान चुकी है।

सावित्रीबाई फुले और मोदी सरकार की रणनीति

सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। अब मोदी सरकार उनकी जयंती को मनाकर उन्हें और सम्मान देने जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार फुले के मंत्र को जमीन पर उतारने के लिए काम कर रही है। “पिछड़ों को प्राथमिकता देकर ही हम विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं,” उन्होंने कहा।

बिहार चुनाव में ओबीसी फैक्टर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घोषणा बिहार चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा है। बिहार की राजनीति में ओबीसी वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है। कुशवाहा और कोइरी जैसी जातियां, जो माली जाति की तरह बागवानी से जुड़ी हैं, ज्योतिबा फुले को अपना मानती हैं। ऐसे में यह ऐलान बीजेपी के लिए ओबीसी वोट बैंक मजबूत करने का बड़ा दांव साबित हो सकता है।

दलितों और वंचितों पर विशेष फोकस

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने दलित, वंचित और शोषित वर्गों के उत्थान की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार को उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय और संवेदनशील होना चाहिए। मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सिर्फ योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन योजनाओं को हर योग्य व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का असली अर्थ ‘सैचुरेशन’ में है—जहां कोई भी जरूरतमंद योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।

बीजेपी का विस्तारवादी एजेंडा

ज्योतिबा फुले की जयंती मनाना बीजेपी के लिए केवल एक समारोह नहीं है, बल्कि पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े महापुरुषों को अपनाकर अपना सामाजिक आधार बढ़ा रही है। इससे पहले पार्टी ने बी.आर. अंबेडकर को भी अपने ‘हॉल ऑफ इंस्पिरेशंस’ में जगह दी थी। प्रधानमंत्री मोदी खुद अंबेडकर की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं।

क्या असर होगा इस दांव का?

बीजेपी का यह कदम कितना कारगर साबित होगा, इसका फैसला तो आने वाला चुनाव ही करेगा। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का ऐलान पार्टी के लिए ओबीसी वर्ग में गहरी पैठ बनाने का बड़ा प्रयास है। फिलहाल बीजेपी ने बिहार चुनाव से पहले अपना सबसे मजबूत पत्ता खोल दिया है।

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