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सियासी अटकलों का नया मोड़: बंद कमरे में हुई बैठक में CM मोहन यादव और तोमर ने की गुप्त चर्चा, सिंधिया को CM बनाने की मांग बनी चर्चा का केंद्र?

ग्वालियर। मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों नए करवट लेती दिख रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने की मांग ने प्रदेश की सियासी तपिश को और तेज कर दिया है। खास बात यह है कि सिंधिया समर्थक मंत्री अपनी ही सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं, वहीं ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सिंधिया की लगातार बढ़ती सक्रियता ने माहौल को और गरमा दिया है।

इस बीच शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अचानक विधानसभा अध्यक्ष और ग्वालियर-चंबल की राजनीति के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर के घर पहुंचना, और दोनों नेताओं के बीच आधे घंटे की बंद कमरे की बातचीत होना, सियासी गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है।

यह मुलाकात उस वक्त हुई जब तोमर के गढ़ मुरैना में हाल ही में सिंधिया ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया था। वहां मंच से समर्थकों ने खुलकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठाई। इसके साथ ग्वालियर में विकास कार्यों पर सिंधिया का लगातार श्रेय लेने वाला रुख भाजपा की अंदरूनी राजनीति को और तेज करता दिख रहा है। गुना-शिवपुरी सांसद सिंधिया का अधिकारियों संग बैठक कर पुराने भाजपाई नेता मनोज तोमर को सार्वजनिक रूप से फटकारना भी गुटबाजी से जोड़कर देखा गया।

दरअसल, सिंधिया के 2020 में भाजपा में शामिल होने से पहले ग्वालियर-चंबल की राजनीति में नरेंद्र सिंह तोमर और सिंधिया एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते थे। भाजपा में आने के बावजूद सिंधिया की कार्यशैली आज भी कांग्रेस जैसी मानी जाती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने समर्थकों को क्षेत्र में खासा सक्रिय कर रखा है। ग्वालियर के प्रभारी मंत्री इंदौर से लाए गए तुलसी सिलावट हैं, वहीं शिवपुरी के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और गुना के प्रभारी गोविंद सिंह राजपूत भी सिंधिया के करीबी माने जाते हैं।

ग्वालियर और आसपास के बड़े विकास कार्यों पर श्रेय लेने की सिंधिया की राजनीति को लेकर बीते दिनों नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कटाक्ष किया था। मुरैना में एक कार्यक्रम में उन्होंने बिना नाम लिए कहा था – “कुछ नेता कहते हैं मैं लाया, मैं लाया... उन्हें ‘मैं-मैं’ से फुर्सत ही नहीं मिलती।”

इधर, मुरैना में सिंधिया के स्वागत समारोह के बहाने हुआ शक्ति प्रदर्शन और समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने भाजपा के भीतर की खींचतान को सतह पर ला दिया है। इन पोस्टरों पर साफ-साफ लिखा गया – “सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाओ, नहीं तो अपनी खैर बचाओ।”

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह नारा सीधे-सीधे भाजपा हाईकमान पर दबाव की राजनीति की तरह काम कर रहा है।

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