MP में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों पर ......
मध्य प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी( SC/ST/OBC) जैसे वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व पर मंगलवार देश की शीर्ष कोर्ट ने प्रदेश में अदालतों में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों के संबंध दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इनमें वंचित वर्गों को मौका देने को कहा।
हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया कि वैधानिक प्रावधान नहीं होने से इस मामले में बाध्यकारी निर्देश नहीं दिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने एमपी में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में वंचित समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने की एडवोकेट जनरल से अपेक्षा जताई। दरअसल याचिका में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा की गई नियुक्तियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि इसमें (ST) वर्ग का एक भी वकील नहीं है। साथ ही कहा कि एससी, महिला और ओबीसी वकीलों की भागीदारी भी बहुत कम है।
पीठ ने कहा कि किसी वैधानिक आरक्षण प्रावधान के अभाव में वह बाध्यकारी निर्देश नहीं दे सकती, लेकिन महाधिवक्ता से अनुरोध करती है कि नियुक्तियों के दौरान हाशिए के समाज से आने वाले अधिवक्ताओं और महिलाओं का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया। वैसे कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हालांकि यह कानूनी अधिकार नहीं है लेकिन इन वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में इस पर विचार किया जाना चाहिए।