8वीं के छातà¥à¤° के शरीर से कहीं से à¤à¥€ खून आने लगता है...
अशोकनगर : शहर की सोनी कालोनी में निवास करने वाले गà¥à¤°à¤¾à¤® देरखा का à¤à¤• 8 वीं ककà¥à¤·à¤¾ का छातà¥à¤° अखिलेश रघà¥à¤µà¤‚शी के शरीर के किसी à¤à¥€ अंग से खून आने लगता है। इस गंà¤à¥€à¤° बीमारी को लेकर पिता अपने पà¥à¤¤à¥à¤° का इलाज सà¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर करा चà¥à¤•े हैं लेकिन अà¤à¥€ तक डाकà¥à¤Ÿà¤° उसकी बीमारी के बारे में पता नहीं लगा सके हैं। इसी बीमारी को लेकर पिता अरूण रघà¥à¤µà¤‚शी अपने बेटे अखिलेश को लेकर कलेकà¥à¤Ÿà¤° के पास पहà¥à¤šà¥‡ और उसका उपचार कराने की मांग की।
अखिलेश की कहानी यह है कि उसकी पिछले 3 वरà¥à¤· से उसके शरीर के नाक, कान, आंख, छाती से खून निकलने लगता है। अब तो यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो गई है कि उसकी पेशाव से à¤à¥€ खून आने लगा है। जब वह शिकायत करने कलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤Ÿ आ रहा था तà¤à¥€ उसकी छाती से खून निकलने लगा था । पिता ने कलेकà¥à¤Ÿà¤° बी à¤à¤¸ जामोद से गà¥à¤¹à¤¾à¤° लगाई कि मेरे पà¥à¤¤à¥à¤° की बीमारी का इलाज कराया जाये।
जà¥à¤žà¤¾à¤¤ हो कि उकà¥à¤¤ छातà¥à¤° ककà¥à¤·à¤¾ 8 में मà¥à¤¸à¥à¤•ान पबà¥à¤²à¤¿à¤• सà¥à¤•ूल पà¥à¤¤à¤¾ है। पिछले 3 वरà¥à¤· से वह परीकà¥à¤·à¤¾ नहीं दे पाया है। पास-फैल की नीति के कारण उसे अगली ककà¥à¤·à¤¾ में दाखिला मिल जाता है। छातà¥à¤° अखिलेश से जब चरà¥à¤šà¤¾ की गई तो उसका कहना था कि जब उसे खून आता है तो यदि वह जमीन पर लेट जाये तो खून आना बंद हो जाता है। à¤à¤¸à¤¾ दो मिनिट तक होता है और 2 मिनिट बाद वह सहज हो जाता है। उसका इलाज अशोकनगर के साथ-साथ अनंदपà¥à¤° असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² के अलावा वह बाहर à¤à¥€ à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² में करा चà¥à¤•ा है लेकिन डाकà¥à¤Ÿà¤° अà¤à¥€ तक यह निषà¥à¤•रà¥à¤· नहीं निकाल सके है कि उसे à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और कैसे होता है। वह à¤à¥€ इसे अजूबा मान रहे है।
इस तरह की समसà¥à¤¯à¤¾ को लेकर जनसà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ में 07 फरवरी को पिता के साथ पहà¥à¤šà¥‡ अखिलेश रघà¥à¤µà¤‚शी ने अपनी दासà¥à¤¤à¤¾à¤‚ कलेकà¥à¤Ÿà¤° बी à¤à¤¸ जामोद को सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆà¥¤ जिसमें बताया कि अखिलेश के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों से खून आने की उसे बीमारी है। इसके इलाज की समà¥à¤šà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की जाये। कलेकà¥à¤Ÿà¤° ने अखिलेश रघà¥à¤µà¤‚शी के इलाज की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ हेतॠà¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² के à¤à¤•à¥à¤¸ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ मà¥à¤–à¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ अधिकारी डा रामवीर सिंह रघà¥à¤µà¤‚शी को दिये है।