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दो महिला आईपीएस बर्खास्त, एक की सर्विस रिवॉल्वर से चली थी फर्जी एनकाउंटर में गोली

सरकार ने दो महिला आईपीएस अधिकारियों की सेवा समाप्त कर दी है. ये अधिकारी लंबे वक्त तक ‘‘अनाधिकृत छुट्टी’’ लेने के लिए जांच का सामना कर रही थीं.

महाराष्ट्र कैडर की 1991 बैच की अधिकारी मारिया लोउ फर्नांडिस और उत्तराखंड कैडर की 1993 बैच की अधिकारी ज्योति एस. बेलूर की सेवा बुधवार को समाप्त कर दी गई. अनाधिकृत तौर पर उनकी अनुपस्थिति को ‘‘इस्तीफा मानकर’’ उनपर ये कार्रवाई की गई.

मारिया लोउ फर्नांडिस (50) 2005 से ही ड्यूटी से अनुपस्थित हैं, जब वो मुंबई पुलिस में डीसीपी जोन- सात में तैनात थीं.

ज्योति एस. बेलूर (48) मूल रूप से उत्तरप्रदेश कैडर की हैं और उत्तराखंड भेजे जाने के बाद से 2001 से अनुपस्थित हैं.

बेलूर वर्तमान में ब्रिटेन में हैं, जबकि फर्नांडिस ने अपने जवाब में कहा कि वह अमेरिका में पीएचडी कर रही हैं.

फर्जी मुठभेड़ से जुड़ा है नाम

ज्योति एस. बेलूर का नाम 1996 में गाजियाबाद में हुए फर्जी एनकाउंटर मामले में आया था जिसमें चार लोग मारे गए थे.

एक शव से बरामद एक गोली बेलूर के सरकारी रिवॉल्वर से चली थी. उस समय वह मोदीनगर की क्षेत्राधिकारी थीं.

बहरहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ कि गोली उन्होंने चलाई थी या उनके हथियार का किसी और ने इस्तेमाल किया था.

अदालत की तरफ से मामले में बार-बार तलब किए जाने के बावजूद वह पेश नहीं हुईं.

गाजियाबाद में सीबीआई की अदालत ने पिछले सोमवार को मामले में चार पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया था.

दो हफ्ते पहले भी हटाए गए थे आईपीएस अधिकारी

गृह मंत्रालय ने कुछ हफ्ते पहले दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया था. यूटी कैडर के 1998 बैच के मयंक शील चौहान और छत्तीसगढ़ कैडर के 1992 बैच के राजकुमार देवांगन को ‘‘काम नहीं करने’’ के लिए सेवा में बने रहने के ‘‘योग्य नहीं’’ पाया गया था.

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