पूरà¥à¤µà¤¾à¤‚चल है नमो-नमो तो पूरी मोदी सरकार कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ उतरी पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° में?
पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी अकà¥à¤¸à¤° यह कहते पाठजाते हैं कि देश में विधानसà¤à¤¾ और लोकसà¤à¤¾ के चà¥à¤¨à¤¾à¤µ à¤à¤•साथ कराठजाने चाहिठताकि सरकार को काम करने का वकà¥à¤¤ मिले. अलग-अलग समय पर होने वाले चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ और उसके पहले की आचार संहिताà¤à¤‚ सरकार का कीमती वकà¥à¤¤ बरबाद कर देती हैं.
वही पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ अपनी जनसà¤à¤¾à¤“ं में बार-बार दावा कर रहे हैं कि उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ विधानसà¤à¤¾ चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ को à¤à¤¾à¤°à¥€ बहà¥à¤®à¤¤ से जीत हासिल होने वाली है. à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° और नेताओं के बयानों को मानें तो मिशन 265 से कहीं आगे जाकर अबकी बार, 300 पार वाले नारे और दावे पारà¥à¤Ÿà¥€ की ओर से किठजा रहे हैं.
यानी उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में अपनी जीत को लेकर à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ आशà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤ है . कोई संदेह नहीं. जीत थाली में रखकर सामने सजा दी गई है. अब न अतिशय पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° की ज़रूरत है और न ही गलियों, रैलियों में वकà¥à¤¤ बरबाद करने की. à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ की मानें तो उनके लिठअब यह सरकार बनाने की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ तैयारी का वकà¥à¤¤ है.
लेकिन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤¸à¥€ है नहीं. पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ नरेंदà¥à¤° मोदी का संसदीय कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° है वाराणसी. यहां की सीटों पर जो सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बनी हà¥à¤ˆ है उसने पारà¥à¤Ÿà¥€ और पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ दोनों की नींद उड़ा रखी है. मोदी के लिठगà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ अगर मॉडल है तो बनारस उनकी ज़मीन है. और ज़मीन पर हार ज़मीन खिसकने से कम नहीं है. शायद यही चिंता पारà¥à¤Ÿà¥€ और पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ को परेशान कर रही है.
à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ का बनारस में पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° तंतà¥à¤° खà¥à¤¦ इसकी चà¥à¤—ली करता नज़र आता है. सरकार के कामकाज के लिठवकà¥à¤¤ की दà¥à¤¹à¤¾à¤ˆ देने वाले पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ का कैबिनेट बनारस में गली गली घूमता नज़र आ रहा है. à¤à¤• से à¤à¤• केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ मंतà¥à¤°à¥€, पारà¥à¤Ÿà¥€ के बड़े नेता, पà¥à¤°à¤¬à¤‚धक और जातीय गणित के हिसाब से अनà¥à¤•ूल चेहरे, सबको लाइन बनाकर बनारस में उतार दिया गया है.
à¤à¤¸à¤¾ लग रहा है कि à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ दरअसल बनारस में किसी सिकंदर के खिलाफ पूरी सेना लेकर खड़ी है. उसे हार का à¤à¤¯ है. उसे असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ और गढ़ बचाने की चिंता है. अगर à¤à¤¸à¤¾ नहीं होता तो पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ सहित कैबिनेट के तमाम नेताओं को बनारस में दर-दर दसà¥à¤¤à¤• देने की कà¥à¤¯à¤¾ ज़रूरत थी. वो दिलà¥à¤²à¥€ में अपना काम करते रहते. पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ और ज़िले के à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेता अपना पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° का काम जारी रखते. सरकार अपना काम करती, पारà¥à¤Ÿà¥€ अपना काम करती.
à¤à¤• जीते हà¥à¤ चà¥à¤¨à¤¾à¤µ के लिठजान लगा देना खà¥à¤¦ आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ की कमी का खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ करता है. सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ ईरानी महिलाओं को साधने में लगी हैं, रविशंकर पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦, धरà¥à¤®à¥‡à¤¦à¥à¤° पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ तो छोड़िà¤, मोदी अपनी पूरी तà¥à¤°à¤¿à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ (मोदी, शाह और जेटली) के साथ मैदान में उतर आठहैं. पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ रोडशो करेंगे, रैलियां करेंगे, बाकी लोग चौराहों, कोनों पर पूड़ी-सबà¥à¤œà¤¼à¥€ और चाय की दà¥à¤•ानों तक माहौल बनाने के लिठउतार दिठगठहैं.
यहां पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ केवल कथनी और करनी के फरà¥à¤• का नहीं है. चिंता का विषय यह à¤à¥€ है कि जब बजट से लेकर नीतियों तक दिलà¥à¤²à¥€ में बहà¥à¤¤ कà¥à¤› संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ और तय करने को बाकी है तो फिर पूरी सरकार को बनारस में कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¥‹à¤‚का जा रहा है. यह कितना उचित है. पहले के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने à¤à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ किया है और अगर किया à¤à¥€ है तो à¤à¤• जमे-जमाठपà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ को इस तरह देश की सरकार को कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की लड़ाई में à¤à¥‹à¤‚क देना कà¥à¤¯à¤¾ नैतिक और उचित है.
सतà¥à¤¤à¤¾ सपनों के जादू गढ़कर, सजाकर और दिखाकर हासिल तो होती है. लेकिन सतà¥à¤¤à¤¾ में आने के बाद सपनों और कथनों के बजाय साकार होती चीज़ें और करनी के आधार पर मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन होता है. केंदà¥à¤° की सरकार का à¤à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पूरी तरह उतरकर पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° में जà¥à¤Ÿ जाना इसी मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन में कमज़ोर पड़ती सतà¥à¤¤à¤¾ का संकेत है.
मोदी खà¥à¤¦ बता रहे हैं कि लहर खो चà¥à¤•ी है, अब ज़मीन बचाना ज़रूरी है.