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जयंती : 12 साल की उमà¥à¤° में à¤à¤—त सिंह बन गठआजादी के परवाने
अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ हà¥à¤•ूमत की जड़ों को अपने अदमà¥à¤¯ साहस से à¤à¤•à¤à¥‹à¤° देने वाले शहीदे आजम à¤à¤—त सिंह को जेल पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ ने फांसी देने से पहले 'वाहे गà¥à¤°à¥‚' का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ करने की सलाह दी तो उनके शबà¥à¤¦ थे ' अब आखिरी वकà¥à¤¤ à¤à¤—वान को कà¥à¤¯à¤¾ याद करना, जिनà¥à¤¦à¤—ी à¤à¤° तो मैं नासà¥à¤¤à¤¿à¤• रहा, अब à¤à¤—वान को याद करूंगा तो लोग कहेंगे मैं बà¥à¤œà¤¦à¤¿à¤² और बेईमान था और आखिरी वकà¥à¤¤ मौत को सामने देखकर मेरे पैर लड़खड़ाने लगे।'
12 साल की उमà¥à¤° में ही बदल गई जिंदगी
शहीदे आजम à¤à¤—त सिंह का जनà¥à¤® पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के à¤à¤• गांव लायलपà¥à¤° में 28 सितमà¥à¤¬à¤° 1907 में हà¥à¤† था। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विदà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¤à¥€ था। जलियांवाला बाग हतà¥à¤¯à¤¾à¤•ांड के साकà¥à¤·à¥€ रहे à¤à¤—त सिंह की सोच पर उस हतà¥à¤¯à¤¾à¤•ांड का à¤à¤¸à¤¾ असर पड़ा कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने लाहौर के नेशनल कॉलेज की पà¥à¤¾à¤ˆ छोड़कर à¤à¤¾à¤°à¤¤ की आजादी के लिठ‘नौजवान à¤à¤¾à¤°à¤¤ सà¤à¤¾’ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ कर डाली और 12 साल की उमà¥à¤° में ही देश माता की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठकूद पड़े।
सहज, सरल वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के इंसान थे à¤à¤—त सिंह
à¤à¤—त सिंह के à¤à¤¤à¥€à¤œà¥‡ किरणजीत ने à¤à¤• समाचार à¤à¤œà¥‡à¤‚सी से बातचीत में बताया कि शहीद की साहसी कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को à¤à¤• तरफ रखकर देखें तो पता चलता है कि वे à¤à¤• सरस, सजीव, मसखरे, सहà¥à¤°à¤¦à¤¯, सनà¥à¤¤à¥à¤²à¤¿à¤¤ और उदार मानव थे।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि शहीदे आजम à¤à¤—त सिंह (ताया जी) निशà¥à¤šà¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उनमे à¤à¤¸à¥€ ही अटलता थी, जैसी धारà¥à¤®à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ के मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ मे धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ होती है, जो निशà¥à¤šà¤¯ हो गया उसमे न वे ढील करते थे, न ढील सहते थे। कोई ढील करे, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ आ जाता था। बहà¥à¤¤ कà¥à¤› कहते-कहते सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ थे। वे किसी को ठेस नही पहà¥à¤‚चाते थे। यदि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यह महसूस होता उनकी बात से किसी को ठेस लगी है, तो वह हंसी खà¥à¤¶à¥€ का वातावरण बना कर उसे पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने की कोशिश करते थे। इससे काम न चले तो, गले मे हाथ डालकर उसे पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने की कोशिश करते थे।
जेल की जिंदगी
जेल के अफसर उनकी देख रेख करते थे। लाहौर जेल के बड़े जेलर खान बहादà¥à¤° मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ अकबर कहा करते थे कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने समूचे जीवन में à¤à¤—त सिंह जैसा शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ मनà¥à¤·à¥à¤¯ नहीं देखा। शहीदे आजम उदासी के दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ थे उदासी उनके पास फटक ही नही पाती थी। साहस उनके सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग था। 1925 मे शहीदे आजम दिलà¥à¤²à¥€ के वीर अरà¥à¤œà¥à¤¨ में समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ विà¤à¤¾à¤— का काम à¤à¥€ करते थे।
शà¥à¤°à¥€ दीनानाथ सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤¾à¤²à¤‚कार के साथ à¤à¤• चौबारे में रहते थे। उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ के शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ मे ' वे मितà¤à¤¾à¤·à¥€ और अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ शील थे। खाली समय में और रात को पà¥à¤°à¤¾à¤¯: राजनीतिक, à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤•, सामाजिक और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें पढते थे। समाचार तैयारी करने मे चà¥à¤¸à¥à¤¤ थे। उनका जीवन अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ सादा और संयम पूरà¥à¤£ था।
शà¥à¤°à¥€ दीनानाथ सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤¾à¤²à¤‚कार के ही शबà¥à¤¦à¥‹ मे ' रात मे वे अकà¥à¤¸à¤° चौबारे की छत पर अकेले बैठे रोते थे। जब मैने रोने का कारण पूछा, तो बहà¥à¤¤ देर चà¥à¤ª रहने के बाद बोले, ' मातृà¤à¥‚मि की इस दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ को देखकर मेरा दिल छलनी हो रहा है। à¤à¤• ओर विदेशियों के अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° हैं, दूसरी और à¤à¤¾à¤ˆ-à¤à¤¾à¤ˆ का गला काटने को तैयार है। इस हालत में मातृà¤à¥‚मि के ये बनà¥à¤§à¤¨ केसे कटेंगे।'
आजादी के इस मतवाले ने पहले लाहौर में‘सांडरà¥à¤¸-वध’और उसके बाद दिलà¥à¤²à¥€ की सेंटà¥à¤°à¤² असेमà¥à¤¬à¤²à¥€ में चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र आजाद और पारà¥à¤Ÿà¥€ के अनà¥à¤¯ सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ बम-विसà¥à¤«à¥‹à¤Ÿ कर बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ के विरà¥à¤¦à¥à¤§ खà¥à¤²à¥‡ विदà¥à¤°à¥‹à¤¹ को बà¥à¤²à¤‚दी दी।
कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिदल की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾
शहीद à¤à¤—त सिंह ने इन सà¤à¥€ कारà¥à¤¯à¥‹ के लिठवीर सावरकर के कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिदल ‘अà¤à¤¿à¤¨à¤µ à¤à¤¾à¤°à¤¤’ की à¤à¥€ सहायता ली और इसी दल से बम बनाने के गà¥à¤° सीखे। वीर सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ सेनानी ने अपने दो अनà¥à¤¯ साथियों सà¥à¤–देव और राजगà¥à¤°à¥ के साथ मिलकर काकोरी कांड को अंजाम दिया, जिसने अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के दिल में à¤à¤—त सिंह के नाम का खौफ पैदा कर दिया।
à¤à¤—त सिंह को पूंजीपतियों की मजदूरों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ शोषण की नीति पसंद नहीं आती थी। आठअपà¥à¤°à¥ˆà¤² 1929 को सेंटà¥à¤°à¤² असेमà¥à¤¬à¤²à¥€ में पबà¥à¤²à¤¿à¤• सेफà¥à¤Ÿà¥€ और टà¥à¤°à¥‡à¤¡ डिसà¥à¤ªà¥à¤¯à¥‚ट बिल पेश हà¥à¤†à¥¤ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ हà¥à¤•ूमत को अपनी आवाज सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ और अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ की नीतियों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ के लिठà¤à¤—त सिंह और बटà¥à¤•ेशà¥à¤µà¤° दतà¥à¤¤ ने असेमà¥à¤¬à¤²à¥€ में बम फोड़कर अपनी बात सरकार के सामने रखी। दोनों चाहते तो à¤à¤¾à¤— सकते थे, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ के निडर पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ ने हंसत-हंसते आतà¥à¤®à¤¸à¤®à¤°à¥à¤ªà¤£ कर दिया।
देश की आजादी के लिये सब कà¥à¤› कà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤¨ कर देने की चाहत ने à¤à¤—त सिंह को इस कदर निडर बना दिया था कि उनà¥à¤¹à¥‡ मौत का तनिक à¤à¥€ खौफ नहीं था। फांसी की सजा सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¥‡ जाने पर à¤à¥€ वह बेहद सामानà¥à¤¯ थे। फांसी के दिन à¤à¥€ वह अखबार पलटते रहे और साथियों के साथ मजाक करते रहे।
à¤à¤¸à¥€ थी वो आखिरी रात
23 मारà¥à¤š 1931 की रात à¤à¤—त सिंह को सà¥à¤–देव और राजगà¥à¤°à¥ के साथ लाहौर षडयंतà¥à¤° के आरोप में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ सरकार ने फांसी पर लटका दिया। यह माना जाता है कि मृतà¥à¤¯à¥à¤¦à¤‚ड के लिठ24 मारà¥à¤š की सà¥à¤¬à¤¹ ही तय थी, मगर जनाकà¥à¤°à¥‹à¤¶ से डरी सरकार ने 23-24 मारà¥à¤š की मधà¥à¤¯à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿ ही इन वीरों की जीवनलीला समापà¥à¤¤ कर दी और रात के अंधेरे में ही सतलà¥à¤œ के किनारे उनका अंतिम संसà¥à¤•ार à¤à¥€ कर दिया।
शहीद à¤à¤—त सिंह ने 23 वरà¥à¤· पांच माह और 23 दिन की आयॠमें ही हंसते-हंसते संसार से विदा ली। शहीदे आजम के à¤à¤¤à¥€à¤œà¥‡ किरण जीत सिंह ने उस पतà¥à¤° का जिकà¥à¤° किया जिसे à¤à¤—त सिंह ने अपने छोटे à¤à¤¾à¤ˆ और उनके पिता कà¥à¤²à¤¤à¤¾à¤° सिंह को लिखा था कि ' à¤à¥‹à¤° के पà¥à¤°à¤•ाश मे à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की किरण को कौन रोक सकता है, यदि समसà¥à¤¤ संसार à¤à¥€ हमारा दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ हो जाठतो à¤à¥€ हमे कà¥à¤¯à¤¾ हानि पहà¥à¤‚चा सकता है, मेरे जीवन के दिन समापà¥à¤¤ हो गये हैं।
मै à¤à¤• समाज की तरह सवेरे के पà¥à¤°à¤•ाश की गोद मे समापà¥à¤¤ हो रहा हूं मगर हमारा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ à¤à¤µà¤‚ विचार बिजली की कड़कड़हाट की à¤à¤¾à¤¤à¤¿ सारे संसार को पà¥à¤°à¤•ाशित करेंगे। इस हालत मे यह मà¥à¤Ÿà¥à¤ ी à¤à¤° धूल बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ हो à¤à¥€ जाठतो इसमे डर की कà¥à¤¯à¤¾ बात है।'
आजादी के परवाने ने कहा कि अगर कà¥à¤› समय पहले आप मà¥à¤à¤¸à¥‡ यह कहते तो आपकी इचà¥à¤›à¤¾ पूरी करने में मà¥à¤à¥‡ कोई आपतà¥à¤¤à¤¿ नही हो सकती थी। अब जब आखिरी वकà¥à¤¤ आ गया है, मै परमातà¥à¤®à¤¾ को याद करूंगा तो लोग कहेंगे कि वह बà¥à¤œà¤¦à¤¿à¤² है। तमाम उमà¥à¤° तो उसने मà¥à¤à¥‡ याद किया नही, जब मौत सामने नजर आने लगी तो मà¥à¤à¥‡ याद करने लगा है।
इसलिठबेहतर यही होगा कि मैंने जिस तरह पहले अपनी जिनà¥à¤¦à¤—ी गà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ है, उसी तरह मà¥à¤à¥‡ इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से जाने दीजिà¤, मà¥à¤ पर यह इलà¥à¤œà¤¾à¤® तो कई लोग लगायेंगे कि मै नासà¥à¤¤à¤¿à¤• था और मैने परमातà¥à¤®à¤¾ मे विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ नही किया, लेकिन यह तो कोई नही कहेगा कि à¤à¤—त सिंह बà¥à¤œà¤¦à¤¿à¤², बेईमान à¤à¥€ था और आखिरी वकà¥à¤¤ मौत को सामने देखकर उसके पांव लड़खड़ाने लगे।

