जीरो बजट में किया 200 कà¥à¤µà¤¿à¤‚टल तरबूज का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨, 3 लाख का मà¥à¤¨à¤¾à¤«à¤¾
बड़नगर। तहसील के गà¥à¤°à¤¾à¤® पलदूना में à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किसान ने जैविक खेती कर जीरो बजट में 3 बीघा जमीन में तरबूज की फसल लगाई है। किसान ने तरबूज के लिठबाजार से बीज, खाद, कीटनाशक की à¤à¥€ खरीदी नहीं की और टपक सिंचाई पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ से खेत में 200 कà¥à¤µà¤¿à¤‚टल देशी जैविक तरबूज का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ कर बà¥à¤°à¤¿à¤•ी के लिठतैयार किया है।
गà¥à¤°à¤¾à¤® पलदूना के कृषक हरà¥à¤·à¤¦ मनोहरलाल मà¥à¤•ाती ने अपनी आय को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठकà¥à¤› नया करने की हिमà¥à¤®à¤¤ कर अपने खेत में मातà¥à¤° 3 बीघा जमीन में जीरों बजट में 200 कà¥à¤µà¤¿à¤‚टल तरबूज का उतपादन किया है। तरबूज का बाजार à¤à¤¾à¤µ 15 रà¥à¤ªà¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलो à¤à¥€ आंकी जाठतो किसान को 3 लाख रà¥à¤ªà¤ की आमदानी होगी।
लहसà¥à¤¨ और सोयाबीन के बगदे से की तरबूज की मलà¥à¤šà¤¿à¤‚ग
किसान ने बताया कि तरबूज के पौधे के आस-पास पॉलीथीन से मलà¥à¤šà¤¿à¤‚ग की जाती है जिसमें करीब 3 बीघा में 18 हजार सà¥à¤°à¥à¤ªà¤ खरà¥à¤š होता है। कृषक ने इस पैसे की बचत कर लहसà¥à¤¨ और सोयाबीन का बगदे से तरबूज के खेत में मलà¥à¤šà¤¿à¤‚ग (देशी आचà¥à¤›à¤¾à¤¦à¤¨) की है। मलà¥à¤šà¤¿à¤‚ग के इस देशी तरीके से करीब 75 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पानी की à¤à¥€ बचत की है।
कचà¥à¤šà¤¾ तरबूज à¤à¥€ मीठा
किसान ने बताया कि तरबूज की फसल में किसी पà¥à¤°à¤•ार खाद व कीटनाशक नहीं डालने के बाद à¤à¥€ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में कोई अंतर नहीं आया है। बीज देशी होने के कारण कचà¥à¤šà¤¾ तरबूज à¤à¥€ बहà¥à¤¤ मीठा है। तरबूज मीठा और जैविक होने के कारण शहर में इसके à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥‡ मिलेंगे।
तरबूज के साथ अंतरवरà¥à¤¤à¥€ फसल à¤à¥€
कृषक ने 3 बीघा जमीन में ही अधिक आमदानी के लिठतरबूज के साथ ही अरà¥à¤¨à¥à¤¤à¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ फसले मा à¤à¤µà¤‚ सूरजना à¤à¥€ लगा रखी है। जिससे तरबूज में दी जाने वाले पानी, जीवामृत, घनामृत à¤à¤µà¤‚ दशपानी अरà¥à¤• में यह फसले à¤à¥€ आ जाठऔर आमदानी अधिक हो।
कृषि महोतà¥à¤¸à¤µ के अंतरà¥à¤—त पलदूना के कृषक हरà¥à¤·à¤¦ मà¥à¤•ाती के खेत पर जाना हà¥à¤† था। किसान ने जीरों बजट में जैविक तरबूज का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ किया है। लहसà¥à¤¨ और सोयाबीन के बगदे से पौधों के आसपास मलà¥à¤šà¤¿à¤‚ग की है, जिससे पानी और हजारों रà¥à¤ªà¤ की बचत की गई। - उदय अगà¥à¤¨à¤¿à¤¹à¥‹à¤¤à¥à¤°à¥€, कृषि विसà¥à¤¤à¤¾à¤° अधिकारी बड़नगर
तरबूज में डाला जीवामृत, घनामृत à¤à¤µà¤‚ दशपरà¥à¤£à¥€ अरà¥à¤•
कृषक ने बताया कि घर पर तरबूज लाकर बीज à¤à¤•तà¥à¤° कर खेत में बà¥à¤†à¤ˆ की थी। इसके बाद खाद के रूप में गà¥à¥œ, बेसन, गौमूतà¥à¤°, देशी गाय का गोबर से निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ घनामृत, फसल को पोषक ततà¥à¤µ देने के लिठà¤à¤µà¤‚ हरा व ताजा रखने के लिठपानी, गौमूतà¥à¤°, देशी गाय का गोबर, गà¥à¥œ, बेसन à¤à¤µà¤‚ बरगद के पेड़ के नीचे से ली गई मिटà¥à¤Ÿà¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ जीवामृत, कीटनाशक दवाई की जगह दशपरà¥à¤£à¥€ अरà¥à¤• बनाकर तरबूज में सà¥à¤ªà¥‡à¥à¤° किया गया है।