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यहां रोज आते हैं श्रीहरि, तो वहां अमर आल्हा करते हैं पूजा

छत्तीसगढ़ के राजिम में एक ऐसा मंदिर है जहां हर रोज सुप्रभात में भगवान श्रीहरि आते हैं। हैरान कर देने वाली बात यह है कि श्रीहरि के आने के साक्ष्य भी यहां मौजूद रहते हैं। राजिम के जिस मंदिर में श्री हरि आते हैं, उस मंदिर का नाम राजीवलोचन मंदिर है।

यह मंदिर महानदी, पैरी नदी तथा सोंढुर नदी का संगम के नजदीक है। छत्तीसगढ़ में यह नदियां त्रिवेणी कहलाती हैं। इन्हीं के तट पर मौजूद है राजीव लोचन मंदिर। सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार मंदिर में रात्रि के समय भगवान के लिए छोटे-छोटे गद्दे, चादर आदि से बिस्तर लगाया जाता है!

उनके पास एक कटोरी में तेल भी रखा जाता है। इसके बाद पुजारी मंदिर के पट बंद कर देते हैं! आश्चर्यजनक रूप से जब अगले दिन मंदिर के पट खोले जाते है तब कटोरी में रखा तेल नहीं मिलता है। रहती हैं तो सिर्फ बिस्तर पर सलवटें!

बिस्तर पर मिली सलवटों को देख आस्था का वो स्वरूप दिखाई देता है जिस पर प्रश्न करना ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती देने के समान है। हू-ब-हू ऐसा ही घटनाक्रम मैहर में भी देखा जा सकता है। मैहर मध्य प्रदेश के सतना जिले का एक छोटा सा शहर है। जहां प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां शारदा का मंदिर है।

यहां जब पट बंद करते हैं तो कुछ भी नहीं ऱखा जाता और सुबह होते ही यहां मां शारदा की पूजा हो चुकी होती है। कहते हैं सर्वप्रथम यह पूजा मां के अमर भक्त आल्हा करते हैं।

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