चमतà¥à¤•ारी हैं हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा की ये 5 चौपाइयां
हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा से कौन परिचित नहीं है, लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते हैं कि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा बनी कैसी? तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ ने कहां से इसकी रचना की? दरअसल, हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ ये चौपाइयां उनके बचपन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हैं।
हिंदू धरà¥à¤® गà¥à¤°à¤‚थों में वरà¥à¤£à¤¨ मिलता है कि बचपन में जब हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ ने सूरà¥à¤¯ को मà¥à¤‚ह में रख लिया तब सूरà¥à¤¯ को मà¥à¤•à¥à¤¤ कराने के लिठदेवराज इंदà¥à¤° ने हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ पर शसà¥à¤¤à¥à¤° से पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किया।
इसके बाद हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी मूरà¥à¤›à¤¿à¤¤ हो गठथे। देवताओं ने जिन मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ और हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ की विशेषताओं को बताते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शकà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की थी, उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ के सार को गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ ने हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ किया गया है।
हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा में चौपाइयां ही नहीं, बलà¥à¤•ि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ के पराकà¥à¤°à¤® की विशेषताà¤à¤‚ बताई गईं हैं। यही कारण है कि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा का नियमित पाठकिया जाठतो यह परम फलदायी सिदà¥à¤§ होती है। वैसे, हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को शà¥à¤ होता है।
हम यहां हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा की पांच चौपाइयों के बारे में बताà¤à¤‚गे, जिनका पाठकरने पर चमतà¥à¤•ारी फल मिल सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहें, इनका पाठकरते समय उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ की तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿ न करें।
1. à¤à¥‚त-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‡à¥¤à¥¤
महतà¥à¤µ- यदि किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¤¯ सताता है तो वह रोज सà¥à¤¬à¤¹ और शाम में 108 बार इस चौपाई का जप करे। उसे सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के à¤à¤¯ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिल जाà¤à¤—ी।
2. नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनà¥à¤®à¤¤ बल बीरा।।
महतà¥à¤µ- यदि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हमेशा बीमारियों से घिरा रहता है तो वह हर दिन सà¥à¤¬à¤¹-शाम 108 बार जप करके मंगलवार को हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी की मूरà¥à¤¤à¤¿ के सामने पूरी हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा के पाठकरता है तो उसे तमाम तरह के रोग से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिलती है।
3. अषà¥à¤Ÿ-सिदà¥à¤§à¤¿ नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
महतà¥à¤µ- यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ रोज बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ में आधा घंटा इन पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जप करे तो à¤à¤¸à¥‡ जप से लाठपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो सकता है। उसे तमाम तरह की सिदà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती हैं।
4. विदà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¾à¤¨ गà¥à¤¨à¥€ अति चातà¥à¤°à¥¤ रामकाज करीबे को आतà¥à¤°à¥¤à¥¤
महतà¥à¤µ- यदि विदà¥à¤¯à¤¾ और धन चाहिठतो इन पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जप से हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ मिलता है। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 108 बार धà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• जप करने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के धन समà¥à¤¬à¤‚धित दà¥à¤ƒà¤– दूर हो जाते हैं।
5. à¤à¥€à¤® रूप धरि असà¥à¤° संहारे। रामचंदà¥à¤°à¤œà¥€ के काज संवारे।।
महतà¥à¤µ- यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ शतà¥à¤°à¥à¤“ं से परेशान हैं या वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के कारà¥à¤¯ नहीं बन पा रहे हैं तो हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा की इस चौपाई का कम से कम 108 बार जप करना चाहिà¤à¥¤
हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा से कौन परिचित नहीं है, लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते हैं कि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा बनी कैसी? तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ ने कहां से इसकी रचना की? दरअसल, हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ ये चौपाइयां उनके बचपन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हैं। हिंदू धरà¥à¤® गà¥à¤°à¤‚थों में वरà¥à¤£à¤¨ मिलता है कि बचपन में जब हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ ने सूरà¥à¤¯ को मà¥à¤‚ह में रख लिया तब सूरà¥à¤¯ को मà¥à¤•à¥à¤¤ कराने के लिठदेवराज इंदà¥à¤° ने हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ पर शसà¥à¤¤à¥à¤° से पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किया। इसके बाद हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी मूरà¥à¤›à¤¿à¤¤ हो गठथे। देवताओं ने जिन मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ और हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ की विशेषताओं को बताते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शकà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की थी, उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ के सार को गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ ने हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ किया गया है। हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा में चौपाइयां ही नहीं, बलà¥à¤•ि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ के पराकà¥à¤°à¤® की विशेषताà¤à¤‚ बताई गईं हैं। यही कारण है कि हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा का नियमित पाठकिया जाठतो यह परम फलदायी सिदà¥à¤§ होती है। वैसे, हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को शà¥à¤ होता है। हम यहां हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा की पांच चौपाइयों के बारे में बताà¤à¤‚गे, जिनका पाठकरने पर चमतà¥à¤•ारी फल मिल सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहें, इनका पाठकरते समय उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ की तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿ न करें। 1. à¤à¥‚त-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‡à¥¤à¥¤ महतà¥à¤µ- यदि किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¤¯ सताता है तो वह रोज सà¥à¤¬à¤¹ और शाम में 108 बार इस चौपाई का जप करे। उसे सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के à¤à¤¯ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिल जाà¤à¤—ी। 2. नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनà¥à¤®à¤¤ बल बीरा।। महतà¥à¤µ- यदि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हमेशा बीमारियों से घिरा रहता है तो वह हर दिन सà¥à¤¬à¤¹-शाम 108 बार जप करके मंगलवार को हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी की मूरà¥à¤¤à¤¿ के सामने पूरी हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा के पाठकरता है तो उसे तमाम तरह के रोग से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिलती है। 3. अषà¥à¤Ÿ-सिदà¥à¤§à¤¿ नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। महतà¥à¤µ- यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ रोज बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ में आधा घंटा इन पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जप करे तो à¤à¤¸à¥‡ जप से लाठपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो सकता है। उसे तमाम तरह की सिदà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती हैं। 4. विदà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¾à¤¨ गà¥à¤¨à¥€ अति चातà¥à¤°à¥¤ रामकाज करीबे को आतà¥à¤°à¥¤à¥¤ महतà¥à¤µ- यदि विदà¥à¤¯à¤¾ और धन चाहिठतो इन पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जप से हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ जी का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ मिलता है। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 108 बार धà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• जप करने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के धन समà¥à¤¬à¤‚धित दà¥à¤ƒà¤– दूर हो जाते हैं। 5. à¤à¥€à¤® रूप धरि असà¥à¤° संहारे। रामचंदà¥à¤°à¤œà¥€ के काज संवारे।। महतà¥à¤µ- यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ शतà¥à¤°à¥à¤“ं से परेशान हैं या वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के कारà¥à¤¯ नहीं बन पा रहे हैं तो हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ चालीसा की इस चौपाई का कम से कम 108 बार जप करना चाहिà¤à¥¤